देश के आठ राज्यों में हिंदुओं को अल्पसंख्यक का दर्जा देने की तैयारी कर रही है. अगर ऐसा होता है तो जम्मू-कश्मीर में मुसलमान और पंजाब में सिखों से अल्पसंख्यक होने का दर्जा छिन सकता है.
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने इस संबंध में एक विशेष कमेटी भी गठित की है. यह कमेटी इस मुद्दे पर विचार के लिए 14 जून को एक बैठक करेगी. बैठक में इस मसले पर फैसला लिए जाने की संभावना है.
बताया जा रहा है कि बैठक के बाद अल्पसंख्यक आयोग केंद्र को सिफारिश भेजेगा. राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के सामने नवंबर 2017 में सुप्रीम कोर्ट के वकील अश्वनी उपाध्याय ने एक अर्जी दायर कर इस मुद्दे को उठाया था.
आयोग से उपाध्याय ने कहा था कि जनसंख्या के 2011 के आंकड़ों के अनुसार आठ राज्यों में हिंदू आबादी अल्पसंख्यक है. लेकिन यहां अल्पसंख्यक होने का लाभ उन्हें मिल रहा है जो अल्पसंख्यक है ही नहीं.
इसके पीछे उन्होंने सबसे बड़ी वजह यह बताई कि भारत सरकार ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम की धारा 2 सी के तहत हिंदुओं को अल्पसंख्यक का दर्जा नहीं दिया है.
केंद्र सरकार हर साल राज्य सरकारों को अल्पसंख्यकों की मदद के लिए करोड़ों रुपए की आर्थिक मदद देती है. मगर इसका लाभ देश के उन आठ राज्यों में नहीं मिल पा रहा है जहां वे सही मायनों में अल्पसंख्यक हैं.
फिलहाल देश के 8 राज्य जहां हिंदू अल्पसंख्यक हैं. इनमें शामिल हैं जम्मू-कश्मीर यहां 28.44 प्रतिशत आबादी अल्पसंख्यक है. जबकि पंजाब में 38.40 प्रतिशत, लक्षद्वीप में 2.5 प्रतिशत, मिजोरम में 2.75 प्रतिशत, नगालैंड 8.75 प्रतिशत, मेघालय 11.53 प्रतिशत, अरुणाचल प्रदेश में 29 और मणिपुर में 31.39 प्रतिशत हिंदू अल्पसंख्यक हैं.