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असम, नागालैंड, मणिपुर में AFSPA का दायरा घटा, जानें क्या है ये कानून और सेना को कैसे मिलते हैं स्पेशल पावर?

पूर्वोत्तर के तीन राज्यों में केंद्र सरकार ने सेना को स्पेशल पावर देने वाला AFSPA कानून का दायरा कम करने का फैसला लिया है. गृह मंत्री अमित शाह ने इस बात की जानकारी दी है. जिन तीन राज्यों में AFSPA का दायरा कम हुआ है, उनमें असम, नागालैंड और मणिपुर शामिल है.

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अशांत क्षेत्रों में लागू किया जाता है AFSPA. (फाइल फोटो-PTI) अशांत क्षेत्रों में लागू किया जाता है AFSPA. (फाइल फोटो-PTI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • असम के मात्र एक जिले में लागू रहेगा AFSPA
  • नागालैंड के 7 जिलों के 15 थानों से हटा कानून
  • मणिपुर के 6 जिलों के 15 थानों से भी हटाया

केंद्र सरकार ने असम, नागालैंड और मणिपुर में सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (AFSPA) का दायरा कम करने का फैसला लिया है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी. उन्होंने बताया कि इन तीनों राज्यों में AFSPA के तहत अशांत क्षेत्रों को कम करने का फैसला लिया है. ये फैसला 1 अप्रैल यानी शुक्रवार से लागू होगा. 

पूर्वोत्तर के राज्यों में AFSPA को हटाने की लंबे समय से मांग चल रही थी. नागालैंड में तो पिछले साल दिसंबर में AFSPA को हटाने की मांग तब तेज हो गई थी, जब सेना की गोलीबारी में 6 लोगों की मौत हो गई थी. इसके बाद नागालैंड में जबर्दस्त हिंसा हुई, जिसमें और 8 लोग मारे गए. 

किन क्षेत्रों से हटाया गया है AFSPA?

1. असमः यहां 1990 से पूरे इलाके में AFSPA लागू था. अब 23 जिलों से पूरी तरह इसे हटा लिया गया है. सिर्फ एक जिले में ये लागू आंशिक रूप से लागू रहेगा.

2. नागालैंडः यहां 1995 से पूरे इलाके में ये कानून लागू था. शुक्रवार से यहां के 7 जिलों के 15 पुलिस थानों से ये हट जाएगा.

3. मणिपुरः यहां राजधानी इंफाल के 7 क्षेत्रों को छोड़कर पूरे इलाके में 2004 से AFSPA लागू है. अब 6 जिलों के 15 पुलिस थानों से भी इसे हटा लिया गया है.

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क्या होता है AFSPA?

- AFSPA को अशांत इलाकों में लागू किया जाता है. ऐसे इलाकों में सुरक्षाबलों के पास बिना वारंट के किसी को भी गिरफ्तार करने की ताकत होती है और कई मामलों में बल प्रयोग भी किया जा सकता है.

- पूर्वोत्तर में सुरक्षाबलों की मदद करने के लिए 11 सितंबर 1958 को इस कानून को पास किया गया था. 1989 में जब जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद बढ़ा तो यहां भी 1990 में अफस्पा लागू कर दिया गया. अब ये अशांत क्षेत्र कौन होंगे, ये भी केंद्र सरकार ही तय करती है. AFSPA केवल अशांत क्षेत्रों में ही लागू होता है.

AFSPA से क्या मिल जाते हैं अधिकार?

- सुरक्षाबल किसी भी संदिग्ध व्यक्ति को बिना वारंट के गिरफ्तार कर सकते हैं. कानून का उल्लंघन करने वाले को चेतावनी देने के बाद बल प्रयोग और उस पर गोली चलाने की भी अनुमति देता है.

- इस कानून के तहत सुरक्षाबलों को किसी के भी घर या परिसर की तलाशी लेने का अधिकार मिला है. और इसके लिए सुरक्षाबल जरूरत पड़ने पर बल का प्रयोग भी कर सकते हैं.

- अगर सुरक्षाबलों को ऐसा अंदेशा होता है कि उग्रवादी या उपद्रवी किसी घर या बिल्डिंग में छिपे हैं तो उसे तबाह किया जा सकता है. इसके अलावा वाहनों को रोककर उनकी तलाशी भी ली जा सकती है.

- बड़ी बात ये है कि जब तक केंद्र सरकार मंजूरी न दे, तब तक सुरक्षाबलों के खिलाफ कोई मुकदमा या कानूनी कार्रवाई नहीं की जा सकती.

अभी किन-किन जगहों पर लागू है AFSPA?

- AFSPA को असम, मणिपुर, त्रिपुरा, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, नगालैंड, पंजाब, चंडीगढ़ और जम्मू-कश्मीर समेत कई हिस्सों में लागू किया गया था. हालांकि, बाद में समय-समय पर कई इलाकों से इसे हटा भी दिया गया.

- फिलहाल, ये कानून जम्मू-कश्मीर, नगालैंड, मणिपुर (राजधानी इम्फाल के 7 क्षेत्रों को छोड़कर), असम और अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में लागू है. त्रिपुरा, मिजोरम और मेघालय से इसे हटा दिया गया है.

AFSPA हटने से क्या फर्क आएगा?

- केंद्र सरकार ने असम, नागालैंड और मणिपुर के जिन इलाकों से AFSPA को हटाया है, वो अब अशांत क्षेत्र नहीं रह जाएंगे. ये इलाके भी अब शांत क्षेत्र रहेंगे. 

- सुरक्षाबलों की शक्तियां सीमित हो जाएंगी. जिस तरह अभी सुरक्षाबल बिना वारंट किसी की भी गिरफ्तारी कर सकते हैं, शक के आधार पर उनपर गोली चला सकते हैं, AFSPA हटने के बाद ये सब नहीं हो सकेगा.

इन इलाकों से क्यों हटाया गया ये कानून?

इन इलाकों से AFSPA को इसलिए हटाया गया है, क्योंकि यहां उग्रवादी गतिविधियों में काफी कमी आई है. केंद्र सरकार के मुताबिक, 2014 के मुकाबले 2021 में उग्रवादी घटनाओं में 74 फीसदी की कमी आई है. सरकार का दावा है कि पिछले कुछ सालों में 7 हजार से ज्यादा उग्रवादियों ने सरेंडर किया है.

 

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