Cyclone Alert in Odisha: दिवाली से पहले ओडिशा पर भयानक चक्रवात का खतरा मंडरा रहा है. IMD के मुताबिक, उत्तरी अंडमान सागर और इसके आसपास के क्षेत्रों पर चक्रवात सी-तरंग सक्रिय है. अगले 12 घंटों में दक्षिण पूर्वी बंगाल की खाड़ी के पूर्व मध्य पर कम दवाब का क्षेत्र बनाने की संभावना है. मौसम विभाग ने बताया कि 22 अक्टूबर को चक्रवात सी-तरंग मध्य बंगाल की खाड़ी में डिप्रेशन में तब्दील हो सकता है. अगले 48 घंटों के बाद 23 या 24 अक्टूबर को चक्रवात पश्चिम मध्य बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती तूफान का रूप धारण कर सकता है. हालांकि ओडिशा सरकार ने चक्रवात से पहले चक्रवात संभावित जिलों के वरिष्ठ अधिकारियों को अलर्ट पर रहने का आदेश दिया है. संभावित तूफान को लेकर सरकार ने सरकारी कर्मचारियों की छुट्टी रद्द करने का आदेश दिया है.
मछुआरों को समुद्र में न जाने की हिदायत
स्थिति को देखते हुए ओडिशा के तटीय जिलों में अलर्ट जारी कर दिया गया है. प्रशासन ने मछुआरों को 22 अक्टूबर से समुद्र में ना जाने की हिदायत दी है. साथ ही 22 अक्टूबर से प्रदेश के तटीय इलाकों में भारी बारिश की भविष्यवाणी की गई है. इस दौरान तटीय इलाकों में हवा की गति 45 से 65 किमी प्रति घंटा होने की संभावना है.
जीरो कैजुअल्टी पर सरकार की फोकस
ओडिशा सरकार ने प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारियों एवं चक्रवात संभावित जिलों के जिलाधीश के साथ उच्च स्तरीय बैठक की. राज्य सरकार ने ओडिशा आपदा त्वरित कार्रवाई बल (ओडीआरएएफ) और दमकल कर्मियों को तैयार रहने के अलावा अपने कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी है. साथ ही प्रदेश के सात तटीय जिलों में चेतावनी जारी कर दी है. ओडिशा सरकार ने चक्रवात के मद्देनजर केंद्रपाड़ा, जगतसिंहपुर, पुरी, बालासोर, भद्रक, खुर्दा और गंजाम जिलों के लिए अलर्ट जारी किया है. हर बार की तरह इस बार भी जीरो कैजुअल्टी सरकार के फोकस में है.
उठाए जा रहे हैं ये कदम
मिली जानकारी के अनुसार, चक्रवात संभावित जिलों के कलेक्टरों को 22 अक्टूबर से पहले समुद्र किनारे के निवासी करने वाले ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश भी जारी किया गया है. तटीय गांवों में चक्रवात से बचने के लिए आश्रय स्थलों को तैयार किया जा रहा है. जिला के वरिष्ठ अधिकारियों ने मछुआरों को मछली पकड़ने के लिए समुद्र में न जाने की चेतावनी जारी की है. साथ ही पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम के जरिए लोगों को अलर्ट कर किया जा रहा है.
इससे पहले भी आए हैं चक्रवात
बता दें कि ओडिशा ने 1999 के बाद दस प्रमुख चक्रवातों का सामना किया है. 29 अक्टूबर 1999 को ओडिशा सुपर साइक्लोन से जगतसिंहपुर और केंद्रपाड़ा के तटीय जिलों के लगभग 10 हजार लोग मारे गए थे. इसके अलावा 11 अक्टूबर 2013 को ओडिशा तट को फेलिन चक्रवात का भी सामना करना पड़ा था.
वहीं, चक्रवात हुदहुद 12 अक्टूबर 2014 को ओडिशा के दक्षिणी तट से टकराया था. तितली चक्रवात 11 अक्टूबर 2018 को चक्रवाती तूफान तितली ने आंध्र प्रदेश के पलासा के पास गोपालपुर के दक्षिण पश्चिमी तट पर दस्तक दी थी. अत्यंत भीषण चक्रवाती तूफान फानी 3 मई 2019 मई 2019 को लगभग 175 किमी प्रति घंटे की रफ्तार की हवा के साथ पुरी में ओडिशा तट से टकराया था.
2019-21 में भी ओडिशा ने चक्रवात का किया था सामना
चक्रवात बुलबुल ने 10 नवंबर 2019 को पश्चिम बंगाल और पश्चिम बंगाल की सीमा से लगे ओडिशा के कुछ हिस्सों को प्रभावित किया था. चक्रवात अम्फान ने 21 मई 2020 को पश्चिम बंगाल में सुंदरबन के पास लैंडफॉल होने से पहले ओडिशा तट भी नुकसान पहुंचाया था. चक्रवात यास ने 26 मई 2021 को ओडिशा में धामरा में लैंडफॉल किया. 26 सितंबर 2021 को चक्रवात गुलाब ने ओडिशा के दक्षिणी हिस्सों में दस्तक दी. यह कलिंगपट्टनम और गोपालपुर के तटों को पार कर गया था. 4 दिसंबर 2021 को ओडिशा को ओडिशा के तटीय जिलों में भारी वर्षा हुई क्योंकि चक्रवात जवाद के अवशेष उत्तर पूर्व दिशा में एक बार पुन सक्रिय होने और जगतसिंहपुर जिले के बंदरगाह शहर पारादीप तक पहुंचने से पहले पुरी तट पर पहुंच गया था.