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कोरोना: विदेशी मेडिकल मदद पर क्यों हो रहा है विवाद, क्या हैं राज्य सरकारों के दावे?

राज्यों के आरोपों के बीच केंद्र सरकार की तरफ से दावा किया गया है कि 24 अलग-अलग कैटेगरी के मेडिकल इक्विपमेंट जिनकी संख्या करीब 40 लाख है, की डिलीवरी या तो हो चुकी है या होने वाली है. बताया गया है कि 31 राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों के 86 अस्पतालों को ये सामान पहुंचाया गया है.

विदेश से आई मेडिकल मदद के वितरण पर हो रहा है विवाद (फोटो-PTI) विदेश से आई मेडिकल मदद के वितरण पर हो रहा है विवाद (फोटो-PTI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • कोरोना संकट के बीच विदेश से मिली है भारत को मदद
  • देश में सामग्री वितरण को लेकर राज्य बनाम केंद्र का विवाद

देश में जारी कोरोना क्राइसिस के बीच विदेशों से मदद का सहारा मिल रहा है. कई देशों से ऑक्सीजन समेत तमाम अन्य मेडिकल इक्विपमेंट भारत पहुंचे हैं. मुसीबत और जरूरत के समय ये मदद काफी राहत देने वाली है, लेकिन इसे लेकर भी विवाद गहरा गया है. ये आवाजें उठ रही हैं कि जो सहायता बाहरी मुल्कों से मिली है, उसे राज्यों तक नहीं पहुंचाया जा रहा है या इसमें देरी हो रही है.

इन तमाम आरोपों के बीच केंद्र सरकार की तरफ से दावा किया गया है कि 24 अलग-अलग कैटेगरी के मेडिकल इक्विपमेंट जिनकी संख्या करीब 40 लाख है, की डिलीवरी या तो हो चुकी है या होने वाली है. बताया गया है कि 31 राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों के 86 अस्पतालों को ये सामान पहुंचाया गया है. सरकार की तरफ से बताया गया है कि एम्स समेत दिल्ली-एनसीआर के 38 अस्पतालों को ये मदद पहुंच चुकी है. 

इंडिया टुडे को सूत्रों से जानकारी मिली है कि 1656 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर्स, 20 बड़े साइज के ऑक्सीजन कंसंट्रेटर्स, 965 वेंटीलेटर्स, 355 ऑड लार्ज ऑक्सीजन सिलेंडर समेत BiPAP मशीनें, PSA, रेमडेसिविर और पीपीई किट्स जैसे सामान पहले ही डिलीवर किए जा चुके हैं. 

राज्यों ने मदद मिलने पर क्या कहा?

यूपी: मेडिकल सहायता डिलीवर करने के केंद्र सरकार के इस दावे पर इंडिया टुडे ने कुछ राज्यों से बात करने की कोशिश की. यूपी सरकार के एक टॉप अधिकारी ने बताया कि उन्हें 1500 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर्स मिले हैं, इनमें वो भी शामिल हैं जो मदद के तौर पर मिले हैं और 5 साइरोजनिक ऑक्सीजन टैंकर्स (गवर्नमेंट टू गवर्नमेंट सहायत) भी  हैं. 

गुजरात: राज्य के स्वास्थ्य मंत्री नितिन पटेल ने ऑफिस ने इस बात की पुष्टि की है कि ऑक्सीजन कंसंट्रेटर्स और वेंटीलेटर्स समेत अन्य मेडिकल सामग्री पिछले तीन दिन से दिल्ली से हवाई रास्ते होते हुए अहमदाबाद पहुंच रही हैं. राज्य सरकार ने इन सामग्रियों को तुरंत अस्पतालों तक भिजवाने के लिए नोडल ऑफिसर भी तय कर दिए हैं. 

मध्य प्रदेश: सरकार के सूत्रों ने बताया है कि राज्य सरकार मेडिकल सहायता प्राप्त कर रही है जिसमें गवर्नमेंट टू गवर्नमेंट सहायता वाला सामान भी है और केंद्र सरकार को मिली निजी सहायता वाली सामग्री भी. 

