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भारत

चंद्रयान-2 लॉन्च, जानें-सोने की परत में क्यों लपेटे जाते हैं सैटेलाइट

चंद्रयान-2 लॉन्च, जानें-सोने की परत में क्यों लपेटे जाते हैं सैटेलाइट
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आज 22 जुलाई को चंद्रयान मिशन लॉन्च कर दिया गया. अब इसे चांद तक पहुंचने में 48 दिनों का वक्त लगेगा. चंद्रयान के एक हिस्से में सोने की चमक तमाम लोगों के मन में सवाल पैदा कर रही है. आखिर यान पर सोना क्यों मढ़ा गया या सोने जैसी ये कोई और धातु है. इसके इस्तेमाल की कोई वैज्ञानिक वजह है या कुछ और, यहां जानिए अंतरिक्ष में भेजी जाने वाली सैटेलाइट पर क्यों किया जाता है सोने का वर्क...
चंद्रयान-2 लॉन्च, जानें-सोने की परत में क्यों लपेटे जाते हैं सैटेलाइट
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अंतरिक्ष की खोज में भेजे जाने वाले सैटेलाइट को बनाने में सोने का एक खास रोल होता है. ये मूल्यवान औद्योगिक धातु सोना किसी सैटेलाइट का अमूल्य हिस्सा होती है. इसे गोल्ड प्लेटिंग कहा जाता है. विज्ञान ने ये सिद्ध किया है कि सोना सैटेलाइट की परिवर्तनशीलता, चालकता (कंडक्टिविटी) और जंग के प्रतिरोध को रोकता है. 
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साथ ही ये भी बता दें कि सोना ही नहीं अन्य कीमती धातुएं भी एयरोस्पेस उद्योग में एक मूल्यवान कंपोनेंट हैं. इन धातुओं की थर्मल कंट्रोल प्रॉपर्टी सैटेलाइट में अंतरिक्ष की हानिकारक इनफ्रारेड रेडिएशन को रोकने में मदद करती है. ये रेडिएशन इतना खतरनाक होता है कि वो अंतरिक्ष में सैटेलाइट को बहुत जल्द नष्ट करने की क्षमता रखता है.
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अपोलो लूनर मॉड्यूल में भी नासा ने सैटेलाइट बनाने में सोने का इस्तेमाल किया था. नासा के इंजीनियरों के अनुसार, गोल्ड प्लेट की एक पतली परत ( गोल्ड प्लेटिंग) का उपयोग एक थर्मल ब्लैंकेट की शीर्ष परत के रूप में किया गया था जो मॉड्यूल के निचले हिस्से को कवर कर रहा था. ये ब्लैंकेट अविश्वसनीय रूप से 25 परतों में जटिलता से तैयार किया गया. इन परतों में कांच, ऊन, केप्टन, मायलर और एल्यूमीनियम जैसी धातु भी शामिल की गई. ये गोल्ड दरअसल अलग ही नाम से जाना जाता है.
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ये होता है लेजर गोल्ड

दशकों से टेक्नोलॉजी की प्रगति ने अंतरिक्ष का पता लगाने में सोने की उपयोगिता का बेहतर इस्तेमाल किया है. इसमें से सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण लेजर गोल्ड का निर्माण था इसे नासा ने बड़े पैमाने पर गोल्ड प्लेटिंग के लिए इस्तेमाल किया है.
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लेजर गोल्ड को सबसे पहले जेरॉक्स के लिए बड़े पैमाने पर विकसित किया गया था. इसे बनाने वाली कंपनी को अपनी कॉपी मशीनों के लिए टिकाऊ सोने के वर्क की जरूरत थी. नासा ने तब इसकी तकनीक के बारे में जाना.
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मीडिया रिपोर्टस के अनुसार लेजर गोल्ड तैयार करने वाली कंपनी का कहना है कि उनकी कंपनी लगभग 40 वर्षों से नासा के साथ काम कर रही है. नासा ने अब तक लगभग 50 अलग-अलग उपकरणों को सोने से मढ़वाया है जिन्हें अंतरिक्ष में भेजा गया है.
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