मंसूर अली खान नवाब पटौदी के रूप में भारतीय क्रिकेट ने गुरुवार को एक जाबांज इंसान, प्रतिभाशाली खिलाड़ी और दूरदर्शी कप्तान खो दिया. 'टाइगर' नाम से मशहूर पटौदी ने सर गंगाराम अस्पताल में गुरुवार शाम को अंतिम सांस ली.
वह फेफड़े के गम्भीर संक्रमण से पीड़ित थे. वह 70 वर्ष के थे. पटौदी उन चंद खिलाड़ियों में से एक रहे हैं, जिन्होंने सबसे पहले क्रिकेट और बॉलीवुड के बीच सीधा रिश्ता कायम किया.
अपनी कलात्मक बल्लेबाजी से अधिक कप्तानी के कारण क्रिकेट जगत में अमिट छाप छोड़ने वाले मंसूर अली खां पटौदी ने भारतीय क्रिकेट में नेतृत्व कौशल की नयी मिसाल और नये आयाम जोड़े थे.
वह पटौदी ही थे जिन्होंने भारतीय खिलाड़ियों में यह आत्मविश्वास जगाया था कि वे भी जीत सकते हैं.
टौदी का जन्म भले ही पांच जनवरी 1941 को भोपाल के नवाब परिवार में हुआ था लेकिन उन्होंने हमेशा विषम परिस्थितियों का सामना किया. चाहे वह निजी जिंदगी हो या फिर क्रिकेट.
तब 11 साल के जूनियर पटौदी ने क्रिकेट खेलनी शुरू भी नहीं की थी कि ठीक उनके जन्मदिन पर उनके पिता और पूर्व भारतीय कप्तान इफ्तिखार अली खां पटौदी का निधन हो गया था.
इसके बाद जब पटौदी ने जब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में खेलना शुरू किया तो 1961 में कार दुर्घटना में उनकी एक आंख की रोशनी चली गयी. इसके बावजूद वह पटौदी का जज्बा और क्रिकेट कौशल ही था कि उन्होंने भारत की तरफ से न सिर्फ 46 टेस्ट मैच खेलकर 34.91 की औसत से 2793 रन बनाये बल्कि इनमें से 40 मैच में टीम की कप्तानी भी की.
वह भारत के पहले सफल कप्तान थे. उनकी कप्तानी में ही भारत ने विदेश में पहली जीत दर्ज की. भारत ने उनकी अगुवाई में नौ टेस्ट मैच जीते जबकि 19 में उसे हार मिली. लेकिन यह नहीं भूलना चाहिए कि पटौदी से पहले भारतीय टीम ने जो 79 मैच खेले थे उनमें से उसे केवल आठ में जीत मिली थी और 31 में हार.
यही नहीं इससे पहले भारत विदेशों में 33 में से कोई भी टेस्ट मैच नहीं जीत पाया था. टाइगर के नाम से मशहूर पटौदी की क्रिकेट की कहानी देहरादून के वेल्हम स्कूल से शुरू हुई थी लेकिन अभी उन्होंने क्रिकेट खेलना शुरू किया था कि उनके पिता का निधन हो गया.
इसके बाद जूनियर पटौदी को सभी भूल गये. इसके चार साल बाद ही अखबारों में उनका नाम छपा जब विनचेस्टर की तरफ से खेलते हुए उन्होंने अपनी बल्लेबाजी से सभी को प्रभावित किया.
अपने पिता के निधन के कुछ दिन ही बाद पटौदी इंग्लैंड आ गये थे. वह जिस जहाज में सफर कर रहे थे उसमें वीनू मांकड, फ्रैंक वारेल, एवर्टन वीक्स और सनी रामादीन जैसे दिग्गज क्रिकेटर भी थे.
वारेल का तब पता नहीं था कि वह जिस बच्चे से मिल रहे हैं दस साल बाद वही उनके साथ मैदान पर टास के लिये उतरेगा. नेतृत्वक्षमता उनकी रगों में बसी थी. विनचेस्टर के खिलाफ उनका कैरियर 1959 में चरम पर था जबकि वह कप्तान थे.
