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बड़े-बड़े गेट, गार्ड्स, खूंखार कुत्ते... जानिए 'डिजिटल अरेस्ट' नेटवर्क कैसे-कौन चला रहा है? देखें- सैटेलाइट तस्वीरें

इंडिया टुडे ने सैटेलाइट इमेजरी और ओपन-सोर्स डेटा की मदद से स्कैम सेंटर्स के विशाल नेटवर्क की पड़ताल की है. 2021 के बाद इन ऑपरेशंस की संख्या दोगुनी से अधिक हो गई है. ये सेंटर अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क से जुड़े हैं और अरबों डॉलर के ग्लोबल ऑनलाइन फ्रॉड इंडस्ट्री का हिस्सा हैं.

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ऑनलाइन ठगी का ग्लोबल नेटवर्क: म्यांमार से कंबोडिया तक फैले स्कैम सेंटर
ऑनलाइन ठगी का ग्लोबल नेटवर्क: म्यांमार से कंबोडिया तक फैले स्कैम सेंटर

हममें से ज़्यादातर लोगों को कभी न कभी वो फर्जी कॉल आई होगी. ऐसी कॉल जो आपको एक पल के लिए सोचने पर मजबूर कर दे कि आखिर दिन-भर बैठकर लोगों को ठगने का काम कौन करता है? 

नेटफ्लिक्स की चर्चित सीरीज़ जामताड़ा ने स्कैम की दुनिया को कुछ चालाक किशोरों की जल्दी पैसे कमाने की कहानी के तौर पर दिखाया. लेकिन हकीकत इससे कहीं ज्यादा बड़ी और खतरनाक है. आज ये धंधा एक पूरी तरह संगठित, इंडस्ट्रियल लेवल का कारोबार बन चुका है.

इंडिया टुडे ने सैटेलाइट इमेजरी और ओपन-सोर्स डेटा की मदद से म्यांमार, थाईलैंड, लाओस और कंबोडिया की सीमाओं पर फैले स्कैम सेंटर्स के विशाल नेटवर्क की पड़ताल की है. ओपन-सोर्स डेटा और सैटेलाइट तस्वीरें बताती हैं कि 2021 के बाद से इन स्कैम ऑपरेशंस की संख्या दोगुने से भी ज्यादा हो चुकी है.

ये स्कैम सेंटर अक्सर ऐसे बंद परिसरों (कंपाउंड्स) में चलते हैं, जिनका सीधा रिश्ता अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क से होता है. ये नेटवर्क अरबों डॉलर के ग्लोबल ऑनलाइन फ्रॉड इंडस्ट्री का हिस्सा हैं, जो बीते कुछ सालों में दक्षिण-पूर्व एशिया के सीमावर्ती इलाकों में तेजी से फैली है.

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इस इंडस्ट्री का बड़ा हिस्सा मानव तस्करी और जबरन मजदूरी पर टिका है. काम करने वालों को मजबूरी में दुनिया भर के लोगों को ठगने के लिए लगाया जाता है. इस पूरे नेटवर्क का नाम जुड़ता है चेन झी से, एक अमेरिकी एजेंसियों द्वारा अभियुक्त टाइकून जिसकी गिरफ्तारी 6 जनवरी को हुई. ये गिरफ्तारी दक्षिण-पूर्व एशिया में फैले स्कैम अड्डों के खिलाफ कई देशों की संयुक्त कार्रवाई का दुर्लभ उदाहरण मानी जा रही है.

चेन झी के प्रत्यर्पण की घोषणा बुधवार देर रात कंबोडिया ने की. कंबोडिया ही ‘प्रिंस ग्रुप’ कारोबार का मुख्य आधार रहा है. कंबोडिया के गृह मंत्रालय के मुताबिक ये कार्रवाई चीन के साथ महीनों चली ट्रांसनेशनल क्राइम जांच के बाद की गई.

बीते कुछ सालों में म्यांमार, कंबोडिया और लाओस ऐसे ट्रांसनेशनल क्राइम सिंडिकेट्स के सुरक्षित ठिकाने बन गए हैं, जो स्कैम सेंटर्स चला रहे हैं. हालांकि समय-समय पर कार्रवाई की कोशिशें हुई हैं, लेकिन इंडिया टुडे द्वारा देखी गई सैटेलाइट तस्वीरें दिखाती हैं कि 2021 में म्यांमार में सैन्य तख्तापलट के बाद थाई-म्यांमार सीमा पर चल रहे ऐसे सेंटर्स की संख्या और आकार दोनों तेजी से बढ़े हैं. 

