भारतीय रेलवे ने किसानों के हित में एक ऐतिहासिक फैसला लिया है. रेलवे ने 2 साल पहले किसान आंदोलन के दौरान हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान रेलवे द्वारा दर्ज किए गए मुकदमों को वापस लेने का की बात कही है.
गौरतलब है कि केन्द्र सरकार द्वारा पारित किसान बिल के विरोध में 24 सितंबर, 2020 से लेकर 12 दिसंबर, 2021 तक उक्त बिल के विरोध में प्रदर्शन करते हुए पूर्व मध्य रेल के भिन्न-भिन्न भागों में रेलवे ट्रैक व रेल परिक्षेत्र में धरना-प्रदर्शन कर रेल के सामान्य आवागमन में व्यवधान पहुंचाया गया था. जिसके बाद आंदोलन के कार्यकर्ताओं पर केस दर्ज किए गए थे.
पूर्व मध्य रेल के पांचों मंडलों क्रमशः धनबाद, पंडित दीन दयाल उपाध्याय मंडल, सोनपुर, दानापुर और समस्तीपुर में भिन्न-भिन्न संगठनों द्वारा बिल के विरोध में प्रदर्शन करते हुए पूर्व मध्य रेल के भिन्न-भिन्न भागों में रेलवे ट्रैक व रेल परिक्षेत्र में धरना-प्रदर्शन कर रेल के सामान्य आवागमन में व्यवधान पहुंचाया गया था. जिसपर कार्यवाही करते हुए रेलवे द्वारा प्रभावित जगहों पर किसान आंदोलन के कार्यकत्ताओं पर रेलवे एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत कुल 34 मामले दर्ज किये गये थे. इसमें 24 मामले अब तक विभिन्न न्यायालयों में सुनवाई के लिए विचाराधीन थे, जिसे रेलवे ने वापस लेने का फैसला किया है.
इस संदर्भ में जानकारी देते हुए पूर्व मध्य रेल के सीपीआरओ बीरेंद्र कुमार ने बताया कि रेल मंत्रालय ने ऐतिहासिक फैसला लेते हुए कृषि कानून के विरोध में दर्ज मामलों, जो न्यायालयों में सुनवाई के लिए विचाराधीन हैं, उन सभी मामलों को बिन देरी करते हुए वापस लेने का आदेश जारी किया है. इसके अनुपालन में रेलवे सुरक्षा बल, पूर्व मध्य रेल, हाजीपुर द्वारा न्यायालयों में लंबित मामलों को वापस लेने के लिए प्रक्रिया तेज कर दी गई है.