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'पाकिस्तान की जगह हरियाणा-पंजाब करे इस पानी का इस्तेमाल', SYL मुद्दे पर CM खट्टर की मांग

पंजाब-हरियाणा के मुख्यमंत्रियों के बीच SYL मामले को लेकर हुई बैठक बेनतीजा रही. कारण, इस बैठक में पंजाब ने हरियाणा को पानी देने से साफ इनकार कर दिया है. वहीं इस पर हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि पंजाब इस बात पर सहमत है कि पानी पाकिस्तान की ओर भेजा जाए. हम कहेंगे कि पानी को पाकिस्तान की ओर मोड़ने की बजाय, पानी का इस्तेमाल पंजाब और हरियाणा को करना चाहिए.

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सतलुज यमुना लिंक (SYL) नहर मुद्दे पर गुरुवार को चर्चा के लिए हुई बैठक में SYL मामले को लेकर हुई बैठक बेनतीजा रही. कारण, इस बैठक में पंजाब ने हरियाणा को पानी देने से साफ इनकार कर दिया है. वहीं इस पर हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि पंजाब इस बात पर सहमत है कि पानी पाकिस्तान की ओर भेजा जाए. हम कहेंगे कि पानी को पाकिस्तान की ओर मोड़ने की बजाय, पानी का इस्तेमाल पंजाब और हरियाणा को करना चाहिए. हम बैठकर समाधान निकाल सकते हैं. 

उधर, बैठक के बाद पंजाब के सीएम भगवंत मान ने सीधे तौर पर कहा कि हमने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल को बता दिया है कि पंजाब का काफी इलाका पहले से ही डार्क जोन में है और हमारे पास बिल्कुल भी पानी किसी भी राज्य के साथ शेयर करने के लिए नहीं है.

सीएम भगवंत मान ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में भी वो पंजाब सरकार की ओर से अपनी सारी दलीलें रखेंगे और पंजाब की समस्या के बारे में बताएंगे. नहर बनाने का सवाल तब होता है जब उसमें देने के लिए हमारे पास पानी हो. ऐसे में नहर बनाकर हमें क्या करना है. पाकिस्तान को हमारी और से कोई पानी नहीं दिया जा रहा सिर्फ बरसात के दिनों में बाढ़ के दौरान थोड़ा पानी उस तरफ छोड़ा गया था.

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बता दें कि इस मुद्दे पर पिछले एक साल के दौरान दोनों मुख्यमंत्रियों के बीच यह तीसरी बैठक थी. चालू वर्ष के दौरान शेखावत की अध्यक्षता में यह दूसरी बैठक थी, जिसमें दोनों सीएम मौजूद थे. बैठक से पहले, पंजाब के कुछ किसान संगठनों ने बैठक के खिलाफ मोहाली में विरोध प्रदर्शन किया था और कहा कि पंजाब के पास किसी के साथ साझा करने के लिए अतिरिक्त पानी नहीं है.

गौरतलब है कि एसवाईएल नहर का मुद्दा पिछले कई वर्षों से दोनों राज्यों के बीच विवाद का विषय बना हुआ है. रावी और ब्यास नदियों से दोनों राज्यों के बीच पानी के प्रभावी बंटवारे के लिए नहर की परिकल्पना की गई थी. इस परियोजना में 214 किलोमीटर लंबी नहर बनाने का प्लान था, जिसमें से 122 किलोमीटर का हिस्सा पंजाब में और शेष 92 किलोमीटर का हिस्सा हरियाणा में बनाया जाना था. हरियाणा ने अपने क्षेत्र में इस परियोजना को पूरा कर लिया है. पंजाब ने 1982 में काम शुरू किया था लेकिन बाद में इसे रोक दिया गया. 

हरियाणा सरकार एसवाईएल नहर के निर्माण पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू कराना चाहती है. एसवाईएल मुद्दे का जिक्र करते हुए मान ने कहा, ''चूंकि मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है, इसलिए कोर्ट ने केंद्र को निर्देश दिया कि दोनों राज्यों को एक बैठक करनी चाहिए. पंजाब की तरफ से मैंने अपना पक्ष रखा, मैंने वही रुख रखा है जो मैंने पहले भी रखा था. हमारे पास पानी नहीं है, तो हम नहर कैसे बना सकते हैं?" 

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