जो लोग कमाने के बावजूद पैसे को बचा नहीं पाते हैं उनके लिए है लक्ष्मी मंत्र. इसका मंत्र का जाप करने से आपकी बचत में वृद्धि होगी. उत्तर की ओर मुख करके संध्या काल में 7 दिन लगातार 3 बार इसका उच्चारण करें. इससे आप बचत की ओर अग्रसर हो जाएंगे.
अधिकारी को प्रसन्न करने के लिए इस मंत्र का प्रयोग किया जाता है. मंत्र को शांत चित्त से जपा जाना चाहिए. रविवार के दिन से इस मंत्र को प्रारंभ किया जा सकता है. संध्या काल में उत्तर की ओर मुख करके 7 दिन तक लगातार प्रत्येक दिन 3 बार जप करें.
आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए 'विश्वास मंत्र' का प्रयोग किया जाता है. शाम के समय उत्तर की ओर मुख करके बैठ जाएं. 7 दिन तक लगातार 3 बार इस मंत्र का जाप करें.
बुरी आदतें छोड़ने के लिए मारुति मंत्र का प्रयोग किया जाता है. कोई ऐसा व्यसन हो जिसे छोड़ना चाहते हों परन्तु छूट ना रहा हो तो इस मंत्र का जाप कर आप अपने उद्देश्य में सफल हो जाएंगे. संध्या समय उत्तर की ओर मुख करके 9 दिन तक लगातार 7 बार इस मंत्र का जाप करें.
बुरी आदतें छोड़ने के लिए मारुति मंत्र का प्रयोग किया जाता है. कोई ऐसा व्यसन हो जिसे छोड़ना चाहते हों परन्तु छूट ना रहा हो तो इस मंत्र का जाप कर आप अपने उद्देश्य में सफल हो जाएंगे. संध्या समय उत्तर की ओर मुख करके 9 दिन तक लगातार 7 बार इस मंत्र का जाप करें.
दफ्तर में काम करने वाले सभी लोग यही चाहते हैं कि उनका संबंध अपने सहयोगियों के साथ मधुर बना रहे लेकिन शायद ही ऐसा कोई हो जिसका अपने सहयोगियों के कभी ना कभी वाक युद्ध ना हुआ हो. इस मंत्र का जाप करने से यह परेशानी दूर हो सकती है.
डिप्रेशन दूर करने का मंत्र अंजनी मंत्र है. इस मंत्र के जप से 7 दिन में ही डिप्रेशन की भावना से बाहर निकल जाएंगे. 7 दिनों तक दिन में 3 बार करें और पाएं अपनी समस्याओं से छुटकारा.
कभी-कभी हमारे ना चाहते हुए भी हम किसी अप्रिय दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं. इस तरह की दुर्घटना से बचने के लिए कीजिए स्थिर मंत्र का प्रयोग. बुधवार के दिन, संध्या काल में उत्तर की ओर मुख करके 3 बार इसका उच्चारण करें.
रक्षा मंत्र का प्रयोग घर की सुरक्षा के लिए किया जाता है. शाम के समय उत्तर के ओर मुख करके लगातार 7 दिन तक प्रत्येक दिन 3 बार मंत्र का जाप करें. इस मंत्र से घर में असुरक्षा की भावना को हटाने के लिए यह मंत्र जपा जाता है.
कई बार घर में अशांति का सा माहौल होता है. इस माहौल से बाहर निकलने के लिए प्रदक्षिण मंत्र का प्रयोग किया जाता है ताकि घर में शांति लाई जा सकते. प्रातःकाल उठकर पूर्व की ओर मुख करके 7 दिनों तक लगातार 3 बार इस मंत्र का जाप करें.
संध्याकाल में उत्तर की ओर मुख करके लगातार 7 दिन तक 3 बार इसका उच्चारण करें. मगंलवार को इसका प्रारंभ करें तो उत्तम रहेगा. इससे हकलाना समाप्त या कम हो जाती है.
कार्यों में सिद्धि प्राप्त करने के लिए भावना मंत्र का प्रयोग किया जाता है. अर्थात काम में सिद्धि (सफलता) मिलना भी बहुत आवश्यक है. सुबह के समय पूर्व की ओर मुख करके 7 दिन तक लगातार 3 बार इस मंत्र का जप करने से कार्य में सिद्धि मिलनी शुरू हो जाती है.
खर्राटे की समस्या के निदान के लिए मातृ-मंत्र का प्रयोग किया जाता है. संध्या के समय उत्तर की ओर मुख करके 7 दिन तक लगातार 3 बार इस मंत्र का जाप करें.
इस मंत्र का प्रयोग बुद्धि को कुशाग्र करने के लिए किया जाता है. बुधवार से इस मंत्र का जाप शुरु करें. शाम के समय, उत्तर की ओर मुख करके, लगातार 7 दिन तक, प्रत्येक दिन 3 बार इस मंत्र का जाप करें.
हर कोई लंबी आयु चाहता है. इस मंत्र को लगातार 21 दिनों तक 7 बार जाप करने से लंबी उम्र की प्राप्ति होती है. सुबह के समय पूर्व की ओर मुख करके इस मंत्र का जाप करना चाहिए.
