scorecardresearch
 

असम में अवैध अप्रवासियों से जुड़े नियमों को चुनौती देने वाली 17 याचिकाओं पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई 

नागरिकता अधिनियम में धारा 6A को असम समझौते के अंतर्गत आने वाले लोगों को नागरिकता देने के संबंध में विशेष प्रावधान के तौर पर जोड़ा गया था. धारा 6A एक विशेष प्रावधान है जिसे 15 अगस्त 1985 को केंद्र सरकार और असम आंदोलन के नेताओं के बीच बातचीत के बाद जोड़ा गया था.

Advertisement
X
सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)
सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)

असम में अवैध अप्रवासियों से संबंधित नागरिकता अधिनियम की धारा 6A की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली 17 याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ मंगलवार को सुनवाई करेगी. संविधान पीठ में सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ के साथ जस्टिस एएस बोपन्ना, जस्टिस एमएम सुंदरेश, जस्टिस जेबी पारदी वाला और जस्टिस मनोज मिश्रा शामिल हैं.  

नागरिकता अधिनियम में धारा 6A को असम समझौते के अंतर्गत आने वाले लोगों को नागरिकता देने के संबंध में विशेष प्रावधान के तौर पर जोड़ा गया था. धारा 6A एक विशेष प्रावधान है जिसे 15 अगस्त 1985 को केंद्र सरकार और असम आंदोलन के नेताओं के बीच हस्ताक्षर हुए 'असम समझौते' को नागरिकता अधिनियम में शामिल किया गया था.  

सुप्रीम कोर्ट में किस मामले को चुनौती? 

उसमें एक जनवरी 1966 से 25 मार्च 1971 के बीच बांग्लादेश समेत अन्य देशों से असम में आए लोगों को संशोधित नागरिकता अधिनियम 1985 की धारा 18 के तहत पंजीकरण कराना होगा. इसके जरिए उन बांग्लादेशी प्रवासियों को नागरिकता प्रदान की जा सकती जो इस अवधि में भारत आए. उसके बाद आए लोगों को नागरिकता नहीं मिल सकेगी. इसी प्रावधान को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है. 

Advertisement

17 याचिकाओं पर होनी है सुनवाई 

सुप्रीम कोर्ट में साल 2009 से लंबित 17 याचिकाओं में असम पब्लिक वर्कर्स , असम सम्मिलित महासंघ, पूर्वोत्तर हिंदुस्तानी सम्मेलन और असम साहित्य सभा की भी याचिका भी शामिल हैं. उनमें अप्रवासियों को नागरिकता देने में धारा 6A की "भेदभावपूर्ण प्रकृति" को चुनौती दी गई है. इसमें तर्क दिया गया है कि विशेष प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 6 का उल्लंघन है क्योंकि अनुच्छेद 6 में अप्रवासियों को नागरिकता देने की कट-ऑफ तारीख 19 जुलाई, 1948 तय की गई है. 

साल 2009 में पहली बार मामला SC पहुंचा  

यह मामला शीर्ष अदालत की चौखट पर 2009 में पहली बार आया था. साल 2014 में दो जजों की पीठ ने 13 सवाल तैयार करने के बाद इसे तीन जजों की बड़ी पीठ के पास भेज दिया था फिर 2015 में तीन जजों की पीठ ने इसके संविधान से जुड़े पहलुओं की पहचान कर इसकी सुनवाई पांच जजों की संविधान पीठ के समक्ष कराए जाने की सिफारिश की थी.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement