सत्ता का खेल भी बड़ा निराला है. जिसके पास होता है, उसके रंग-ढंग बदल देता है. काले धन पर कभी विपक्ष रहा बीजेपी आज सत्ता की गोद में बैठी है और उसके रंग-ढंग बिल्कुल कांग्रेस जैसी हो गई है, जो इसके पहले सत्ता में थी.
अगर आपको याद हो तो 2011 में बीजेपी काला धन वापस लाओ कहते-कहते नहीं थकती थी. आज हालात बदल चुके हैं और अब कांग्रेस काला धन वापस लाओ के नारे लगाती है.
2011 में बीजेपी काला धन के वापस लाने के मुद्दे पर कांग्रेस पर दबाव बनाती थी. 2014 में यही काम कांग्रेस कर रही है.
किसी दूसरे देश के साथ की गई संधि का रोना 2011 में कांग्रेस रोती थी, अब बीजेपी रो रही है.
सरकार जनता को बेवकूफ बना रही है. यह एक जुमला है - विपक्षी पार्टी का. वक्त और हालात बदल जाते हैं, जुमला बना रहता है.
शब्दों के साथ खेलना सरकार का काम होता है. तब कांग्रेस तो अब बीजेपी - यही तो करती आ रही हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने तब कांग्रेस सरकार को डांट लगाई थी. डांट का असर हुआ, ऐसा दिखा तो नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने अब बीजेपी सरकार को डांट लगाई है. डांट का असर होगा या नहीं, वक्त ही बताएगा.