कर्नाटक: राज्य सरकार में डिप्टी मुख्यमंत्री का रोल निभा रहे अश्वथ नारायण ने इंडिया टुडे से बताया है कि हमें मदद पहुंच रही है और हम इसे रिसीव भी कर रहे हैं, ये एक मानवता का कार्य है जो हो रहा है. 

बिहार: पटना में एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि क्रायोजेनिक ऑक्सीजन के चार टैंकरों में बिहार को केंद्र सरकार से तीन मिल चुके हैं.

ऑक्सीजन टैंकर्स की सप्लाई को लेकर हो रहा विवाद (PTI)

बीजेपी शासित प्रदेशों ने दावा किया है कि उन्हें केंद्र सरकार से मदद मिल रही है. लेकिन जब राजस्थान, पंजाब और झारखंड जैसे कांग्रेस शासित या गैर-बीजेपी शासित राज्यों से बात की गई तो हालात अलग थे. 

राजस्थान: राज्य सरकार के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि उन्हें न कोई मेडिकल सामग्री मिली है और न ही अब तक केंद्र सरकार से आवंटन के बारे में कोई जानकारी मिली है. 

झारखंड: यहां के स्वास्थ्य सचिव अरुण सिंह ने इंडिया टुडे से बातचीत में बताया कि ''केंद्र को रेमडेसिविर इंजेक्शन के 1.25 लाख वायल मिले हैं. झारखंड को 2181 वायल्स ही दिए गये हैं. इसके अलावा कोई मदद झारखंड को नहीं दी गई है.''

महाराष्ट्र: राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने बताया है कि ''उन्हें कस्टम से डिस्पैच के बारे में कॉल आया है लेकिन विभाग सामान और उसकी सप्लाई मात्रा के बारे में आश्वस्त नहीं है. 

केरल: इन राज्यों के अलाव केरल ने भी मदद मिलने से इनकार किया है. केरल सरकार के सूत्रों ने बताया है कि 'हमने किसी चीज के लिए नहीं पूछा गया है और न ही मेडिकल सामग्री और भेजी गई मदद की उन्हें कोई जानकारी है. तिरुवनंतपुरम के डीएमओ ने बताया कि एंटीजन और पीपीई किट्स इस हफ्ते के अंत हमें मिल जाएंगी, लेकिन ये पता नहीं है कि ये विदेशी सहायता का हिस्सा है या नहीं. 

तेलंगाना: केरल की तरह ही तेलंगाना की रेड क्रॉस सोसाइटी ने इंडिया टुडे टीवी से बताया है कि 100 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर्स, 1 लाख हेल्थ केयर किट्स और 10 हजार पीपीई किट्स केंद्र से इस हफ्ते के आखिर तक आने की उम्मीद है. 

यानी कई राज्य सरकारें साफ तौर पर कह रही हैं कि उन्हें मेडिकल सहायता नहीं मिल रही है या अगर कुछ मदद आने वाली भी है तो ये स्पष्ट नहीं है कि ये मदद विदेशी सहायता वाली है या केंद्र अपनी तरफ से कर रहा है. 

राज्यों की आपत्तियों और दावों पर इंडिया टुडे को एक सीनियर अधिकारी ने बताया, ''स्वास्थ्य मंत्रालय राज्यों की एजेंसीज के साथ संपर्क में हैं. ट्रांसपोर्ट में समय लगता है.'' वहीं केंद्र सरकार में एक मंत्री ने ऑफ द रिकॉर्ड बताया कि '' सरकार को यह चिन्हित करना होगा कि किसे सबसे ज्यादा मदद की जरूरत है. प्राथमिकता वालों को देकर फिर आगे बढ़ना चाहिए. ये विवाद मदद देने वालों के बीच गलत संदेश पहुंचा रहा है.''


 

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