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भारत

देखें: कैसे बीता था एपीजे कलाम का अंतिम दिन, क्या था उनका आखिरी संदेश!

देखें: कैसे बीता था एपीजे कलाम का अंतिम दिन, क्या था उनका आखिरी संदेश!
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देश के पूर्व राष्ट्रपति, मिसाइल मैन के नाम से मशहूर एपीजे अब्दुल कलाम की आज पुण्यतिथि है. उनका निधन 27 जुलाई 2015 को मेघालय के शिलांग में हुआ था. कलाम अपने आखिरी दिन में अपनी आखिरी इच्छा पूरी करते हुए इस दुनिया से गए थे. जानें कैसे बीता पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम का आखिरी दिन.
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एपीजे अब्दुल कलाम को अंतिम समय में सहारा देने वाले सृजनपाल सिंह के मुताबिक 27 जुलाई को ‘दोपहर तीन बजे कलाम दिल्ली से गुवाहाटी पहुंचे. वहां से कार से शिलांग के लिए निकले. ढाई घंटे के अंदर वो शिलांग पहुंच गए थे.
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कार में सोने की थी आदत
कलाम को अक्सर कार में सोने की आदत थी. वो कार में बैठते ही सो जाया करते थे, लेकिन अपने आखिर दिन वो बातें करते रहे और सोये नहीं.

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लेक्चर देते हुए आया अटैक
आईआईएम पहुंचकर कलाम लेक्चर देने के लिए स्टेज पर गए. वे वहां दो शब्द ही बोले कि गिर पड़े. उन्हें अटैक आ गया. इसके बाद उनके सहयोगी सृजनपाल सिंह ने उन्हें उठाया. उन्हें हॉस्पिटल ले गए. पर हॉस्पिटल पहुंचते ही उनका निधन हो गया.

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युवा सशक्तीकरण के बारे में करते थे बात
कलाम हमेशा से चाहते थे कि ग्रामीण भारत विकसित हो. वो हमेशा युवा सशक्तीकरण के बारे में बात करते रहते थे.
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उनके जीवन का एकमात्र अफसोस
उनके सहयोगी सृजनपाल सिंह ने अपनी पोस्ट में लिखा कि मुझे ऐसा लगता है कि उन्हें जीवन में एकमात्र अफसोस इस बात का रहा कि वह अपने माता-पिता को उनके जीवनकाल के दौरान 24 घंटे बिजली जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं करा पाए.
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सभी को हमेशा खुश देखना चाहते थे कलाम
कलाम हमेशा देशवासियों के चेहरे पर मुस्कुराहट देखना चाहते थे. वो हमेशा से ही सभी को खुश देखना चाहते थे. वो कभी भी किसी को दुखी नहीं देखना चाहते थे.

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IIM स्टूडेंट को देना था असाइनमेंट
डॉक्टर कलाम ने आईआईएम शिलांग के छात्रों को एक ‘सरप्राइज असाइनमेंट’ देने की योजना बनाई थी. इस असाइनमेंट में उन्होंने आईआईएम के छात्रों से ऐसे नए तरीके खोजने के लिए कहना था, जिनसे संसद में गतिरोध खत्म किया जा सके. पर अटैक आने की वजह से वे ऐसा नहीं कर सके. दिल्ली से शिलांग जाते समय वे संसद में होने वाले गतिरोधों के बारे में चर्चा कर रहे थे.

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आखिरी इच्छा पूरी करते हुए हुई मौत
एपीजे अब्दुल कलाम हमेशा से ही एक ही बात कहते थे कि मैं टीचर के रूप में ही याद किया जाना चाहता हूं. और अपने अंतिम समय में उनके साथ ऐसा ही हुआ. उनका निधन छात्रों को लेक्चर देते हुए ही हुआ.
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उनकी आखिरी लाइन
कलाम ने आखिरी लाइन जो कही थी वह ये थी कि धरती को जीने लायक कैसे बनाया जाए. उनका ये सवाल था कि इस दुनिया को जीने लायक कैसे बनाया जाए.
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