संसद के शीतकालीन सत्र के 10वें दिन, लोकससभा और राज्यसभा का तापमान थोड़ा बढ़ गया. लोकसभा शुरू होते ही वहां नारे सुनाई दिए, शोर इतना था कि कार्यवाही को आधा घंटे के लिए स्थगित करना पड़ा. लेकिन इस हंगामे की वजह क्या थी? असल में लोकसभा में भारतीय जनता पार्टी के सांसद, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मांफी की मांग कर रहे थे. मल्लिकार्जुन खड़गे ने कल अलवर में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान भाषण दिया था, इस दौरान दिए गए उनके एक बयान पर बीजेपी को आपत्ति थी.
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से माफी की मांग राज्यसभा में भी सुनाई देने लगी. सदन के नेता पीयूष गोयल ने सदन में अपनी बात रखी. उन्होंने नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बयान पर उनसे माफी की मांग की.
'मैं इसकी घोर निंदा करता हूं'
पीयूष गोयल ने सदन में कहा- 'कांग्रेस अध्यक्ष ने अभद्र भाषा का अलवर में का प्रयोग किया. बेबुनियाद बातें कहीं और असत्य को देश के सामने रखने की कोशिश की. मैं इसकी घोर निंदा करता हूं और उनसे माफी की मांग करता हूं. उन्हें भाजपा, सदन और देश की जनता से माफी मांगनी चाहिए, जिन्होंने इस पार्टी को चुना है. इस पार्टी के लिए इन्होंने अभद्र भाषा का उपयोग किया. जिस तरह से उन्होंने अपनी सोच और ईर्ष्या का प्रदर्शन किया. उन्हें इस बात का दुख हो सकता है, ईर्ष्या हो सकती है कि उनकी पार्टी को कोई स्वीकार नहीं कर रहा है.'

'ये पार्टी के ऐसे अध्यक्ष हैं जिन्हें भाषण देना नहीं आता'
उन्होंने आगे कहा- 'इस प्रकार का अभद्र भाषण देना सभी का अपमान है. ये हर वोटर का अपमान है. मैं उनका व्यवहार और उनकी भाषा की निंदा करता हूं. मुझे याद आता है आजादी के बाद गांधी जी ने कहा था कि कांग्रेस पार्टी को ही वाइंड अप कर देना चाहिए. खड़गे जी इसका जीता जागता प्रतीक हैं और ये दिखा रहे हैं कि तब गांधी जी ने सत्य ही कहा था. ये पार्टी के ऐसे अध्यक्ष हैं जिन्हें भाषण देना नहीं आता. उन्हें माफी मांगनी चाहिए, जब तक माफी न मांगे, तब तक उन्हें यहां रहने का कोई अधिकार नहीं है.'
'फ्रीडम मूवमेंट में इन लोगों का कोई रोल नहीं था'
इसपर राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को अपनी बात रखने का मौका दिया. खड़गे ने राज्यसभा में अपना पक्ष रखा. उन्होंने कहा- 'भाषण में मैंने जो भी कहा वो राजनीतिक था और सदन के बाहर कहा था. उसपर यहां चर्चा करने की आवश्यकता नहीं है. मैं अभी भी कह सकता हूं कि आजादी के वक्त फ्रीडम मूवमेंट में इन लोगों का कोई रोल नहीं था. ये माफी मांग रहे हैं?' इस बात पर सदन में जोरदार हंगामा हुआ. कुछ देर माहौल गर्म रहा, फिर सभापति ने सबको शांत कराया और दोबारा नेता प्रतिपक्ष को बोलने के लिए कहा.

'उन्होंने तो अपनी जान दी, तुमने क्या किया?'
मल्लिकार्जुन खड़गे ने आगे कहा- 'जो मैंने भाषण में कहा अगर वो यहां कहा तो इन लोगों के लिए बहुत मुश्किल हो जाएगी. जो आजादी के लिए लड़े हैं उनसे आप माफी मांगने के लिए कह रहे हैं. भाजपा द्वारा ये बात कही गई कि देश में एकता रखने के लिए कांग्रेस पार्टी 'भारत तोड़ो' यात्रा कर रही है. तब मैंने कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा देश को जोड़ने की बात करती है. इसके लिए इंदिरा गांधी जी ने अपनी जान दी, राजीव गांधी ने अपनी जान दी. आप में से कौन लोग इस देश की एकता के लिए जान दिए हैं. मैंने ये कहा, क्या ये सच नहीं है? उन्होंने तो अपनी जान दी, देश को बचाया, तुमने क्या किया? मैं ऐसे लोगों से सुनना नहीं चाहता.'
नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की बात के बाद पीयूष गोयल ने यह भी कहा- 'नेता प्रतिपक्ष को शायद ये याद नहीं है कि कांग्रेस की वजह से जम्मू-कश्मीर की ये हालत हुई है. इन्हें ये याद नहीं है कि उनके समय चीन ने 38 हजार किलोमीटर भारत की ज़मीन हड़पी थी. ये भूल रहे हैं कि इन्होंने कैसे बाबा साहेब अंबेडकर का अपमान किया. ये श्यामा प्रसाद मुखर्जी का बलिदान भूल गए. इन्हें माफी मांगनी चाहिए.'
इसके बाद सभापति के समझाने पर राज्यसभा सदस्य शांत हुए और सभा की कार्यवाही आगे बढ़ी.