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देश के असली ‘परजीवी’ एक प्रतिशत अमीर, राज्यसभा में बजट चर्चा पर बोले चिदंबरम

राज्यसभा में बजट पर सामान्य चर्चा के दौरान पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा कि ये सरकार मानती है कि सप्लाई साइड सही करने से अर्थव्यवस्था ठीक हो जाएगी. जबकि मांग बढ़ाने की जरूरत है. बजट में गरीबों की अनदेखी की गई है, जानें और क्या-क्या कहा चिदंबरम ने..

पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम (Photo:File) पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम (Photo:File)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 'सरकार मांग बढ़ाने पर दे ध्यान'
  • 'देश की अर्थव्यवस्था ICU में'

राज्यसभा में बजट पर सामान्य चर्चा के दौरान पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा कि ये सरकार मानती है कि सप्लाई साइड सही करने से अर्थव्यवस्था ठीक हो जाएगी. जबकि मांग बढ़ाने की जरूरत है. बजट में गरीबों की अनदेखी की गई है, जानें और क्या-क्या कहा चिदंबरम ने..

अर्थव्यवस्था ICU में
पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने राज्यसभा में कहा ‘पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉक्टर अरविंद सुब्रहमणियम ने कहा था कि कोविड से पहले ही देश की अर्थव्यवस्था ICU में है. नोबल पुरस्कार प्राप्त अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी ने भी देश की अर्थव्यवस्था को खराब हालत में बताया है. देश की अर्थव्यवस्था में 8 तिमाहियों से नरमी जारी है. सरकार denial mode में है. वह अर्थव्यस्था में नरमी की सच्चाई को स्वीकार नहीं करना चाहती.’

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‘सब ठीक है’
चिदंबरम ने कहा कि वित्त मंत्री और सरकार के अन्य प्रवक्ता हमारी चिंताओं पर विचार नहीं करना चाहते. वह बस बार-बार यह दिखाते हैं कि ‘सब ठीक है.’ बार-बार कहते हैं कि अर्थव्यवस्था में अगली तिमाही में वृद्धि लौट आएगी. लेकिन अर्थव्यवस्था में दो साल की नरमी सच्चाई है और उसके बाद कोविड आ गया. हमने सरकार से कई बार कहा कि वह जब भी अर्थव्यस्था में नरमी को दूर करने के प्रयास करे तो दो काम करे, पहला कि वह गरीबों तक पैसा पहुंचाए, नकद पैसा पहुंचाए और दूसरा सरकार के गोदामों में टनों पड़े अनाज को गरीबों तक मुफ्त पहुंचाए. लेकिन बजट 2021-22 में गरीबों को छोटी से छोटी राशि नकद देने का प्रावधान नहीं है ना ही मुफ्त राशन की व्यवस्था को जारी रखा गया है.

सप्लाई साइड थ्योरी वाले
पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि इस सरकार का मानना है कि सप्लाई साइड ठीक करने से अर्थव्यवस्था ठीक हो जाएगी. हाथ में पांच उंगलियां होती हैं और वह गिनकर बता सकते हैं कि कौन-कौन इस सप्लाई साइड की थ्योरी का समर्थन करते हैं. पहली तो खुद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण हैं, दूसरे मुख्य आर्थिक सलाहकार, तीसरे नीति आयोग में बैठे अर्थशास्त्री और चौथे प्रधानमंत्री के भाषण लिखने वाले. पांचवे की उन्हें अभी भी तलाश है. जबकि अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए दुनिया के हर अर्थशास्त्री ने कहा है कि हमें मांग बढ़ाने पर ध्यान देना होगा और इसके लिए हमें लोगों के हाथ में पैसा पहुंचाना होगा.

असली परजीवी कौन?
पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने बजट में गरीब तबके की अनदेखी करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि ये ‘अमीरों का, अमीरों के लिए, अमीरों द्वारा लाया बजट है.’ उन्होंने कहा कि हम सरकार की नीतियों का विरोध करते हैं तो हमें ‘आंदोलनजीवी’ और ‘परजीवी’ कहा जाता है. लेकिन असल में ‘परजीवी’ वो एक प्रतिशत लोग हैं जिनके पास देश की 73 प्रतिशत संपदा का नियंत्रण है. हम लोगों की ओर से सरकार के इस बजट को खारिज करते हैं. मांग करते हैं कि सरकार इस बजट को संशोधन करे और गरीबों के हाथ में पैसा पहुंचाए, उन्हें मुफ्त राशन पहुंचाए.

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