चंदन मंत्र का प्रयोग लक्ष्मी की सदा प्राप्ती के लिए किया जाता है. लक्ष्मी आती तो है परन्तु कब आती है और कहां चली जाती है इसका पता ही नहीं चलता. इस समस्या से निजात पाने के लिए और नियमित लक्ष्मी के आगमन के लिए इस मंत्र का जाप करना चाहिए. संध्याकाल में उत्तर की ओर मुख करके लगातार 7 दिन तक प्रत्येक दिन 3 बार इस मंत्र का जाप करें.
मनुष्य का मन सदैव चंचल रहता है लेकिन यदि हम इस मंत्र का उच्चारण करें तो हम अपने मन पर नियंत्रण रख सकते हैं. सुबह के समय पूर्व की ओर मुख करके लगातार 7 दिन तक इस मंत्र का जाप करने से मन एकाग्र चित हो जाता है. प्रत्येक दिन 3 बार इसका जप करें. इससे जिस काम को आप कर रहे हैं उसमें मन लगा रहेगा.
आज के इस तनावभरी जिंदगी में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो जिसका मन पूर्ण रूप से शांति हो लेकिन अगर हम इस मंत्र का स्मरण ध्यानपूर्व करें तो हमें शांति मिलेगी. संध्या के समय उत्तर की ओर मुख करके एक मास तक लगातार इस मंत्र का जाप करें. प्रत्येक दिन तीन बार इसका जाप करें.
जिस किसी व्यक्ति पर मंगल दोष होता है उसका कोई भी काम सफल नहीं होता है. साथ ही लड़का-लड़की की शादी करनी ही है परन्तु मंगली दोष आ रहा हो तो भी इस मंत्र के जाप से इस दोष के निवारण किया जा सकता है.
इस मंत्र का जप मंगलवार को संध्याकाल में करें. तीन दिन तक एक माला अर्थात 108 बार इसका जाप करें. चंदन या तुलसी की माला से ही जप करें. जप के दौरान प्रथमा अंगुली (इंडेक्स फिंगर) से माला को ना छूएं.
मानसिक कलेश को दूर करने के लिए आप करें इस मंत्र का जाप. सोमवार से इस मंत्र को शुरू करना अच्छा रहता है. संध्या समय उत्तर की ओर मुख करके लगातार 7 दिन तक दिन में 3 बार इस मंत्र का जाप करें.
दोष अपाकरण मंत्र. दोष हटाने के लिए यानि की किसी को नजर लग गई हो तो इस मंत्र का प्रयोग करें. संध्या के समय उत्तर की ओर मुख करके बैठ जाएं. लगातार 7 दिन तक प्रत्येक दिन 3 बार इस मंत्र का उच्चारण करें. अच्छा होगा अगर गुरुवार से इस मंत्र को जपना शुरू करें.
सरदर्द, बदन दर्द, जुकाम जैसे छोटे-छोटे दर्द से मुक्त रहने के लिए गंगा मंत्र का प्रयोग किया जाता है. प्रातःकाल उठकर पूर्व की ओर मुख करके लगातार 7 दिन तक 3 बार मंत्र का जप करें. इससे आप सदा निरोगी रहेंगे.
हम में से कई लोगों को रतौंधी की बीमारी होगी. अगर हम हिरण्य मंत्र का स्मरण करें तो हमें इस बीमारी से मुक्ति मिल सकती है. रविवार के दिन से प्रारंभ करके 9 दिन तक लगातार उत्तर की ओर मुख करके 3 बार इस मंत्र का उच्चारण करते हैं तो रतौंधी की बीमारी से लाभ मिलता है.
सदा प्रसन्न रहने के लिए प्रसन्न इस मंत्र का प्रयोग किया जाता है. इस मंत्र का जाप संध्या के समय उत्तर की ओर मुख करके बैठ जाऐं. लगातार 21 दिन तक प्रत्येक दिन 7 बार इस मंत्र का उच्चारण करें. आप देखेंगे कि आपके मन में प्रसन्ता का भाव निरंतर बना रहेगा.
शरद मंत्र का प्रयोग संतान के कल्याण की कामना के लिए किया जाता है. लगातार 7 दिन तक दिन में तीन बार उच्चारण किया जाना चाहिए.
शनि से जुड़ी बाधा दूर करने के लिए शनि मंत्र का प्रयोग किया जाता है. इस मंत्र को शनिवार के दिन से शुरु कर 9 दिन तक 9 बार जाप करने से शनि की दशा शांत होती है. मंत्र इस प्रकार है- ऊं ऐं ह्रीं क्लीं शं शनैश्चराय नम:.
हर मनुष्य को सफलता अच्छी लगती है लेकिन प्राय: सभी को हर क्षेत्र में सफलता नहीं मिल पाती है. इसीलिए सफलता पाने का मंत्र का स्मरण करना हमारे लिए लाभकारी सिद्ध हो सकता है. इस मंत्र का जाप संध्या समय (शाम को 5-7 बजे के बीच) उत्तर की तरफ मुख करके किया जाना चाहिए. लगातार 7 दिन तक दिन में 3 बार इस मंत्र का जाप करें.
सच्चिदानंद मंत्र का प्रयोग उदासी को दूर करने के लिए किया जाता है. बिना किसी कारण उदासी आने से निजात पाने के लिए इस मंत्र का उच्चारण किया जाता है. प्रातःकाल उठकर, पूर्व दिशा की ओर मुख कर बैठ जाएं. लगातार सात दिन तक दिन में तीन बार इस मंत्र का जाप करें.