कोरोना के बाद अधिक से अधिक भारतीय छात्र विदेश में पढ़ाई को तरजीह दे रहे हैं. सरकार ने शुक्रवार को संसद में पूछे गए सवाल के जवाब में बताया कि मौजूदा समय में 12 लाख भारतीय छात्र विदेश में पढ़ाई कर रहे हैं. इस तरह बीते पांच साल में विदेश जाकर पढ़ाई करने वाले भारतीय छात्रों की संख्या सबसे अधिक है.
इन आंकड़ों से पता चलता है कि कोरोना के बाद विदेश में पढ़ाई करने वाले भारतीय छात्रों की संख्या बढ़ी है. विदेश मंत्रालय के तहत इमिग्रेशन ब्यूरो की ओर से शेयर किए गए डेटा के मुताबिक असल में 2022 में विदेश में पढ़ाई करने के लिए 7.50 लाख से अधिक भारतीय छात्रों ने पढ़ाई के लिए विदेश का रुख किया. इस हिसाब से हर दिन औसतन 2,055 छात्र विदेश गए.
यह आंकड़ा 2017 की तुलना में कहीं अधिक है. 2017 में 4.54 लाख से अधिक छात्र पढ़ाई के लिए विदेश गए थे. हालांकि, 2018 में यह संख्या लगभग एक लाख बढ़ गई थी. 2018 में 5.18 लाख से अधिक छात्र पढ़ाई के लिए विदेश गए थे. 2019 में यह आंकड़ा फिर बढ़ा. इस दौरान 5.86 लाख से अधिक छात्रों ने पढ़ाई के लिए विदेश का रुख किया था.
लेकिन 2020 में कोरोना की वजह से वैश्विक स्तर पर यूनिवर्सिटीज के बंद होने के कारण 2.59 लाख से कुछ अधिक छात्र ही पढ़ने के लिए विदेश जा सके. 2021 में 4.44 लाख से अधिक छात्रों ने विदेश का रुख किया. इनमें मेडिकल स्टडीज सहित विभिन्न शैक्षणिक क्षेत्रों के छात्र शामिल रहे.
रूस यूक्रेन युद्ध से पहले यूक्रेन में पढ़ाई कर रहे भारतीय मेडिकल छात्रों को लेकर भी सवाल पूछे गए, जिसके जवाब में सरकार ने कहा कि एनएमसी ने पब्लिक नोटिस जारी किए थे, जिसमें यूक्रेन की ओर से उपलब्ध कराए गए अकेडमिक मॉबिलिटी प्रोग्राम पर किसी तरह की आपत्ति नहीं जताई गई थी. यानी ये भारतीय छात्र पब्लिक नोटिस में बताए गए 29 देशों में से किसी भी देश की यूनिवर्सिटी में अस्थाई तौर पर रिलोकेट हो सकेंगे.
सरकार ने सदन में बताया कि कुल 3964 भारतीय मेडिकल छात्रों को अकेडमिक ट्रांसफर प्रोग्राम के तहत दाखिला मिला था. सरकार ने संसद में बताया कि लगभग 170 छात्रों ने अकेडमिक मॉबिलिटी प्रोग्राम के तहत दाखिला लिया.