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किसान से लेकर चीन मुद्दे तक, संसद के बजट सत्र में सियासी जोरआजमाइश की तैयारी

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को बजट पेश करेंगी, लेकिन उससे पहले सरकार सदन में आर्थिक सर्वेक्षण रखेगी. कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन को देखते हुए बजट सत्र के हंगामेदार रहने के आसार साफ नजर आ रहे हैं. किसान आंदोलन, भारत-चीन मुद्दे, देश की गिरती अर्थ व्यवस्था और व्हाट्सएप चैट्स लीक मामले को लेकर विपक्ष सदन में मोदी सरकार को घेरने की कवायद में है.

संसद का बजट सत्र संसद का बजट सत्र
स्टोरी हाइलाइट्स
  • किसान आंदोलन के बीच शुरू हो रहा बजट सत्र
  • किसानों के मुद्दे पर संसद में हंगामे के आसार
  • चीन सीमा विवाद को विपक्ष उठाने की तैयारी में

संसद का बजट सत्र शुक्रवार से शुरू हो रहा है, जो दो चरणों में होगा. कोरोना संक्रमण की वजह से संसद की कई परंपराओं को दरकिनार करते हुए नए 'प्रोटोकोल' के हिसाब से संसद का बजट सत्र चलेगा. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को बजट पेश करेंगी, लेकिन उससे पहले सरकार सदन में आर्थिक सर्वेक्षण रखेगी. कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन को देखते हुए बजट सत्र के हंगामेदार रहने के आसार साफ नजर आ रहे हैं. किसान आंदोलन, भारत-चीन मुद्दे, देश की गिरती अर्थ व्यवस्था और व्हाट्सएप चैट्स लीक मामले को लेकर विपक्ष सदन में मोदी सरकार को घेरने की कवायद में है. 

राष्ट्रपति का अभिभाषण होगा
परम्परा के मुताबिक ही साल के इस पहले संसद सत्र की शुरुआत राष्ट्रपति के अभिभाषण से होगी. उस दिन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद संसद के दोनों सदनों के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित कर सरकार की भावी योजनाओं का खाका पेश करेंगे. ऐसा पहली बार ही होगा कि संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण के दौरान भी सदस्य 'सेंट्रल हॉल' के अलावा लोक सभा और राज्य सभा में बैठेंगे. सत्र के पहले ही दिन सरकार 2020-21 के लिए आर्थिक सर्वेक्षण भी संसद में पेश करेगी. बजट सत्र दो भागों में होगा, जिसमें पहला सत्र 15 फरवरी तक चलेगा जबकि दूसरे दौर में सत्र 8 मार्च से लेकर 8 अप्रैल तक चलेगा.

पीएम विपक्ष के नेताओं के साथ करेंगे बैठक
किसान आंदोलन के बीच शुरू हो रहा संसद का बजट सत्र सुचारू ढंग से चले इसको लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 जनवरी को संसद में विपक्ष के नेताओं की बैठक बुलाई है. माना जा रहा है कि एनडीए के घटक दल और विपक्षी पार्टियां भी अलग से बैठकें आयोजित करेंगी ताकि पूरा सत्र बिना किसी रुकावट के चल सके. वहीं, विपक्ष भी संसद में मोदी  सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है. विपक्षी दलों के नेताओं ने इसके लिए अपनी मंशा भी जाहिर कर दी है. 

किसानों का मुद्दा सबसे अहम
सदन में जिन मुद्दों को लेकर विपक्ष सरकार को घेरने की तैयारी कर रहा है, उसमें किसानों का आंदोलन सबसे अहम हैं और मानसून सत्र में पारित किए गए नए कृषि कानून हैं, जिन्हें लेकर दो महीने के किसान दिल्ली की सीमाओं पर बैठे हैं. कांग्रेस के लोकसभा में मुख्य सचेतक कोडिकुन्निल सुरेश ने पहले ही कह दिया है कि सरकार कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग को नहीं मानेगी तो संसद सत्र में किसानों के आंदोलन के मुद्दे को हमारी पार्टी जोरदार तरीके से उठाएगी. हम किसानों के मुद्दे पर संसद में चर्चा और बहस करने के लिए स्थगन प्रस्ताव जैसे सभी उपायों का इस्तेमाल करेंगे. संसद सत्र के लिए एक संयुक्त रणनीति बनाने के लिए समान विचारधारा वाले दलों के साथ भी संपर्क में हैं और मुख्य मुद्दा किसान आंदोलन है.