उन्होंने तब स्कूल क्रिकेट में डगलस जार्डिन का रिकार्ड तोड़ा था. पटौदी ने इसके बाद दिल्ली की तरफ से दो रणजी मैच खेले और दिसंबर 1961 में इंग्लैंड के खिलाफ फिरोजशाह कोटला मैदान पर पहला टेस्ट मैच खेलने का मौका मिला. यह मैच बारिश से प्रभावित रहा था.
इस मैच में तो वह अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं करा पाये लेकिन कोलकाता में अगले मैच में उन्होंने 64 रन बनाये. उनके करारे शाट से दर्शक तब झूमने लगे थे. भारत ने आखिर में यह मैच 187 रन से जीता था.
न्नई में फिर से उन्होंने 103 रन की पारी खेलकर खुद को मैच विजेता साबित किया था. इस पारी में उन्होंने 14 चौके और दो छक्के लगाये थे. वेस्टइंडीज दौरे में वह मांसपेशियों में खिंचाव की समस्या से जूझते रहे लेकिन तीसरे और चौथे टेस्ट मैच में उन्होंने 48 और 47 रन की दो जुझारू पारियां खेली थी.
इसके बाद 1964 में इंग्लैंड टीम के भारत दौरे के शुरू में वह अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाये लेकिन दिल्ली में उन्होंने नाबाद 203 रन की पारी खेलकर इसकी भरपायी कर दी जो उनका उच्चतम स्कोर भी है.
आस्ट्रेलियाई टीम जब तीन मैच के लिये भारतीय दौरे पर आयी तो पटौदी ने अपने पिता की तरह इस टीम के खिलाफ अपने पहले टेस्ट मैच में शतक जड़ने का अनोखा रिकार्ड बनाया. यह बेहद यादगार पारी थी.
उन्होंने जिस तरह से विवियर्स और मार्टिन जैसे गेंदबाजों के खिलाफ दबदबे से बल्लेबाजी की उसकी मिसाल आगे भी युवा क्रिकेटरों के सामने दी जाती रही. अगले टेस्ट मैच में उन्होंने 86 और 53 रन की दो जानदार पारियां खेली और भारत को नाटकीय जीत दिलायी.
उनके कैरियर का सबसे यादगार दौर 1968 में भारत का न्यूजीलैंड दौरा था. भारत ने तब पहली बार विदेशी सरजमीं पर टेस्ट मैच और टेस्ट श्रृंखला 3-1 जीती थी.
पटौदी उन चंद खिलाड़ियों में से एक रहे हैं, जिन्होंने सबसे पहले क्रिकेट और बॉलीवुड के बीच सीधा रिश्ता कायम किया.
अपने जमाने की मशहूर अभिनेत्री शर्मिला टैगोर के साथ विवाह करने वाले पटौदी ने अपने पिता नवाब पटौदी सीनियर के माध्यम से बचपन से लेकर जवानी तक क्रिकेट को जितना जिया, उससे कहीं अधिक उन्होंने अपनी अभिनेत्री पत्नी, अभिनेता पुत्र सैफ अली खान और पुत्री सोहा अली खान के माध्यम से बॉलीवुड को महसूस किया.
पटौदी मानते थे कि भारतीय स्पिनर किसी भी टीम को धराशायी कर सकते हैं और यही कारण है कि उन्होंने एक मैच में एक से अधिक स्पिनर को खिलाने की नीति को बढ़ावा दिया.
1971 में जब भारत सरकार ने संविधान में संशोधन के जरिए राजघरानों की शक्ति भंग कर दी तब तक पटौदी का सम्मान राजा की तरह होता था लेकिन इसके बाद पटौदी ने क्रिकेट के माध्यम से भारतीय जनमानस पर राज किया.
पूर्व कप्तान मंसूर अली खां पटौदी के निधन भारतीय क्रिकेट समुदाय ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए उन्हें ‘बहुत अच्छा इंसान’ और ‘चालाक कप्तान’ करार दिया जो देश की एक पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिये प्रेरणास्रोत बने.
