दिल्ली हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पिंजड़ा तोड़ एक्टिविस्ट्स नताशा नरवाल, देवांगना कालिता और जामिया के स्टूडेंट आसिफ इकबाल तन्हा की जमानत को रद्द करने से इनकार कर दिया. दिल्ली हाई कोर्ट ने बीते दिनों तीनों आरोपियों को जमानत दे दी थी, जिसके बाद गुरुवार शाम को तीनों तिहाड़ जेल से बाहर आ गए. हाई कोर्ट ने तीनों आरोपियों को जमानत देते हुए तल्ख टिप्पणी भी की थी.
सुप्रीम कोर्ट ने तीनों आरोपियों की जमानत रद्द करने से तो इनकार कर दिया है, लेकिन हाई कोर्ट के आदेश पर कहा है कि यह ऑर्डर बाकी आरोपियों की जमानत का आधार नहीं बन जाए. सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली पुलिस की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा, 'इस तरह की राहत देने के लिए हाई कोर्ट के फैसले को किसी भी अदालत द्वारा मिसाल नहीं माना जाएगा.'
हाई कोर्ट से जमानत मिलने के बाद दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. दिल्ली पुलिस ने तीनों आरोपियों की जमानत को खारिज करने की मांग की थी. इस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के ऑर्डर पर स्टे लगाने से मना कर दिया. साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने तीनों आरोपियों (नताशा नरवाल, देवांगना कालिता और आसिफ इकबाल) से चार हफ्तों के भीतर जवाब मांगा है.
अगली सुनवाई 19 जुलाई के बाद
मामले की अगली सुनवाई 19 जुलाई के बाद होगी. जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस वी. रामसुब्रमण्यम की अवकाश पीठ ने हालांकि स्पष्ट किया कि इन कार्यकर्ताओं को दी गई जमानत फिलहाल प्रभावित नहीं होगी.
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दिल्ली पुलिस की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए सॉलिसिटर जनरल ने कहा, 'तीन कार्यकर्ताओं को जमानत देने में दिल्ली हाई कोर्ट ने पूरे आतंकवाद विरोधी कानून, यूएपीए को उलट दिया है.' इससे पहले, दिल्ली पुलिस ने एक बयान में कहा, 'हम जमानत देने से संबंधित मामले में माननीय हाई कोर्ट द्वारा यूएपीए के प्रावधानों की व्याख्या से संतुष्ट नहीं हैं.'
परिजनों को कोर्ट से यह आस
यूएपीए चार्ज के तहत दिल्ली दंगों के आरोपी नताशा नरवाल और उसके साथी भले ही जमानत पर बाहर निकल गए हों, लेकिन घर में कदम रखने के लिए दिल्ली पुलिस का ऐड्रेस वेरीफिकेशन आड़े आ रहा है. ऐसे में जब तक एड्रेस वेरीफाई नहीं हो जाता, तब तक नताशा नरवाल और उसके साथी अपने घरों में नहीं जा सकते. वहीं, रोहतक सेक्टर तीन स्थित नताशा नरवाल के परिवारजनों ने दिल्ली पुलिस को आड़े हाथों लिया और कहा कि वे न्यायालय से ही न्याय की उम्मीद कर रहे हैं. अन्य आरोपी देवांगना असम और आसिफ का एड्रेस वेरीफिकेशन झारखंड का है.
दिल्ली हाई कोर्ट ने जमानत देते हुए क्या कहा था?
नताशा नरवाल, देवांगना कालिता और आसिफ इकबाल तन्हा को मंगलवार को दिल्ली हाई कोर्ट से जमानत मिली थी. हाई कोर्ट ने उस समय यूएपीए को लेकर तीखी टिप्पणी की थी. जमानत देते हुए कोर्ट ने कहा था, 'हम यह कहने के लिए विवश हैं कि ऐसा लगता है कि अंसतोष को दबाने की चिंता में मामला हाथ से निकल सकता है. राज्य ने संवैधानिक रूप से मिले विरोध के अधिकार और आतंकवादी गतिविधियों के बीच की लाइन को धुंधला कर दिया है. अगर यह धुंधलापन बढ़ता गया तो फिर लोकतंत्र खतरे में पड़ जाएगा.'
जेल से रिहा हुए तीनों एक्टिविस्ट्स
मंगलवार को जमानत मिलने के बाद तीनों एक्टिविस्ट्स गुरुवार को तिहाड़ जेल से बाहर आ गए. बाहर आने के बाद नताशा नरवाल ने कहा, 'मेरे पिता नहीं रहे, इसलिए मैं पूरी तरह खुश नहीं हूं. मैं अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को जानकर हैरान रह गई हूं' वहीं, जेल से बाहर आने के बाद देवांगना कालिता ने कहा कि उन्हें खुली हवा में सांस लेकर काफी अच्छा लग रहा है. उन्होंने कहा, 'पुलिस ने मुझसे कड़ी पूछताछ की, लेकिन हमने उन्हें बताया कि दिल्ली में हुए दंगों से हमारा कोई लेना-देना नहीं है. हम प्रदर्शनकारी हैं.'