scorecardresearch
 

देश के 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव, थम गई पेट्रोल-डीजल की रफ्तार!

जहां एक तरफ पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोत्तरी को लेकर संसद में लगातार गतिरोध बना हुआ है, वहीं 4 राज्यों और 1 केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव शुरु होने से पहले देश में पिछले कई दिनों से पेट्रोल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं, जबकि बाजार की चाल में बहुत बदलाव आ चुका है..

देश में पेट्रोल की कीमतें उच्च स्तर पर हैं (सांकेतिक फोटो) देश में पेट्रोल की कीमतें उच्च स्तर पर हैं (सांकेतिक फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • बाजार से तय होती हैं पेट्रोल-डीजल की कीमतें
  • 11 दिन से स्थिर बनी हुई हैं ईंधन की कीमतें
  • कच्चा तेल 61 से बढ़कर हुआ 68 डॉलर प्रति बैरल

जहां एक तरफ पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोत्तरी को लेकर संसद में लगातार गतिरोध बना हुआ है, वहीं 4 राज्यों और 1 केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव शुरु होने से पहले देश में पिछले कई दिनों से पेट्रोल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं.

27 फरवरी से नहीं बढ़े दाम
देश में पेट्रोल की कीमतों में 27 फरवरी के बाद कोई बदलाव नहीं हुआ है.  यह विधानसभा चुनाव शुरू होने से ठीक एक महीने पहले की स्थिति है. कोलकाता में 27 फरवरी के बाद से पेट्रोल की कीमतें 91.34 रुपये प्रति लीटर पर हैं. जबकि चेन्नई में 93.10 और दिल्ली में 91.17 रुपये लीटर पर ही बने हुए हैं.

जबकि कीमतों पर नहीं सरकार का बस
पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सोमवार 8 मार्च को संसद में कहा था कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें बाजार तय करता है. यह सरकार के नियंत्रण में नहीं आती हैं. सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियां विभिन्न आधारों पर उचित कीमत का फैसला लेती हैं. इसमें कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें, रुपये की विनिमय दर, कर ढांचा, मालवहन लागत इत्यादि शामिल हैं.

बाजार कह रहा कुछ और
पेट्रोल और डीजल की कीमतें 27 फरवरी के बाद से भले ना बदली हों और सरकार का इन पर बस भी ना हो लेकिन जिन वजह से यह बढ़ती है बाजार उन्हें लेकर कुछ और ही कह रहा है.

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 27 फरवरी से 9 मार्च के बीच 61 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 68 डॉलर प्रति बैरल हो गई हैं. जबकि रुपये की विनिमय दर भी पिछले 11 दिन में 73.6 रुपये प्रति डॉलर से बदलकर 73.3 रुपये प्रति डॉलर हो गई है.
इसके अलावा केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से कर की दर भी ऊंची बनी हुई है.

कोरोना महामारी के चलते ऊंचे कर
चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से जून के बीच कोरोना के चलते कड़ा लॉकडाउन रहा. इसके बाद कर राजस्व के नुकसान की भरपाई के लिए कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कम कीमतें होने के बावजूद केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से पेट्रोल-डीजल पर ऊंचा कर वसूला गया. केंद्र सरकार चालू वित्त वर्ष के शुरुआती 10 महीने में इस मद से तीन लाख करोड़ रुपये का राजस्व जुटा चुकी है जो इससे पिछले पूरे वित्त वर्ष में 1.8 लाख करोड़ रुपये था.

27 मार्च से विधानसभा चुनाव
देश के चार प्रमुख राज्य असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल के साथ पुडुच्चेरी केंद्र शासित प्रदेश में 27 मार्च से विधानसभा चुनाव होने हैं और पेट्रोल एवं डीजल की कीमतों में पूरे एक महीने पहले 27 फरवरी से बदलाव नहीं हुआ है. इससे पहले कर्नाटक और अन्य राज्यों के चुनाव के दौरान भी यह ट्रेंड देखा गया था.

ये भी पढ़ें: 

 

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें