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मेंटल हेल्थ केयर संस्थानों में रह रही महिलाओं की स्थिति पर SC ने जताई चिंता

सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को मानसिक स्वास्थ्य रोगियों की जानकारी और बीमारी से ठीक होने वालों के विवरण, आधे घर, पुनर्वास आदि के साथ 4 सप्ताह के भीतर ऑनलाइन पोर्टल स्थापित करने का निर्देश दिया.

सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम कोर्ट
स्टोरी हाइलाइट्स
  • मानसिक बीमारी से ठीक हुए लोगों के पुनर्वास गृह बनाने का आदेश
  • 4 हफ्ते के भीतर समस्त जानकारी ऑनलाइन पोर्टल पर देने का निर्देश
  • महाराष्ट्र को मानसिक रोगियों को भिक्षु गृह भेजने पर रोक का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने मेंटल हेल्थ केयर संस्थानों में रह रही महिलाओं की समस्याओं पर चिंता जताते हुए कहा कि वहां महिलाओं के केश काट देना, समुचित स्वच्छता पर ध्यान नहीं देना, सैनिटरी नैपकीन की आपूर्ति न होना, निजता का अभाव जैसी शारीरिक और मानसिक परेशानी विचलित करने वाली है.

इस संबंध में दाखिल पीआइएल पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वो राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में चल रहे ऐसे संस्थानों पर हर महीने निगरानी करे. अदालत ने कहा कि केंद्र इसके लिए जरूरी निर्देश जारी करे ताकि ये सुनिश्चित हो कि ये समस्याएं दूर हो जाएं.

सुप्रीम कोर्ट ने मानसिक बीमारी से ठीक हुए लोगों के पुनर्वास गृह बनाने का आदेश दिया.  इसके लिए राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को 6 महीने का समय दिया गया है. साथ ही, राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों को यह सुनिश्चित करने को कहा कि मानसिक केंद्रों से ठीक होकर आई महिलाओं को वृद्धाश्रम या भिक्षु गृहों में ना भेजा जाए. साथ ही अदालत ने यह भी कहा है कि उन्हें इस बीच उचित सुविधाएं मुहैया कराई जाए.

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सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को मानसिक स्वास्थ्य रोगियों की जानकारी और बीमारी से ठीक होने वालों के विवरण, आधे घर, पुनर्वास आदि के साथ 4 सप्ताह के भीतर ऑनलाइन पोर्टल स्थापित करने का निर्देश दिया. 

टीकाकरण की समयसीमा तय करें

सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि वे मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों में रहने वाले कैदियों को COVID-19 के टीकाकरण के लिए समयसीमा तय करें और 15 अक्टूबर तक टीकाकरण पर स्थिति रिपोर्ट जमा करें

सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र और यूपी सरकार को फटकार भी लगाई. कोर्ट ने कहा कि लिप सर्विस ना करें, उचित पुनर्वास गृह स्थापित करें. जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस हिमा कोहली की बेंच वकील गौरव बंसल की याचिका पर सुनवाई कर रही थी. 

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने मेंटल हेल्थ केयर संस्थानों में रह रहे मनोरोगियों (Mentally Ill Persons) का वैक्सीनेशन करने का आदेश राज्य सरकारों को दिया था. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने मनोरोगियों को भिक्षु गृह में रखे जाने को लेकर महाराष्ट्र (Maharashtra) सरकार को फटकार लगाई.

महाराष्ट्र सरकार को निर्देश

शीर्ष अदालत ने महाराष्ट्र सरकार को मानसिक रोगियों को भिक्षु गृह (Beggar Homes) भेजने की प्रक्रिया तुरंत रोकने का निर्देश दिया. मेंटल हेल्थ सेंटर में रखे गए मानसिक रूप से बीमार मरीजों की देखभाल और पुनर्वास से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने यह निर्देश दिया है. जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह ने इस याचिका पर सुनवाई की.

जस्टिस शाह ने कहा कि देश में केवल एक संस्थान Banyan tree चेन्नई में है, जो ऐसे लोगों की देखभाल करता है. जो लोग ऐसे मनोरोगों से उबर भी जाते हैं, उनके परिजन स्वस्थ होने के बाद भी उन्हें स्वीकार नहीं करते.

याचिकाकर्ता गौरव कुमार बंसल ने तर्क दिया कि महाराष्ट्र सरकार भिखारियों के लिए बनाए गए बेगर्स होम में इन मानसिक रोगियों को भेज रही है, जो कानून के विपरीत है. साथ ही उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों का तुरंत वैक्सीनेशन भी किया जाना चाहिए. उनका कहना है कि मरीजों को भिक्षु गृह भेजे जाने के कारण भी कई की मौत हुई है.

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि मनोरोगियों को बेगर्स होम भेजना उल्टे नतीजों वाला साबित होगा और यह कानून के खिलाफ भी है. महाराष्ट्र सरकार इस कार्रवाई को तुरंत रोके.
 

 

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