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चारा घोटाले में लालू के खिलाफ की थी एफआईआर, जानिए कौन हैं पीएम के सलाहकार बने अमित खरे

पीएम के नए सलाहकार को सबसे ज्यादा सुर्खियां अपने शुरुआती करियर में ही मिल गई थी. साल 1985 में IAS बने अमित खरे ने अपने करियर के नौवें साल में चारा घोटाले को एक्सपोज कर दिया था.

जानिए कौन हैं पीएम के सलाहकार बने अमित खरे जानिए कौन हैं पीएम के सलाहकार बने अमित खरे
स्टोरी हाइलाइट्स
  • चारा घोटाले में लालू के खिलाफ की थी एफआईआर
  • शिक्षा सचिव रहते हुए सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट को किया पूरा
  • अमित खरे के करियर की हर जानकारी

आईएएस अमित खरे को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नया सलाहकार नियुक्त कर दिया गया है. वे दो साल के लिए इस पद पर रहने वाले हैं. अमित खरे का 36 साल लंबा करियर रहा है. मुश्किल फैसले लेने से लेकर कई क्रांतिकारी बदलाव लाने तक, कई मौकों पर खरे ने सक्रिय भूमिका निभाई है.

कौन हैं पीएम मोदी के नए सलाहकार?

लेकिन पीएम के नए सलाहकार को सबसे ज्यादा सुर्खियां अपने शुरुआती करियर में ही मिल गई थी. साल 1985 में IAS बने अमित खरे ने अपने करियर के नौवें साल में चारा घोटाले को एक्सपोज कर दिया था. वे पहले शख्स ने जिन्होंने सबसे पहले इस चोरी को पकड़ा था. दरअसल उस समय खरे उपायुक्त हुआ करते थे और उन्होंने अपने स्तर पर ये पाया था कि चाईबासा कोषागार से 34 करोड़ रुपये से अधिक की निकासी हुई थी. इस मामले में खरे ने बिना किसी से डरे प्राथमिकी दर्ज करवाई थी. बाद में इस मामले में कई बड़े नेता गिरफ्तार हुए. उन्हीं में से एक रहे लालू प्रसाद यादव.

अब उस दिशा में अमित खरे का करियर लगातार नई ऊंचाइयों को छूता रहा, लेकिन फिर पीएम नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में भी उन्होंने अपने काम से सभी का दिल जीत लिया. उनका काम इतना सटीक रहा कि सभी तारीफ करने को मजबूर रहे. ऐसा ही कुछ साल 2020 में भी देखने को मिला था जब खरे ने देश की नई शिक्षा नीति बनाने में एक अहम योगदान दिया था. उस समय उन्होंने शिक्षा सचिव रहते हुए सरकार के इस ड्रीम प्रोजेक्ट को भी पूरा कर दिखाया था.

झारखंड-बिहार रही कर्मभूमि

इस सब के अलावा अमित  खरे के लिए उनकी कर्मभूमि झारखंड और बिहार ही रही क्योंकि इन्हीं दो राज्यों में उन्होंने सबसे ज्यादा पद संभाले और अलग-अलग जिम्मेदारियों का निर्वाहन किया. उच्च शिक्षा रहते हुए उन्होंने डीडी झारखंड सहेत कई दूसरे महत्वपूर्ण चैनलों को लॉन्च किया था. वहीं दूरदर्शन के आकाशवाणी प्रोग्राम को भी उन्होंने नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया था.

कई घोटाले किए एक्सपोज

इसके अलावा खरे ने अपनी योग्यता उस समय भी साबित की जब उन्हें झारखंड राज्यपाल वे मारवाह का प्रिंसिपल सेकरेट्री बनाया गया था. उन्हें पटना का डीएम और कलेक्टर भी बनाया जा चुका है. ऐसे में अपने 36 साल के करियर में कई बड़ी जिम्मेदारियां अमित खरे निभा चुके हैं. कहा जाता है कि बिहार में मेडिकल और इंजीनियरिंग की परीक्षा कंबाइंड कराने का फैसला भी उन्हीं का रहा था. इस वजह से मेधा घोटाला रोका जा सका था और बड़ी स्तर पर होने वाली धांधली रुक गई थी.

अब उनके इसी शानदार करियर को देखते हुए उन्हें दो साल के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सलाहकार नियुक्त कर दिया गया है. जानकारी दी गई है कि भारत सरकार में उनका पद सचिव के पद के बराबर ही रहने वाला है और उनका वेतन भी उस पद के लिहाज से दिया जाएगा.

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