जापान में भूकंप-सुनामी और न्यूक्लियर रेडिएशन के चलते हर तरफ़ अफ़रा-तफ़री है. ऐसा लग रहा है कि जापान दूसरे विश्वयुद्ध के समय हुए परमाणु बम हमले से भी बड़े संकट में घिर गया है.
जापान में रेडिएशन का बढ़ता दायरा रूस और दूसरे पड़ोसी देशों तक फैल रहा है.
खाने-पीने की चीज़ों से लेकर दूसरी बुनियादी सुविधाओं का भी अकाल पड़ा हुआ है.
माना जा रहा है कि फुकुशिमा से निकलने वाला रेडिएशन ज्यादा से ज्यादा एक हजार किलोमीटर तक असर करेगा.
वैज्ञानिकों के मुताबिक फुकुशिमा में हुआ धमाका हिरोशिमा, नागासाकी में परमाणु बम विस्फोट से 1000 गुना ज्यादा ताकतवर है.
बर्फ़ की वजह से राहतकर्मियों को राहत और बचाव के काम में ख़ासी मुश्किल पेश आ रही है.
परमाणु वैज्ञानिकों के मुताबिक ठंडे मौसम में रेडिएशन फ़ैलने की रफ़्तार और बढ़ जाती है.
मुसीबतों का सामना करते जापान में मौसम बेहद ठंडा हो गया है. मौसम के बदले तेवर ने राहत अभियान के सामने चुनौतियां खड़ी कर दी हैं.
जापान में भूकंप-सुनामी और न्यूक्लियर रेडिएशन के चलते हर तरफ़ अफ़रा-तफ़री है.
जापान में बीते शुक्रवार को आए शक्तिशाली भूकंप और सुनामी में मरने वालों और लापता लोगों की संख्या 13,000 के पार चली गई है और यह आंकड़ा और बढ़ने की आशंका है.
पुलिस के मुताबिक मरने वालों की संख्या 5,178 हो गई है, जबकि 8,606 लोग लापता हैं. इस आपदा में कुल 2,285 लोग घायल हुए हैं.
अंतरराष्ट्रीय परमाणु उर्जा एजेंसी (आईएईए) ने जापान को दो साल पहले ही चेतावनी दी थी कि जोरदार भूकंप उसके परमाणु संयंत्रों के लिए खतरा पैदा कर सकता है.
मियागी में अशिनोमकी शहर के मेयर ने बुधवार रात को कहा कि अकेले उनके शहर में लापता लोगों की संख्या 10,000 को पार कर गई है.
ब्रिटेन के डेली टेलीग्राफ की रिपोर्ट मुताबिक विकीलीक्स वेबसाइट पर जारी दिसंबर 2008 के एक अमेरिकी राजनयिक के संदेश के अनुसार आईएईए के एक विशेषज्ञ ने इस बात पर चिंता जताई थी कि जापानी संयंत्रों का निर्माण सिर्फ सात की तीव्रता तक के भूकंप को सहन करने के हिसाब से किया गया है.
पुलिस के मुताबिक मरने वालों की संख्या 5,178 हो गई है, जबकि 8,606 लोग लापता हैं. इस आपदा में कुल 2,285 लोग घायल हुए हैं.
विकीलीक्स के मुताबिक जी 8 के ‘न्यूक्लियर सेफ्टी एंड सिक्युरिटी ग्रुप’ की तोक्यो में वर्ष 2008 में आयोजित बैठक में आईएईए अधिकारी ने कहा कि जापान के सुरक्षा संबधी दिशा निर्देश पुराने हो चुके हैं.
मौसम के बदले तेवर ने राहत अभियान के सामने चुनौतियां खड़ी कर दी हैं.
मार्च 2006 में भेजे गए एक संदेश के मुताबिक जापान सरकार ने एक संयंत्र को बंद करने के अदालत के आदेश का विरोध किया था. अदालत ने देश के पश्चिमी क्षेत्र में स्थित एक संयंत्र के भूकंप की मार झेल पाने की क्षमता में संदेह के मद्देनजर उसे बंद करने को कहा था.
भारत के लिए फिलहाल खतरे की कोई बात नहीं है. टोक्यो से नई दिल्ली की दूरी 5800 किलोमीटर से ज्यादा है.
सूनामी और भूकंप की वजह से जापान में लाखों लोग बेघर हो गए हैं और उन्हें राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी है.
बर्फ़ की वजह से राहतकर्मियों को राहत और बचाव के काम में ख़ासी मुश्किल पेश आ रही है.
रेडिएशन का दायरा रूस के व्लादिवोस्टोक शहर तक पहुंच गया है.
जापान में लोगों को घरों में ही रहने को कहा गया है और साथ ही उन्हें नल का पानी इस्तेमाल ना करने की सलाह दी गइ है.
माना जा रहा है कि फुकुशिमा से निकलने वाला रेडिएशन ज्यादा से ज्यादा एक हजार किलोमीटर तक असर करेगा.
दरअसल दुनिया के सामने इससे पहले इतना बड़ा परमाणु खतरा कभी आया ही नहीं है.
सरकारी प्रसारक एनएचके ने शनिवार को खबर दी थी कि मिनामिसानरिकू शहर में लापता लोगों की संख्या दस हजार के करीब है.
