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Corona से अनाथ बच्चों की देश में तादाद कितनी? देखें मदद करने में कैसे फिसड्डी साबित हुईं सरकारें

Corona से अनाथ बच्चों की देश में तादाद कितनी? देखें मदद करने में कैसे फिसड्डी साबित हुईं सरकारें

जिस संविधान की शपथ खाकर सरकारें बनती हैं, वो संविधान कहता है कि जनता ही संप्रभु है. यानी जनता ही सुप्रीम अथॉरिटी है. उसी संविधान की प्रस्तावना में लिखा है हम भारत के लोग सभी नागरिकों को आर्थिक, सामाजिक न्याय दिलाएंगे. लेकिन उसी जनता के बीच जब कोरोना काल में बच्चे अनाथ हुए तो उनका सही आंकड़ा भी सरकारें नहीं दे पा रहीं. सुप्रीम कोर्ट को कहना पड़ा, सरकारें योजनाओं पर अमल करने में फिसड्डी हैं. देश में कोरोना ने जिन बच्चों के सिर से माता-पिता या घर का जिम्मा उठाने वाले सदस्य का साया छीन लिया और बच्चों के भविष्य पर संकट आया. सरकारें देश में किसी भी राज्य की हों वो कोरोना की त्रासदी में बेघर-अनाथ हुए बच्चों को लेकर ऐलान बड़े कर रही हैं, लेकिन जमीन पर बच्चों के लिए योजनाएं पहुंचती नहीं दिखतीं. सरकारें बच्चों के अधिकार तक कैसे छीन रही हैं, इसका सच सुप्रीम कोर्ट में पता चला है. देखिए.

The Supreme Court observed on Tuesday that the Centre's welfare schemes should cover all the children who were orphaned after the coronavirus disease (Covid-19) pandemic struck, and not limit its benefit to those kids who lost their parents to the infection. The reason why SC has to say this is because the children who became orphans during the Corona period, governments are not able to even give their correct figures. Watch this report.

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