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भारत ने की JK पर UNHRC आयुक्त के बयान की निंदा, कहा- 'हमेशा संविधान के सिद्धांतों का पालन किया'

जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि, इंद्रमणि पांडे ने कहा, हमें खेद है कि उच्चायुक्त ने अपने मौखिक अद्यतन में केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर की स्थिति का संदर्भ दिया. भारत सरकार द्वारा कश्मीर के लोगों और क्षेत्र को बेहतर बनाने के लिए यह कदम उठाया गया था.

पिछले साल से कश्मीर में आतंकी घटनाओं में कमी आई (फाइल-पीटीआई) पिछले साल से कश्मीर में आतंकी घटनाओं में कमी आई (फाइल-पीटीआई)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • सैकड़ों लोगों को अवैध तरीके से हिरासत में लिया गयाः UNHRC
  • मिशेल ने अनावश्यक हिरासत में लिए जाने पर सवाल उठाए थे
  • भारतः लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए कदम उठाया गया

भारत ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के 45वें सत्र में अपने भाषण के दौरान संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बाचेलेट द्वारा जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर की गई टिप्पणी पर खेद व्यक्त किया और निराशा जताई. भारत ने कहा कि दुनिया के 'सबसे बड़े' लोकतंत्र के रूप में, भारत ने हमेशा संविधान के सिद्धांतों का पालन किया है और 'संवाद' के लिए माहौल तैयार किया है.

जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि, इंद्रमणि पांडे ने कहा, "हमें खेद है कि उच्चायुक्त ने अपने मौखिक अद्यतन में केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर की स्थिति का संदर्भ दिया." उन्होंने आगे कहा कि जम्मू-कश्मीर में भारत सरकार द्वारा लोगों और क्षेत्र के जीवन को बेहतर बनाने के लिए यह कदम उठाया गया था.

बेहतरी के लिए लिया गया फैसला

इस संदर्भ में उन्होंने कहा, "मैं यह रेखांकित करना चाहूंगा कि अगस्त 2019 में बदलाव के बाद से केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में लोग भारत के अन्य हिस्सों में लोगों के समान मौलिक अधिकारों का आनंद ले रहे हैं. हम कोरोना संकट और एक देश द्वारा आतंकवादियों की घुसपैठ कराने की नापाक कोशिशों के बावजूद हम जमीनी लोकतंत्र को पुनर्जीवित करने और सामाजिक और आर्थिक विकास को एक नई गति प्रदान करने में सक्षम हैं."

इससे पहले सोमवार को मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल ने कश्मीर और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) की स्थिति के बारे में चिंता जताई थी. राजनीतिक कैदियों को रिहा करने और इंटरनेट कनेक्टिविटी बहाल करने के भारत सरकार के हालिया कदम का स्वागत करते हुए, उन्होंने "अनावश्यक हिरासत में लिए जाने" और केंद्र शासित प्रदेश के कई हिस्सों में प्रतिबंध जारी रखे जाने पर सवाल उठाया था.

अवैध हिरासत पर सवाल

उन्होंने अपने शुरुआती बयान में कहा, "जब मैं कुछ राजनीतिक और सामुदायिक नेताओं की रिहाई का स्वागत करती हूं, तो सैकड़ों ऐसे लोग जो अवैध तरीके से हिरासत में हैं, कई बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाएं अभी भी लंबित हैं जिनमें जम्मू-कश्मीर के कई राजनीतिक नेता शामिल हैं."

उन्होंने कहा, "मैं दूरदराज के क्षेत्रों में सेवाओं का विस्तार करने की पहल का स्वागत करती हूं, और हाल ही में दो जिलों में पूर्ण इंटरनेट कनेक्टिविटी की सशर्त बहाली जिसे जम्मू-कश्मीर के बाकी हिस्सों में भी तुरंत लागू किया जाना चाहिए."

दूसरी ओर, सीमा के दूसरी तरफ की स्थिति पर पाकिस्तान की भी आलोचना करते हुए उन्होंने कहा, "पाकिस्तान की तरफ, लोगों के पास सीमित इंटरनेट का उपयोग है, जिससे शिक्षा और अन्य महत्वपूर्ण सेवाओं तक पहुंचने में कठिनाई पैदा हो रही है. मैं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संघ के अधिकारों के लिए जारी प्रतिबंधों को लेकर चिंतित हूं."

उन्होंने अपने भाषण में भारत में जम्मू-कश्मीर में 'राजनीतिक बहस' की जगह पेलेट गन के कथित इस्तेमाल पर 'गहरी चिंता' जताई. उन्होंने कहा कि नागरिकों के खिलाफ सैन्य और पुलिस हिंसा की घटनाएं जारी हैं, जिसमें पेलेट गन का उपयोग, साथ ही साथ आतंकवाद से संबंधित घटनाएं भी शामिल हैं.

भारत मानव अधिकारों का प्रबल समर्थक

इस बीच, भारतीय दूत ने संयुक्त राष्ट्र में जोर देते हुए कहा कि दुनिया के "सबसे बड़े" लोकतंत्र के रूप में, भारत ने हमेशा संविधान के सिद्धांतों का पालन किया है और "संवाद" के लिए माहौल बनाया है.

राजदूत इंद्रमणि पांडे ने कहा कि सबसे बड़े और सबसे खुले लोकतंत्र के रूप में, भारत आजादी के बाद से, मानव अधिकारों का एक प्रबल समर्थक है, जिसे हमने मौलिक अधिकारों के रूप में अपने संविधान में शामिल किया है. हमने इन अधिकारों को बढ़ावा देने और उनकी सुरक्षा के लिए बातचीत और सहयोग के लिए एक अंतरराष्ट्रीय माहौल बनाने के लिए भी प्रयास किया है. उन्होंने कहा कि भारत सभी मानवाधिकारों को कायम रखने के लिए प्रतिबद्ध है.

मोदी सरकार की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए, सामाजिक-आर्थिक विकास के बड़े मुद्दे और भारतीयों के बेहतर जीवन स्तर के लिए नीतियों को सुनिश्चित करने को लेकर उन्होंने कहा कि भारत में पिछले सात दशकों में राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक परिवर्तन हुए हैं. एक लोकतांत्रिक वातावरण में, जो दुनिया में अभूतपूर्व है. हम अपने लोगों के मानवाधिकारों को बढ़ावा देने और उनकी रक्षा करते हुए इस यात्रा को जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

इस बीच गृह मंत्रालय ने आज लोकसभा में बताया कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म कर विशेष राज्य का दर्जा समाप्त किए जाने के बाद यहां पर आतंकी घटनाओं में कमी आई है. गृह मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक पिछले एक साल के दौरान जम्मू-कश्मीर में आतंकी हमलों में खासी कमी आई है.

गृह मंत्रालय के अनुसार 5 अगस्त 2019 से पहले 29 जून 2018 से लेकर 4 अगस्त 2019 के बीच यानी 402 दिनों में कुल 455 आतंकी वारदात हुए. इस तरह से देखा जाए तो औसतन एक आतंकी हमला रोजाना हुआ करता था. पिछले साल 5 अगस्त को केंद्र सरकार ने अप्रत्याशित फैसला लेते हुए अनुच्छेद 370 खत्म कर विशेष राज्य का दर्जा खत्म कर दिया था.

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