पटौदी की पत्नी शर्मिला के साथ ‘चुपके चुपके’ और ‘विरूद्ध’ जैसी फिल्मों में काम करने वाले हिंदी फिल्म जगत के सुपरस्टार अमिताभ बच्चन ने माइक्रो ब्लागिंग वेबसाइट ट्विटर पर लिखा, ‘दुखद खबर. टाइगर पटौदी का निधन हो गया.’
गीतकार प्रसून जोशी ने कहा, ‘कुछ समय पहले मैं उनसे मिला था क्योंकि मैं शर्मिला जी के काफी नजदीक था. हमने उनके साथ कई बार बातचीत की थी. यह एक अपूर्णयीय क्षति है. मैं स्तब्ध हूं. भगवान उनकी रूह को शांति दे.’
पटौदी के साथी रहे बिशन सिंह बेदी ने उन्हें ‘भारतीय क्रिकेट का बेजोड़ चैंपियन’ करार दिया. उन्होंने कहा, ‘यह भारतीय क्रिकेट के लिये बहुत दुखद दिन है. वह भारतीय क्रिकेट के अग्रणी बेजोड़ चैंपियन थे. उनके निधन से यह अध्याय समाप्त हो गया। मैं बहुत दुखी हूं.’
वीवीएस लक्ष्मण का मानना है कि पटौदी की विरासत उनके निधन के बाद भी जारी रखेगी. लक्ष्मण ने कहा, ‘यह क्रिकेट जगत के लिये दुखभरी घड़ी है. यह मेरे लिये सदमा पहुंचाने वाली खबर है क्योंकि कुछ दिन पहले ही इंग्लैंड में मैं उनसे मिला था.
वर्तमान भारतीय बल्लेबाज राहुल द्रविड़ ने कहा कि पटौदी के शानदार कैरियर का खेल और भारतीय टीम पर गहरा प्रभाव पड़ा. द्रविड़ ने कहा, ‘ यह भारतीय क्रिकेट के लिये दुखद दिन है. वह हमारे लिये प्रेरणास्रोत रहे. मुझे कभी उन्हें खेलते हुए देखने का मौका नहीं मिला लेकिन मैंने हमेशा सुना है कि खेल में उनका कितना प्रभाव रहा. मुझे कई मसलों पर उनसे बातचीत का मौका मिला है.
पूर्व सलामी बल्लेबाज अरूण लाल ने कहा कि पटौदी ऐसे क्रिकेटर थे जो हमेशा अपन खिलाड़ियों विशेषकर युवाओं के लिये खड़े रहते थे. उन्होंने कहा, ‘‘वह काफी समझदार और परिपक्व व्यक्ति थे. वह इतने शानदार व्यक्ति और क्रिकेटर थे कि वह सभी खिलाड़ियांे की पंसद के प्रति संवेदनशील थे.
पूर्व बल्लेबाज मोहिंदर अमरनाथ ने कहा कि पटौदी का आक्रामक जज्बा साथी खिलाड़ियों के लिये प्रेरणा का स्रोत था. अमरनाथ ने कहा, ‘‘यह दुखद खबर है. वह शानदार व्यक्ति थे और देश के बेहतरीन राजदूत थे.
पूर्व भारतीय कप्तान दिलीप वेंगसरकर ने पटौदी को ‘अभिनव’ कप्तान करार दिया जिनकी अगुवाई में टीम ने जीत का स्वाद चखना शुरू किया था. उन्होंने कहा, ‘ यह दुखद खबर है. वह बेहतरीन खिलाड़ी, शानदार कप्तान और बेजोड़ क्षेत्ररक्षक थे. वह कभी हार नहीं मानने वाले खिलाड़ी और नये विचारों वाले कप्तान थे.
नवाब पटौदी के परिवार में उनकी पत्नी शर्मिला टैगोर, बेटा बालीवुड स्टार सैफ अली खान, बेटियां सबा अली खान और अभिनेत्री सोहा अली खान हैं.