कांग्रेस ही नहीं बल्कि समाजावदी पार्टी भी कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के समर्थन में लगातार उत्तर प्रदेश की सड़कों पर आंदोलन कर रही है. सपा प्रमुख अखिलेश यादव लगातार किसानों के मुद्दे पर मोदी सरकार को घेरने में जुटे हैं, जिसके चलते माना जा रहा है कि सपा भी संसद में कृषि कानून के खिलाफ जोरदार तरीके से आवाज उठाएगी. टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि ममता बनर्जी की भूमि और किसानों के मुद्दे पर प्रतिबद्धता है. संसद सत्र में केंद्र सरकार को तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने के लिए एक विधेयक पेश करना चाहिए और इसे अधिनियम में बदलना चाहिए

वहीं, किसानों के आंदोलन पर इस बार सदन में बीजेपी को एनडीए के अपने पुराने सहयोगी रहे राजनीतिक दलों के विरोध का सामना करना पड़ सकता है. शिवसेना और अकाली दल इनमें से प्रमुख है, जो कृषि कानून और किसान आंदोलन को लेकर सरकार को घेरने की बात कह रहे हैं. हालांकि, सरकार इस कोशिश में लगी है कि किसानों के मुद्दे पर विपक्षी की रणनीति से कैसे निपटा जाए ताकि संसद में बाधा ना आ सके. 

व्हाट्सएप चैट्स लीक मामला
ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल के पूर्व सीईओ पार्थो दासगुप्ता के साथ रिपब्लिक टीवी के एडिटर इन चीफ अरनब गोस्वामी की व्हाट्सएप चैट्स को लेकर भी कांग्रेस हमलावर है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके इस इस मुद्दे को उठाया था. पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने देश की सुरक्षा के साथ जुड़ी अतिगोपनीय बातों को पत्रकार के साथ शेयर करने का सरकार पर गंभीर आरोप लगाया था. कांग्रेस के लोकसभा में मुख्य सचेतक कोडिकुन्निल सुरेश ने कहा है कि देश की सेना एवं सुरक्षा से जुड़ी जानकारी लीक करना राष्ट्रद्रोह है और कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे को संसद में जोरदार तरीके से उठाएगी. हालांकि, सरकार ने अभी तक चैट्स लीक मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की है. ऐसे में देखना है कि इस मुद्दे पर विपक्ष के हमलों के कैसे सरकार निपटती है. 

भारत-चीन सीमा विवाद
संसद के बजट सत्र में भारत-चीन सीमा विवाद का मुद्दा भी हावी रहेगा. कांग्रेस से लेकर सपा तक चीन मुद्दे पर मोदी सरकार को देश की सुरक्षा करने में असफल बताती आ रही है. ऐसे में विपक्ष सदन में इस मुद्दे को उठा सकता है. राहुल गांधी लगातार चीन मुद्दे पर मोदी सरकार के खिलाफ हमलावर हैं. राहुल ने अरुणाचल की जमीन पर चीनी गांव के निर्माण को लेकर सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सवाल खड़े किए हैं.उन्होंने कहा था कि चीन भारतीय क्षेत्र में अपने कब्जे का विस्तार करता जा रहा है, लेकिन  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन पर एक शब्द नहीं बोलते हैं. चीन के मुद्दे पर कांग्रेस जिस तरह से आक्रमक है, उससे जाहिर है कि सदन में चीन के मुद्दे को लेकर विपक्ष जोरदार तरीके से हंगामा कर सकता है. 

सरकार को अर्थव्यवस्था पर घेरेगा विपक्ष
कोरोना महामारी में बिगड़ी देश की अर्थव्यवस्था को लेकर विपक्ष संसद में सरकार के खिलाफ हमलावर हो सकता है. आरजेडी नेता और राज्य सभा के सदस्य मनोज झा ने कहा कि गिरती हुई अर्थव्यवस्था सबके लिए बड़ी चिंता का विषय है. पहले से ही ये लचर थी और उसपर महामारी का प्रकोप होने से युवाओं के सपनों के साथ-साथ कामगारों की भी कमर टूट गयी है. बड़े पैमाने पर लोगों का रोज़गार चला गया है और उनके सामने कोई विकल्प नहीं है. सरकार भी अभी तक इसपर कुछ नहीं बोल रही है, जिससे लोगों की हिम्मत बंधे. ये मामला आवश्यक है और हम इसे सदन में उठाकर सरकार का ध्यान इस तरफ आकृष्ट करने के कोशिश करेंगे. कांग्रेस भी इस मुद्दे पर सरकार के खिलाफ जिस तरह से आक्रमक रुख अख्तियार कर रखा है, उससे जाहिर है कि सदन में देश की आर्थिक हालत को लेकर चर्चा हो सकती है. 
 

 

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