अनिरुद्धाचार्य ने आजतक से बातचीत में तमाम विवादों पर सफाई दी. उन्होंने तर्क दिया कि समाज को सुधारने के लिए कड़वे शब्दों का प्रयोग आवश्यक है, जैसे कड़वी दवा बीमारी को ठीक करती है. उन्होंने पश्चिमी संस्कृति में अर्धनग्नता की आलोचना की और भारतीय संस्कृति की मर्यादा पर जोर दिया. बॉलीवुड पर टिप्पणी करते हुए, उन्होंने निर्वस्त्र फोटोशूट और शराब को बढ़ावा देने वाले दृश्यों का विरोध किया, ऐसी फिल्मों पर प्रतिबंध लगाने की वकालत की जो अश्लीलता परोसती हैं.