देश में नक्सलवाद के खिलाफ चल रही मुहिम अब एक नए चरण में प्रवेश कर चुकी है. सुरक्षा एजेंसियों ने न केवल सक्रिय नक्सलियों के नेटवर्क पर शिकंजा कसना तेज किया है, बल्कि उनकी विचारधारा के प्रतीकों को भी निशाना बनाया जा रहा है. इसी क्रम में देशभर में नक्सलियों द्वारा स्थापित स्मारकों और स्मारकों को ध्वस्त करने का अभियान चलाया जा रहा है, जिसे ‘ऑपरेशन ध्वस्तीकरण’ नाम दिया गया है.
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ में अब तक कुल 203 नक्सली स्मारकों तोड़े जा चुके हैं. इनमें सबसे अधिक कार्रवाई वर्ष 2026 में दर्ज की गई है. बताया गया है कि इस वर्ष अभियान ने अभूतपूर्व गति पकड़ी और बड़ी संख्या में स्मारकों को हटाया गया.
छत्तीसगढ़ में वर्ष 2023 में कोई मॉन्यूमेंट ध्वस्त नहीं किया गया था, जबकि 2024 में 8 और 2025 में 11 स्मारक तोड़े गए. वर्ष 2026 में यह संख्या बढ़कर 130 हो गई. इस प्रकार राज्य में कुल 149 स्मारकों ध्वस्त किए जा चुके हैं.
वहीं महाराष्ट्र में 2023 में 1, 2024 में 2 और 2025 में 7 स्मारकों तोड़े गए. वर्ष 2026 में यहां 45 स्मारकों को हटाया गया. राज्य में कुल 55 स्मारकों ध्वस्त किए गए हैं.
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इन स्मारकों के माध्यम से नक्सली संगठन अपनी विचारधारा का प्रचार-प्रसार करते थे और स्थानीय युवाओं को प्रभावित करने की कोशिश करते थे. अधिकारियों के अनुसार इन प्रतीकों को हटाने से नक्सलियों की वैचारिक पकड़ कमजोर होगी.
सूत्रों के अनुसार यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और अन्य प्रभावित इलाकों में भी इसी तरह की कार्रवाई की जा सकती है. सरकार का फोकस अब नक्सलवाद के सैन्य ढांचे के साथ-साथ उसके वैचारिक आधार को भी समाप्त करने पर है.