लोकसभा में बुधवार को महिला आरक्षण बिल यानी की 'नारी शक्ति वंदन' अधिनियम पर चर्चा हुई. इस दौरान सोनिया गांधी से लेकर अनुप्रिया पटेल और स्मृति ईरानी तक कई सांसदों ने इस बिल पर चर्चा की. अपने संबोधन के दौरान समाजवादी पार्टी से सांसद डिंपल यादव ने कहा कि सपा की हमेशा मांग रही है कि इसमें एससी, एसटी, ओबीसी और अल्पसंख्यकों को भी शामिल किया जाए. उम्मीद है कि सरकार इस बिल में मुस्लिम महिलाओं को भी शामिल करेगी.
डिंपल की मांग का केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने दो टूक जवाब दिया. उन्होंने कहा कि संविधान में धर्म के आधार पर आरक्षण की व्यवस्था नहीं है. उन्होंने आगे कहा कि आज लोग कह रहे हैं कि उनके चिट्ठियां लिखने के कारण यह काम हुआ. इससे साबित होता है कि उन्होंने स्वीकार किया है कि वह पक्षपात करते रहे, लेकिन मोदी सरकार ने बड़ा दिल दिखाकर आपके हर कम्युनिकेशन को पढ़ा और चर्चा की.
एक परिवार ने नहीं, नसिम्हा सरकार ने किया संशोधन
स्मृति ईरानी ने आगे कहा,'हमें बार बार बताया जाता कि एक विशेष परिवार ने 73-73 संविधान संशोधन कराए. लेकिन आज उन्होंने स्पष्ट किया कि ये काम नरसिम्हा राव की सरकार ने किया. दूसरा ये कथन कि अभी क्यों नहीं? इस वक्त हमारा बिल है, इसलिए अभी करिए की बात हो रही है. ये बिल की प्रति है, जिसको वे हमारा कहती हैं. इसके दूसरे पेज पर 2बी, और 3बी पढ़ें, ये वो है, जो कांग्रेस कहती है कि यूपीए सरकार में राज्यसभा में पारित हुआ, फिर लोकसभा में प्रस्तुत हुआ. अगर ये दोनों सेक्शन पढ़ें तो लिखा है कि 10 साल तक औरतें मेहनत करें और तीसरे चुनाव में आपके अधिकार को छीन लिया जाएगा.'
लोकसभा में सोनिया गांधी ने भी किया संबोधित
इससे पहले कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने अपने संबोधन में कहा,'भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की तरफ से मैं नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में खड़ी हूं. धुएं से भरी हुई रसोई से लेकर रोशनी से जगमगाते हुए स्टेडियम तक भारत की स्त्री का सफर बहुत लंबा है. लेकिन आखिरकार उसने मंजिल को छू लिया है. उसने जन्म दिया, उसने परिवार चलाया, उसने पुरुषों के बीच तेज दौड़ लगाई और असीम धीरज के साथ अक्सर खुद को हारते हुए, लेकिन आखिरी बाजी में जीतते हुए देखा.'
थकना और आराम करना नहीं जानती महिलाएं
सोनिया ने कहा,'भारत की स्त्री के ह्रदय में महासागर जैसा धीरज है, उसने खुद के साथ हुई बेईमानी की शिकायत नहीं की और सिर्फ अपने फायदे के बारे में कभी नहीं सोचा. उसने नदियों की तरह सबकी भलाई के लिए काम किया है और मुश्किल वक्त में हिमालय की तरह अडिग रही. स्त्री के धैर्य का अंदाज लगा पाना नामुमकिन है. वह आराम को नहीं पहचानती और थक जाना भी नहीं जानती है. स्त्री हमारे महान देश की मां है. लेकिन उसने हमें सिर्फ जन्म ही नहीं दिया है, बल्कि अपने आंसुओं और खून पसीने से सींचकर हमें अपने बारे में सोचने लायक बुद्धिमान और शक्तिशाली भी बनाया है.'