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'मैं भी हूं ऑनरेरी कॉकरोच!' CJP के समर्थन में उतरे सोनम वांगचुक, बोले- युवाओं की आवाज दबाने के बजाय उनकी बात सुने सरकार

'आनरेरी कॉकरोच' बताते हुए कहा कि युवाओं की रचनात्मक अभिव्यक्ति से डरने की बजाय सरकार को उनका संदेश समझना चाहिए. उन्होंने पेपर लीक और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को गंभीर बताते हुए सोशल मीडिया अकाउंट बंद करने पर भी चिंता जताई.

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सोनम वांगचुक ने कहा- पेपर लीक जैसे मुद्दों पर युवाओं की बात सुननी चाहिए (Photo: PTI)
सोनम वांगचुक ने कहा- पेपर लीक जैसे मुद्दों पर युवाओं की बात सुननी चाहिए (Photo: PTI)

देश में इन दिनों एक अजीब लेकिन दिलचस्प ऑनलाइन आंदोलन चल रहा है जिसका नाम है "कॉकरोच आंदोलन". इसे चलाने वाले खुद को 'कॉकरोच जनता पार्टी' यानी CJP कहते हैं. इस आंदोलन को अब मशहूर एनवायरनमेंटलिस्ट और एजुकेशनिस्ट सोनम वांगचुक का भी समर्थन मिल गया है. उन्होंने खुद को 'आनरेरी कॉकरोच' बताया है और सरकार से कहा है कि युवाओं की आवाज दबाने की बजाय उनकी बात सुनी जाए.

सोनम वांगचुक ने इस आंदोलन का खुलकर समर्थन किया है. उन्होंने कहा कि वो इस आंदोलन से बहुत प्रभावित हैं. उन्होंने कहा. 'मुझे बहुत खुशी है. हमारे युवाओं का इस तरह का क्रिएटिव एक्सप्रेशन न तो चिंता की बात है और न ही डर की बात.'

क्या वो आंदोलन में शामिल होंगे?

जब उनसे पूछा गया कि क्या वो इस आंदोलन के मेंबर बनेंगे, तो उन्होंने हंसते हुए जवाब दिया. उन्होंने कहा, "मैं मेंबर बनने के लायक नहीं हूं क्योंकि न तो मैं बेरोजगार हूं और न ही आलसी हूं. तो दुर्भाग्य से मैं मेंबर नहीं बन सकता. लेकिन मैं खुद को 'आनरेरी कॉकरोच' मानता हूं."

सरकार को क्या संदेश दिया?

वांगचुक ने सरकार को साफ संदेश दिया कि इस आंदोलन को दबाने की कोशिश न की जाए. उन्होंने कहा, "सरकार को यह मैसेज लेना चाहिए. मैसेंजर को मत मारो. अगर हम मैसेंजर को मारते हैं तो मैसेज खत्म नहीं होगा."

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उन्होंने इसे अखबारों के कार्टूनिस्ट से जोड़ते हुए समझाया. उनका कहना था कि जैसे कोई किसी कार्टूनिस्ट को इसलिए गोली नहीं मारता कि उसने प्रधानमंत्री, गृहमंत्री या रक्षा मंत्री का कैरिकेचर बना दिया. उसी तरह यह भी व्यंग्य है. इसे फीडबैक की तरह देखना चाहिए.

यह भी पढ़ें: कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर का इंस्टाग्राम अकाउंट हैक! अभिजीत दीपके का बड़ा दावा

नेपाल का उदाहरण क्यों दिया?

वांगचुक ने कहा कि नेपाल का उदाहरण देते हुए बताया कि जब वहां इंटरनेट बंद किया गया और क्रिएटिव एक्सप्रेशन को रोका गया, तो युवा सड़कों पर आ गए और हिंसा हुई. उनका कहना था कि नेपाल में हिंसा बिना वजह नहीं हुई थी. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ऑनलाइन अकाउंट बंद किए जाते रहे तो यह गुस्सा कहीं भी जा सकता है.

युवाओं की तारीफ क्यों की?

वांगचुक ने इस बात की तारीफ की कि भारत के युवाओं ने सड़कों पर पत्थर उठाने की बजाय डिजिटल क्रिएटिविटी को चुना. उनका कहना था, "मुझे बहुत खुशी है कि भारत के युवाओं ने अपनी नाराजगी को इतने क्रिएटिव तरीके से सामने रखा. दूसरे देशों में जैसे सड़कों पर पत्थरबाजी होती है, वैसा नहीं किया." उन्होंने कहा कि ऐसी चीजें ही भारत को विश्वगुरु बनाती हैं.

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पेपर लीक पर क्या बोले?

वांगचुक ने पेपर लीक के मुद्दे को बहुत गंभीरता से लिया. उनका कहना था कि यह उठाया जाना बिल्कुल सही है. उन्होंने कहा कि किसी भी देश में मंत्री इस तरह के मुद्दों पर इस्तीफा दे देते हैं. इन्हें दबाने की बजाय इनका मैसेज लिया जाना चाहिए.

इनपुट: पीटीआई

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