प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि स्वामी विवेकानंद भारत को प्रबुद्ध बनाना चाहते थे. पीएम ने कहा कि स्वामी विवेकानंद में गरीबों के प्रति करुणा और दया का भाव था. पीएम ने कहा कि अगर गरीब बैंक तक नहीं पहुंच पाता है तो बैंकों को ही गरीब तक पहुंचना चाहिए. इस सिद्धांत पर जन धन खाते खोले गए हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वामी विवेकानंद द्वारा शुरू की गई पत्रिका प्रबुद्ध भारत की 125वीं वर्षगांठ पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे. प्रबुद्ध भारत पत्रिका 1896 में स्वामी विवेकानंद द्वारा शुरू की गई थी. बता दें कि यह पत्रिका रामकृष्ण परमहंस के आदेश पर स्वामी विवेकानंद ने शुरू की थी.
पीएम रविवार को ने कहा कि स्वामी विवेकानंद भारत को प्रबुद्ध बनाना चाहते थे. वे गरीबों के लिए कल्याण और उत्थान पर ध्यान देते थे. अगर गरीब स्वास्थ्य सेवाओं तक नहीं पहुंच पा रहे हैं तो स्वास्थ्य सेवाओं को गरीबों तक पहुंचना चाहिए. नरेद्र मोदी ने कहा कि स्वामी विवेकानंद चाहते थे कि अगर गरीब खुद अपना विकास नहीं कर पा रहे हैं तो विकास को ही उनके पास ले जाने की जरूरत है. आयुष्मान भारत योजना में हम यही कर रहे हैं. पीएम मोदी ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने इस पत्रिका का नाम प्रबुद्ध भारत रखा, क्योंकि वो इसके जरिए भारत की भावना व्यक्त करना चाहते थे.
पीएम मोदी ने कहा कि स्वामी विवेकानंद गरीबी को दूर करना चाहते थे. इसलिए गरीबी खत्म करनी ही होगी. उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद के फोकस में दरिद्र नारायण थे. गरीबों के विकास के बिना देश का विकास संभव नहीं है.
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा विवेकानंद के सिद्धातों पर चलते हुए कोरोना काल के दौरान हमने न सिर्फ समस्या का देखा, बल्कि उसका समाधान निकाला. पीएम मोदी ने कहा कि हमने न सिर्फ पीपीई किट का उत्पादन किया, बल्कि दुनिया की फॉर्मेसी बन गए. भारत कोरोना वैक्सीन विकसित करने में सबसे आगे रहा. हम इस क्षमता का इस्तेमाल दुनिया के दूसरे देशों को मदद करने में कर रहे हैं. इस उपलब्धि के लिए देश को अपने वैज्ञानिकों पर गर्व है. ये वो भारत है जो दुनिया की समस्याओं का समाधान दे रहा है. और असल मायने में यही प्रबुद्ध भारत की संकल्पना है.
बता दें कि ये पत्रिका भारत की संस्कृति, अध्यात्म, दर्शन, इतिहास, मनोविज्ञान, कला और दूसरे सामाजिक मुद्दों गंभीर चिंतन प्रस्तुत करती है.
माना जाता है कि इस पत्रिका के लिए नेताजी सुभाष चंद्र बोस, बाल गंगाधर तिलक, अरबिंद, पूर्व राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन जैसे विभूतियों ने योगदान दिया है. 'प्रबुद्ध भारत' पत्रिका का प्रकाशन तत्कालीन मद्रास में 1896 को शुरू किया गया था. यहां दो वर्षों तक प्रकाशित होता रहा. इसके बाद इसका प्रकाशन अल्मोड़ा से किया जाने लगा.