संसद के शीतकालीन सत्र में विभिन्न मुद्दों को लेकर गतिरोध बना हुआ है और मंगलवार से शुरू हुए इस सत्र में एक भी दिन कामकाज नहीं हो सका है. संसद के भीतर सांसदों के हंगामे से सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ रही है. वहीं संसद के बाहर भी विरोध के अलग-अलग रंग देखने को मिल रहे हैं और इस प्रदर्शन में टीडीपी सबसे आगे हैं.
बजट सत्र से मौजूदा सत्र तक टीडीपी आंध्र प्रदेश के लिए विशेष राज्य का दर्जा और
आर्थिक सहायता की मांग पर अड़ी हुई है. यहां तक कि मांग न पूरी होने पर
टीडीपी एनडीए सरकार से नाता भी तोड़ चुकी है और तेलंगाना में उसने बीजेपी
के खिलाफ विधानसभा चुनाव लड़ा था. टीडीपी के प्रदर्शन में सबसे ज्यादा
चर्चा पार्टी के सांसद एन शिवप्रसाद की रहती है जो अलग-अलग रूपों में नजर आते
हैं.
शिवप्रसाद शुक्रवार को दिवंगत डीएमके नेता और तमिलानाडु के पूर्व मुख्यमंत्री करुणानिधि जैसा वेश धारण कर संसद पहुंचे. उन्होंने अपनी पार्टी के सांसदों के साथ गांधी प्रतिमा के करीब प्रदर्शन में हिस्सा लिया. इससे पहले भी वह बजट सत्र और मॉनसून सत्र में कई रूप धारण कर चुके हैं.
अपने कपड़ों और अंदाज की वजह से टीडीपी सांसद ने खूब सुर्खियां बटोरी हैं. वह कभी मछुआरा तो कभी स्कूली छात्र बनकर संसद पहुंच जाते हैं. मीडिया के कैमरे शिवप्रसाद को खोज लेते हैं और उनकी तस्वीर लेने की होड़ मच जाती है.
संसद परिसर में टीएमसी सांसदों ने भी प्रदर्शन में हिस्सा लिया. आज सदन में राफेल को लेकर काफी हंगामा हुआ और कांग्रेस समेत कई दलों की मांग है कि राफेल डील की जांच के लिए जेपीसी का गठन किया जाए. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने डील की जांच के लिए दायर याचिकाओं को खारिज करते हुए मोदी सरकार को क्लीन चिट दे दी है.
कांग्रेस सांसद सुनील जाखड़ भी इस सत्र में राफेल का मुद्दा जोर-शोर से उठा रहे हैं. जाखड़ गुरुवार को फ्रांस की तर्ज पर संसद में 'येलो वेस्ट' प्रदर्शन करने आए थे. वह अपने साथ राफेल डील पर विरोध के लिए कागज का एक हवाई जहाज बनाकर भी लाए.
उधर, कावेरी नदी पर बन रहे नए बांध के खिलाफ AIADMK सांसदों का प्रदर्शन भी जारी है. पार्टी सांसद इस बांध के खिलाफ अड़े हुए हैं और सदन के भीतर भी वेल में आकर नारेबाजी करते रहते हैं.
संसद का शीतकालीन सत्र इन प्रदर्शनों की वजह से हंगामेदार रहने वाला है. मोदी सरकार का आखिरी पूर्ण सत्र होने के नाते इस बार काफी कामकाज लंबित है, लेकिन सदन न चलने पर विधायी काम पूरा होने की उम्मीद कम ही नजर आ रही है.