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PM की तारीफ के बाद कांग्रेस को शिवसेना की नसीहत, मोदी-शाह-नड्डा से सीखो चुनाव जीतना

शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना के संपादकीय में मोदी-शाह-नड्डा की बड़ाई की. कांग्रेस को नसीहत देते हुए शिवसेना ने कहा कि उत्तर प्रदेश में योगी बनाम मोदी के गुप्त संघर्ष के बावजूद मोदी-शाह-नड्डा का नेतृत्व मजबूत है.

संजय राउत के साथ सीएम उद्धव ठाकरे (फाइल फोटो) संजय राउत के साथ सीएम उद्धव ठाकरे (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • शिवसेना ने कांग्रेस को दी नसीहत
  • कहा- अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है कांग्रेस

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की मुलाकात के बाद अचानक शिवसेना का रुख बदल गया है. शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना के संपादकीय में मोदी-शाह-नड्डा की बड़ाई की. कांग्रेस को नसीहत देते हुए शिवसेना ने कहा कि उत्तर प्रदेश में योगी बनाम मोदी के गुप्त संघर्ष के बावजूद मोदी-शाह-नड्डा का नेतृत्व मजबूत है.

शिवसेना ने कहा, 'पार्टी में अंदरूनी विद्रोह होता ही रहता है, इससे भाजपा जैसी पार्टी भी मुक्त नहीं है, पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस से उधार लिए गए सभी लोग वापस अपने घर लौटने लगे हैं, उत्तर प्रदेश में योगी बनाम मोदी ऐसा गुप्त संघर्ष चल रहा है, ऐसी 'मीडिया रिपोर्ट है. ये सब होने के बाद भी मोदी, शाह और नड्डा का नेतृत्व मजबूत है और भाजपा जमीन पर है.'

शिवसेना ने कहा, 'पुराने लोग चले जाएं तो भी नए लोगों को तैयार करने की क्षमता उनमें है. चुनाव जीतने की तकनीक उन्होंने सीख ली है. उदाहरण के लिए, उत्तर प्रदेश चुनावों को ध्यान में रखते हुए, अनूपचंद्र पांडे को चुनाव आयुक्त के रूप में नियुक्त किया गया था. पांडे उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव हैं. अब उनकी देखरेख में उत्तर प्रदेश का चुनाव होगा.'

शिवसेना ने कहा, 'चुनाव से पहले जितिन प्रसाद जैसे दूसरी पार्टी के युवा नेताओं को पार्टी में शामिल किया जाएगा. उत्तर प्रदेश के एक युवा कांग्रेसी नेता जितिन प्रसाद का भाजपा में प्रवेश, यह कोई मुद्दा नहीं हो सकता है, लेकिन प्रसाद के रूप में कांग्रेस को तोड़ने का उत्सव भाजपा ने मनाना शुरू कर दिया है, यह दिलचस्प बात है.'

कांग्रेस को नसीहत देते हुए शिवसेना ने कहा, 'कांग्रेस महाराष्ट्र, कर्नाटक और केरल को छोड़ दें तो कांग्रेस अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है. देश का राजनीतिक संतुलन बिगाड़ने वाली यह तस्वीर है. यह लोकतंत्र के लिए घातक स्थिति है. अब राहुल गांधी को पार्टी में उनकी एक मजबूत टीम तैयार करनी ही होगी. यही सवाल का ठोस जवाब हो सकता है.'

 

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