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कर्नाटक हिजाब विवाद पर सुनवाई: हाई कोर्ट की दो टूक- 'भावना से नहीं हम कानून से चलेंगे'

कर्नाटक में जारी हिजाब विवाद के बीच आज हाई कोर्ट में बड़ी सुनवाई शुरू हो चुकी है. इस समय राज्य के कई स्कूल-कॉलेज में हिजाब को लेकर विवाद चल रहा है. कर्नाटक सरकार ने जब से Karnataka Education Act-1983 की धारा 133 लागू की है, बवाल ज्यादा बढ़ गया है.

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हिजाब विवाद को लेकर हाई कोर्ट में सुनवाई हिजाब विवाद को लेकर हाई कोर्ट में सुनवाई
स्टोरी हाइलाइट्स
  • हिजाब विवाद पर कर्नाटक हाईकोर्ट में तीखी बहस
  • 9 फरवरी को 2.30 बजे होगी मामले की अगली सुनवाई

कर्नाटक में हिजाब विवाद को लेकर आज हाई कोर्ट में बड़ी सुनवाई शुरू हो गई है. इस समय राज्य के कई स्कूल-कॉलेज में हिजाब को लेकर बवाल चल रहा है. एक तरफ मुस्लिम छात्राएं स्कूल-कॉलेज में हिजाब पहन अपना विरोध दर्ज करवा रही हैं तो वहीं दूसरी तरफ कई छात्र भगवा स्कॉफ पहन भी अपना विरोध दिखा रहे हैं.

कोर्ट में सुनवाई जारी

हाई कोर्ट में जज कृष्णा दीक्षित ने मामले की सुनवाई शुरू की है. उनके सामने याचिकाकर्ता ने मामले की सुनवाई को स्थगित करने की मांग उठा दी है. तर्क दिया गया है कि इस मामले में एक और याचिका दायर की गई है, ऐसे में जब तक सभी दस्तावेज ना आ जाएं, सुनवाई शुरू नहीं हो सकती. इस पर जज ने कहा है कि इस मामले में जो भी फैसला सुनाया जाएगा, वो इससे जुड़े दूसरे मामलों पर भी लागू होने वाला है. अभी के लिए कृष्णा दीक्षित द्वारा दूसरे मामलों के दस्तावेज भी मंगवाए गए हैं.

कुरान का हवाला, कोर्ट में तीखी बहस

जब इस सुनवाई को आगे बढ़ाया गया तब हाई कोर्ट ने साफ कर दिया वे भावना से नहीं, सिर्फ और सिर्फ कानून से चलने वाले हैं. कोर्ट ने बकायदा कुरान की एक कॉपी मंगवाई और उस आधार पर आगे की सुनवाई को शुरू किया गया. पूछा गया कि क्या कुरान में ये लिखा है कि हिजाब जरूरी है? इस पर याचिकाकर्ता की तरफ लड़ रहे एडवोकेट कमथ ने कहा कि कुरान की आयत 24.31 और 24.33 'हेड स्कॉफ' की बात करता है. वहां पर बताया गया है कि ये कितना जरूरी है.

इसके बाद एडवोकेट कमात ने इस बात का भी जिक्र किया कि ऐसे मामलों में किसी भी चलन को धार्मिक आधार पर भी समझना जरूरी रहता है. उन्होंने केरल हाई कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि चेहरे को ना ढकना, लंबी ड्रेस ना पहना सजा का पात्र है. ये बात उन्होंने 'हदीथ' का हवाला देते हुए बताई. ये बात उन्होंने तब की जब जस्टिस दीक्षित ने पूछा कि 'हदीथ' का मतलब क्या चेहरे को दिखाना होता है. इसी के जवाब में एडवोकेट कमत ने कहा कि इस को समझने के अलग-अलग तरीके हो सकते हैं. यहीं पर उन्होंने केरल हाई कोर्ट के एक फैसले का हवाला भी दिया. इस मामले की सुनवाई अब 9 फरवरी को 2.30 बजे से होगी.

केरल हाई कोर्ट के फैसले का हवाला

उसी केरल हाई कोर्ट के फैसले के आधार पर याचिकाकर्ता के वकील ने यहां तक कहा कि सिर को ना ढकना 'हराम' माना गया है. लंबी स्लीव वाली ड्रेस ना पहनना भी इसी श्रेणी में रखा गया है. ये बात उन्होंने केरल हाई कोर्ट के फैसले के पैरा 29 के आधार पर की है. इसके बाद एडवोकेट कमात ने कहा कि बोलने का जो अधिकार दिया गया है, उसी के अंतर्गत राइट टू वीयर भी आता है. उन्होंने ये भी कहा कि निजता का भी हनन है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में साफ कहा था कि राइट टू वीयर भी निजता अधिकार के अंदर ही आता है.

इस बीच कर्नाटक सरकार ने कुछ दिन पहले ही Karnataka Education Act-1983 की धारा 133 लागू कर दी है. इस वजह से अब सभी स्कूल-कॉलेज में यूनिफॉर्म को अनिवार्य कर दिया गया है. सरकारी स्कूल और कॉलेज में तो तय यूनिफॉर्म पहनी ही जाएगी, प्राइवेट स्कूल भी अपनी खुद की एक यूनिफॉर्म चुन सकते हैं.

पूरा विवाद शुरू कब हुआ?

मुस्लिम छात्राओं का कहना है कि वे पहले से हिजाब पहन पढ़ाई करती आ रही हैं. पहले कभी इस पर कोई विवाद नहीं था. यहां तक कहा गया है कि उनके घर की दूसरी महिलाओं ने भी ऐसे ही पढ़ाई की है, लेकिन अब हिजाब पर यूं बवाल काटा जा रहा है. दूसरी तरफ एक तबका ऐसा है जो मानता है कि शिक्षा का यूनिवॉर्म से कोई लेना-देना नहीं है और सभी को स्कूल मे एक समान ही रहना चाहिए.

जानकारी के लिए बता दें कि ये सारा विवाद पिछले महीने जनवरी में तब शुरू हुआ था जब उडुपी के एक सरकारी महाविद्यालय में छह छात्राओं ने हिजाब पहनकर कॉलेज में एंट्री ली थी. विवाद इस बात को लेकर था कि प्रशासन ने छात्राओं को हिजाब पहनने के लिए मना किया था, लेकिन वे फिर भी पहनकर आ गई थीं. उस विवाद के बाद से ही दूसरे कॉलेजों में भी हिजाब को लेकर बवाल शुरू हो गया और कई जगहों पर पढ़ाई भी प्रभावित हुई.

हाल ही में शिमोगा में भी कॉलेज के अंदर हिजाब विवाद को लेकर बड़ा बवाल देखने को मिला था. पुलिस को आकर मामले को शांत करना पड़ा था. उस घटना के कुछ वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हैं.

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