पटौदी ने भारतीय क्रिकेट को उसकी सबसे बड़ी ताकत स्पिन कला पर आश्रित होने का आत्मविश्वास दिया. पटौदी मानते थे कि भारतीय स्पिनर किसी भी टीम को धराशायी कर सकते हैं और यही कारण है कि उन्होंने एक मैच में एक से अधिक स्पिनर को खिलाने की नीति को बढ़ावा दिया.
वह उनका ही कार्यकाल था, जब भारतीय टीम को यह यकीन हो चला था कि वह भी जीत हासिल कर सकती है. यह काफी कुछ सौरव गांगुली के कप्तानी के कार्यकाल जैसा था, जब भारतीय टीम ने देश और विदेश में सभी टीमों को हराया.
काउंटी क्लब ससेक्स और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय टीम की कप्तानी कर चुके पटौदी की एक आंख की रोशनी दुर्घटना में चली गई थी लेकिन नकली आंख के बावजूद पटौदी ने कभी भी किसी स्तर पर हथियार नहीं डाला और भारतीय क्रिकेट का विलक्षण, बुद्धिजीवी और दूरदर्शी चेहरा बने रहे. पटौदी की देखरेख में भारतीय टीम ने कुल नौ टेस्ट मैच जीते थे.
भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान नवाब मंसूर अली खान पटौदी के निधन पर लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज और जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने गहरा शोक व्यक्त किया है.
पूर्व कप्तान और चयनसमिति के वर्तमान अध्यक्ष के श्रीकांत ने कहा कि पटौदी ऐसे क्रिकेटर थे जिन्होंने भारतीय क्रिकेट में कलात्मकता और आक्रामकता जोड़ी थी. उन्होंने कहा, ‘ यह भारतीय क्रिकेट का बड़ा नुकसान है.
पूर्व सलामी बल्लेबाज गुंडप्पा विश्वनाथ ने पटौदी को अपने कैरियर के शुरुआती वर्षों का गाइड करार दिया और कहा कि वह ऐसे व्यक्ति थे जो हमेशा युवा खिलाड़ियों की मदद करते थे. उन्होंने कहा, ‘यह मेरे लिये दुखद खबर है. वह मुझे आगे लेकर आये और उन्होंने मेरा मागदर्शन किया. यह मेरे सबसे खराब दिनों में से एक है. मैं कुछ नहीं बोल सकता. वह बहुत अच्छे व्यक्ति, महान क्रिकेटर, शानदार क्षेत्ररक्षक और चालाक कप्तान थे. मैं वास्तव में बहुत दुखी हूं.’
कई पूर्व और वर्तमान खिलाड़ियों ने याद किया कि कैसे पटौदी ने विभिन्न तरह से उनके कैरियर को प्रभावित किया. उन्होंने कहा कि पटौदी का निधन अपूरणीय क्षति है.
पूर्व कप्तान मंसूर अली खां पटौदी के निधन भारतीय क्रिकेट समुदाय ने आज गहरा दुख व्यक्त करते हुए उन्हें ‘बहुत अच्छा इंसान’ और ‘चालाक कप्तान’ करार दिया जो देश की एक पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिये प्रेरणास्रोत बने.
भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और ‘टाइगर पटौदी’ के नाम से मशहूर नवाब मंसूर अली खान पटौदी के निधन पर बालीवुड की जानी मानी हस्तियों ने गहरा दुख जताया है.
ऑक्सफोर्ड जैसे प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान में पढ़े पटौदी में शालीन कुल के सभी गुण थे. वह 1971 तक हरियाणा के करीब स्थित पटौदी के नवाब थे.
पटौदी ने 46 टेस्ट मैचों में 34.91 के औसत से 2793 रन बनाए, जिनमें छह शतक शामिल हैं. 203 रन, जो 1964 में दिल्ली में इंग्लैंड के खिलाफ बनाए थे, उनका श्रेष्ठ स्कोर बना रहा.
बतौर बल्लेबाज पटौदी ने बहुत बड़ी उपलब्धि तो हासिल नहीं की लेकिन एक कप्तान के तौर पर उन्होंने जिस स्तर का प्रेरणादायी काम किया, उसे देखते हुए उनके आंकड़े और भी प्रभावशाली दिखते हैं.