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इमरजेंसी के 50 साल पूरे, आपातकाल का काला अध्याय या सियासी दांव?

इमरजेंसी के 50 साल पूरे, आपातकाल का काला अध्याय या सियासी दांव?

देश में 1975 के आपातकाल को लेकर बहस जारी है. एक पक्ष इसे 'संविधान की खुलेआम हत्या' बताता है, जबकि दूसरा पक्ष इसे लोकतंत्र की रक्षा का कदम कहता है. इस दौरान प्रेस की आजादी पर रोक लगी, मीसा कानून के तहत गिरफ्तारियां हुईं और मौलिक अधिकारों को निलंबित कर दिया गया था.

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