जापान के फुकुशिमा परमाणु संयंत्र के क्षतिग्रस्त हो जाने के बाद विकिरण का खतरा गहरा गया है.
अमेरिका ने 113 हेलीकॉप्टरों की भी तैनाती की है. पेंटागन ने कहा कि क्षतिग्रस्त परमाणु संयंत्र के मामले में वह जापान की मदद नहीं रहा है.
पेंटागन के प्रवक्ता कर्नल डेव लैपन ने संवाददाताओं को बताया कि भूकंप से प्रभावित लाखों लोगों की सहायता के लिए अमेरिकी सैनिकों और नौसेना ने राहत अभियान शुरू किया है.
अमेरिकी सेना ने भूकंप और सुनामी से तबाह हुए जापान में बड़े पैमाने पर राहत कार्य शुरू कर दिया है. इसके लिए वाशिंगटन ने अपने लगभग 17,000 सैनिकों और 15 युद्धपोतों की तैनाती की है.
जापान में भूकंप-सुनामी और न्यूक्लियर रेडिएशन के चलते हर तरफ़ अफ़रा-तफ़री है. ऐसा लग रहा है कि जापान दूसरे विश्वयुद्ध के समय हुए परमाणु बम हमले से भी बड़े संकट में घिर गया है.
कैनेडी ने कहा कि उनका देश परमाणु आपदा से निबटने की जापान की कोशिश का अनवरत समर्थन एवं सहायता कर रहा है.
जापान की राजधानी टोक्यो की स्थिति भी काफी दयनीय हो गई है. शाम 5 बजे के बाद से एसी चलाने पर रोक लगा दी गई है. पानी और बिजली के अलावे खाने पीने के चीजों पर भी इसका असर दिखने लगा है.
अमेरिका ने जापान के परमाणु संकट पर गहरी चिंता जताते हुए क्षतिग्रस्त फुकुशिमा परमाणु संयंत्र से होने वाले विकिरण के स्तर को अत्यंत खतरनाक बताया है और अपने नागरिकों से कहा है कि वह जापानी परमाणु संयंत्रों के 50 मील के आसपास के इलाकों में न रहें.
अमेरिकी विदेश उपमंत्री एवं प्रबंधन मामलों के प्रभारी पैट्रिक कैनेडी ने पत्रकारों से कहा, ‘फुकुशिमा दाइची में परमाणु रिएक्टर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं. वे अनेक खराबियों से गुजरे हैं और संयंत्र के निकटवर्ती इलाके के निवासियों के स्वास्थ्य को गंभीर खतरा और व्यापक क्षेत्र में संभावित खतरा है.
जापान में समेत दुनिया पर के लोग डरे हुए हैं और समझ नहीं पा रहे कि अब क्या होगा.
जापान में हुए हादसे को देखते हुए कई देशों ने अपने परमाणु कार्यक्रम की समीक्षा के आदेश दे दिए हैं.
जापान में 7 देशों ने अपने दूतावास बंद कर दिए हैं. करीब 5 हजार भारतीय जापान छोड़ चुके हैं.
खाने-पीने की चीज़ों से लेकर दूसरी बुनियादी सुविधाओं का भी अकाल पड़ा हुआ है.
जर्मनी, नीदरलैंड, ब्रिटेन, अमेरिका, फ्रांस समेत कई देशों ने अपने नागरिकों से स्वदेश वापस आने को कहा है.
सूनामी और भूकंप की वजह से जापान में लाखों लोग बेघर हो गए हैं और उन्हें राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी है.
जापान की राजधानी टोक्यो की स्थिति भी काफी दयनीय हो गई है. शाम 5 बजे के बाद से एसी चलाने पर रोक लगा दी गई है. पानी और बिजली के अलावे खाने पीने के चीजों पर भी इसका असर दिखने लगा है.
इस परमाणु संयंत्र के रिएक्टरों में बढ़ते तापमान को रोकने और ईंधन वाले भाग को क्षतिग्रस्त होने से बचाने के लिए सेना के हेलीकॉप्टर लगातार पानी बरसा रहे हैं.
जापान में भूकंप और सुनामी के बाद क्षतिग्रस्त हुए फुकुशिमा स्थित परमाणु संयंत्र से रेडियोधर्मिता को रोकने और किसी तरह की परमाणु आपदा को टालने की कोशिशें तेज कर दी गई हैं.
जापान का फुकुशीमा प्लांट नियंत्रण से बाहर हो चुका है. वहां कभी भी भयंकर हादसा हो सकता है.
फुकुशीमा प्लांट पर अगले कुछ समय में काबू नहीं पाया गया तो यह जापान के लिए काफी खतरनाक साबित हो सकता है.
खाने-पीने की चीज़ों से लेकर दूसरी बुनियादी सुविधाओं का भी अकाल पड़ा हुआ है.
जापान का फुकुशीमा प्लांट नियंत्रण से बाहर हो चुका है. वहां कभी भी भयंकर हादसा हो सकता है. जर्मनी, नीदरलैंड, ब्रिटेन, अमेरिका, फ्रांस समेत कई देशों ने अपने नागरिकों से स्वदेश वापस आने को कहा है.
जापान में रेडिएशन के घातक हमले से पड़ोसी मुल्कों में दहशत फ़ैल गई है.
जापान में रेडिएशन का बढ़ता दायरा रूस और दूसरे पड़ोसी देशों तक फैल रहा है.