रिपोर्ट्स के मुताबिक, म्यांमार-थाईलैंड बॉर्डर पर कार्रवाई होते ही कई स्कैम सेंटर पूर्व की ओर कंबोडिया में शिफ्ट हो जाते हैं.

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इन स्कैम कंपाउंड्स में कड़ी सुरक्षा होती है, बड़े-बड़े गेट, प्राइवेट गार्ड्स से भरे चेक पोस्ट, बड़े-बड़े कुत्ते, सलाखों वाली खिड़कियां, अंदर की ओर लगे सीसीटीवी कैमरे और कांटेदार तारों की बाड़. ये इंतज़ाम बाहर वालों को रोकने के लिए कम और अंदर काम कर रहे लोगों को भागने से रोकने के लिए ज़्यादा किए जाते हैं.

चेन झी की गिरफ्तारी के बाद क्या बदलेगा, यह अभी साफ नहीं है. लेकिन सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में जबरन काम कराए गए लोग अपने-अपने देशों के दूतावासों के बाहर कतार में खड़े दिख रहे हैं, ताकि उन्हें वापस भेजा जा सके. चीन के विदेश मंत्रालय ने भी कहा है कि सीमा-पार टेलीकॉम फ्रॉड के खिलाफ देश मिलकर काम कर रहे हैं.

इंडिया टुडे द्वारा देखी गई सैटेलाइट तस्वीरों के मुताबिक, म्यांमार-थाईलैंड सीमा पर स्थित केके पार्क, जो एक बड़ा स्कैम हब है. अब करीब 2.1 वर्ग किलोमीटर में फैला एक किलेबंद परिसर बन चुका है. इसी तरह ताई चांग, जियाओके कॉम्प्लेक्स और श्वे कोक्को जैसे स्कैम सेंटर्स का भी 2021 के बाद जबरदस्त विस्तार हुआ है.

किस तरह के स्कैम चलाए जाते है

हर साल लाखों भारतीय डिजिटल अरेस्ट, वॉयस फिशिंग और अन्य ऑनलाइन ठगी के शिकार होते हैं. इन में से ज्यादातर स्कैम्स की जड़ें दक्षिण-पूर्व एशिया में हैं, जो अब इन आपराधिक सिंडिकेट्स का केंद्र बन चुका है, खासकर दूरदराज़ और संघर्षग्रस्त इलाकों में.

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एमनेस्टी इंटरनेशनल और पश्चिमी मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये सेंटर मुख्य तौर पर दो बड़ी कैटेगरी में आने वाले छह तरह के स्कैम चलाते हैं. इनमें पहली कैटेगरी  SIM-बॉक्स स्कैम और दूसरी पिग-बुचरिंग स्कैम है. 

SIM-बॉक्स स्कैम क्या है?

SIM-बॉक्स स्कैम में अंतरराष्ट्रीय कॉल को लोकल कॉल की तरह दिखाया जाता है. इसके लिए खास मशीनें जैसे SIM बॉक्स या SIM बैंक इस्तेमाल की जाती हैं, जिनमें सैकड़ों अवैध प्रीपेड SIM कार्ड लगे होते हैं. इससे असली टेलीकॉम नेटवर्क को बायपास कर दिया जाता है.

नतीजा ये होता है कि कॉल लोकल नंबर से आती दिखती है, जबकि असल में वो विदेश से होती है. इसी तकनीक का इस्तेमाल डिजिटल अरेस्ट, फर्जी पुलिस या बैंक कॉल, और ‘नो-शो फ्रॉड’ जैसे स्कैम में किया जाता है जहां पैसा लेकर ठग गायब हो जाते हैं.

उदाहरण के तौर पर, कंबोडिया में बैठा कोई स्कैमर इंटरनेट कॉल से भारत के किसी नंबर पर फोन करता है. कॉल SIM बॉक्स से होकर गुजरती है, जिसमें भारतीय SIM लगी होती है. पीड़ित के फोन पर लोकल भारतीय नंबर दिखता है, जिससे फर्जी पुलिस या बैंक कॉल असली लगने लगती है.

पिग-बुचरिंग स्कैम

कंबोडिया से जुड़े कई कॉल सेंटर्स लंबे समय तक चलने वाले स्कैम करते हैं, जिन्हें पिग-बुचरिंग कहा जाता है. ये नाम उस तरीके से आया है, जिसमें सूअर को लंबे समय तक खिलाकर मोटा किया जाता है और फिर काटा जाता है. इसी तरह स्कैमर सोशल मीडिया के जरिए लंबे समय तक रिश्ता बनाते हैं. ये कई बार रोमांटिक रिश्ते भी बना लेते हैं और फिर धीरे-धीरे ब्लैकमेलिंग, सेक्सटॉर्शन और आर्थिक शोषण शुरू करते हैं.

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