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सरकार को सस्ती, प्राइवेट मार्केट को महंगी कोवैक्सिन क्यों? भारत बायोटेक ने बताई इसके पीछे की वजह

वैक्सीन निर्माता कंपनी भारत बायोटेक ने कोवैक्सिन की कीमतों पर सफाई दी है. कंपनी ने कहा है कि 150 रुपये प्रति डोज पर भारत सरकार को सप्लाई होने वाली कीमत गैर-प्रतिस्पर्धी है और साफ तौर पर लंबे समय के लिए टिकाऊ नहीं है.

सांकेतिक तस्वीर सांकेतिक तस्वीर
स्टोरी हाइलाइट्स
  • कोवैक्सिन की कीमतों पर भारत बायोटेक की सफाई
  • '150 रुपये प्रति डोज की कीमत गैर-प्रतिस्पर्धी'
  • 500 करोड़ से अधिक का निवेश कियाः भारत बायोटेक

देश में कोरोना वायरस महामारी के खिलाफ कई महीनों से वैक्सीनेशन अभियान चल रहा है. इस बीच, वैक्सीन निर्माता कंपनी भारत बायोटेक ने कोवैक्सिन की कीमतों पर सफाई दी है. कंपनी ने कहा है कि 150 रुपये प्रति डोज पर भारत सरकार को सप्लाई होने वाली कीमत गैर-प्रतिस्पर्धी है और साफ तौर पर लंबे समय के लिए टिकाऊ नहीं है. इस वजह से प्राइवेट मार्केट से ज्यादा कीमत ली जा रही है. मालूम हो कि पहले विपक्ष वैक्सीन की अलग-अलग कीमतें होने को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोलता रहा है. 

भारत बायोटेक ने कहा, ''कंपनी ने प्रोडक्ट डेवलपमेंट, क्लिनिकल ट्रायल्स और मैन्युफैक्चरिंग सुविधाओं के निर्माण के लिए अपने स्वयं के संसाधनों से 500 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है.'' इस वजह से भारत बायोटेक केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और प्राइवेट अस्पतालों के लिए कोवैक्सिन के दामों के बारे में निम्न मैसेज प्रसारित कर रहा है. हमारा मानना है कि मीडिया और जनता के लिए फैक्ट्स को रिकॉर्ड पर रखना जरूरी है, ताकि वे इसे समझ सकें और हमारी कोशिशों की सराहना कर सकें.

कई फैक्टर्स पर टीके के दाम निर्भर
कंपनी का कहना है कि सबसे पहले, किसी भी शख्स को यह याद रखना चाहिए कि टीकों और अन्य फार्मास्युटिकल प्रोडक्ट्स का मूल्य निर्धारण कई फैक्टर्स पर निर्भर करता है जैसे- माल और कच्चे माल की लागत, प्रोडक्ट फेल्योर, प्रोडक्ट डेवलपमेंट में जोखिम, उत्पाद अधिकता, पर्याप्त सुविधाओं को बनाने के लिए लगने वाली पूंजी, बिक्री और वितरण का खर्च आदि.

वैक्सीन की विशेषता
कंपनी ने वैक्सीन की विशेषताओं के बारे में बताते हुए कहा कि होल-वायरियन इनएक्टिवेटेड वेरो सेल वैक्सीन बनाने के लिए काफी जटिल होते हैं, क्योंकि यह जीवित वायरस पर आधारित होते हैं. इसे कई स्तर की रोकथाम और प्यूरीफिकेशन मेथड्स की जरूरत होती है. प्यूरीफिकेशन के इस तरह के अधिक मानकों से महत्वपूर्ण प्रक्रिया में नुकसान होता है.

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कंपनी ने आगे कहा, ''आज की तारीख तक 4 करोड़ कोवैक्सिन की डोजेस की सप्लाई से एक्सीलेंसी के बारे में स्पष्ट है. अभी तक भारत बायोटेक ने कोवैक्सिन से किसी भी प्रतिकूल घटना के लिए भारत सरकार से कोई क्षतिपूर्ति नहीं मांगी है.''

प्राइवेट सेक्टर के लिए महंगी क्यों ? 
कोरोना की अन्य वैक्सीन की ही तरह भारत बायोटेक की कोवैक्सिन की कीमत भी केंद्र सरकार और प्राइवेट सेक्टर के लिए अलग-अलग रही है. कंपनी ने इसके पीछे की वजह बताते हुए कहा, ''यह विशुद्ध रूप से बिजनेस कारणों से है, जिसमें- कम मात्रा में खरीद, वितरण में ज्यादा लागत लगना और खुदरा मार्जिन आदि शामिल हैं.''

कंपनी ने यह भी कहा है कि सभी मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट के हर बैच को 200 से अधिक क्वालिटी कंट्रोल टेस्ट से गुजरना पड़ता है. इसके बाद ही उसे भेजा जाता है. वास्तव में यही जटिलता है, जिसने अन्य कंपनियों को कोरोना का टीका बनाने की प्रक्रिया से अब तक दूर रखा है, विशेष रूप से विरियन निष्क्रिय टीके.

10% टीका प्राइवेट अस्पतालों को हुआ सप्लाई
भारत बायोटेक का कहना है कि भारत सरकार के निर्देशानुसार, अब तक कोवैक्सिन के हमारे कुल उत्पादन का 10% से भी कम की आपूर्ति निजी अस्पतालों को की गई है, जबकि बाकी मात्रा की सप्लाई राज्य और केंद्र सरकारों को की गई. कोवैक्सिन का औसत मूल्य अभी तक 250 रुपये प्रति खुराक से कम रहा है. आगे जाकर, प्रोडक्शन का 75 फीसदी टीका केंद्र और राज्यों को और सिर्फ 25 फीसदी टीका ही प्राइवेट अस्पतालों को दिया जाएगा.

कंपनी का कहना है कि भारत सरकार को 150 रुपये प्रति डोज पर कोवैक्सिन की सप्लाई करना एक गैर-प्रतिस्पर्धी कीमत है और स्पष्ट रूप से लंबे समय के लिए टिकाऊ नहीं है. इसलिए प्राइवेट मार्केट के लिए अधिक कीमत लेने की जरूरत होती है.

 

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