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सीमा पर क्या है चीन की स्थिति? मोदी सरकार की तरफ से अब तक सामने आए ये बयान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी चीन की स्थिति को लेकर बयान दे चुके हैं. गलवान घाटी में हिंसक झड़प के बाद चीन के मसले पर पीएम मोदी ने सर्वदलीय बैठक की. बैठक के बाद पीएम मोदी ने कहा कि न वहां कोई हमारी सीमा में घुसा हुआ है, न ही हमारी कोई पोस्ट किसी दूसरे के कब्जे में है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो- पीटीआई) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो- पीटीआई)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • भारत और चीन के बीच तनाव जारी
  • जून में सेना के बीच हुई थी झड़प
  • कई बार हुई दोनों देशों के बीच बात

भारत और चीन के बीच लगातार तनाव बना हुआ है. पिछले कुछ महीनों से भारत और चीन के बीच तनाव में इजाफा भी देखने को मिला है. कई बार चीन ने भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ की कोशिशों को भी अंजाम दिया है. वहीं चीन मसले पर केंद्र सरकार ने भी अलग-अलग मौकों पर स्थिति को लेकर बयान दिया है.

इस साल जून के महीने में भारत और चीन की सेना के बीच हिंसक झड़प देखने को मिली थी. इस झड़प में भारतीय सेना के 20 जवान शहीद हो गए थे. जिसके बाद देश में चीन के खिलाफ माहौल भी देखा गया. वहीं इस घटनाक्रम के बाद भी चीन बाज नहीं आया और 29-30 अगस्त को एक बार फिर भारतीय सीमा में घुसपैठ की कोशिश की. वहीं चीन के साथ मौजूदा हालात को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर केंद्र सरकार के कई मंत्रियों के बयान भी सामने आ चुके हैं. जिनमें चीन की स्थिति को लेकर जानकारी दी गई.

'सैनिक टुकड़ियां और गोला बारूद इकट्ठा किया'

ताजा बयान में राजनाथ सिंह का बयान शामिल है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संसद के मानसून सत्र में लोकसभा में चीन से जारी विवाद पर बयान दिया. राजनाथ सिंह ने बताया कि अभी की स्थिति के मुताबिक चीन ने एलएसी और अंदरूनी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में सैनिक टुकड़ियां और गोला बारूद इकट्ठा किया है. पूर्वी लद्दाख और गोगरा, कोंगला का और पैंगोंग लेक के उत्तरी और दक्षिणी किनारे पर हालात तनावपूर्ण हैं.

राजनाथ सिंह ने कहा कि चीन ने 1993 के समझौते का उल्लंघन किया है और भारत ने इसका पालन किया है. चीन के कारण समय-समय पर झड़प की स्थिति पैदा हुई है. इस वक्त चीन ने सीमा पर बड़ी संख्या में हथियारों का जमावड़ा किया है, लेकिन हमारी सेना जवाब देने में सक्षम है.

रक्षा मंत्री ने बताया कि इस साल अप्रैल के महीने में ईस्टर्न लद्दाख की सीमा पर चीन ने अपने सैनिकों की संख्या और हथियारों को बढ़ाया. मई के महीने में चीन ने हमारे सैनिकों की पेट्रोलिंग में व्यवधान पैदा किया. मई में ही चीन ने वेस्टर्न सेक्टर में घुसपैठ की कोशिश की. इसके बाद 15 जून को भारत और चीन की सेना के बीच गलवान घाटी में हिंसा देखी गई. इसके बाद चीन से कई बार बातचीत भी हुई लेकिन इसके बावजूद 29-30 अगस्त को पैंगोंग में चीन ने घुसपैठ की कोशिश की.

'न कोई सीमा में घुसा, न हमारी पोस्ट किसी के कब्जे में'

जून की हिंसक झड़प के कुछ दिन बाद ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी चीन की स्थिति को लेकर बयान दे चुके हैं. गलवान घाटी में हिंसक झड़प के बाद चीन के मसले पर पीएम मोदी ने सर्वदलीय बैठक की. बैठक के बाद पीएम मोदी ने कहा कि न वहां कोई हमारी सीमा में घुसा हुआ है, न ही हमारी कोई पोस्ट किसी दूसरे के कब्जे में है. पीएम मोदी ने कहा था कि हमारी सेनाएं, सीमाओं की रक्षा करने में पूरी तरह सक्षम हैं. डेवलपमेंट हो, एक्शन हो, काउंटर एक्शन हो, जल-थल-नभ में हमारी सेनाओं को देश की रक्षा के लिए जो करना है, वो कर रही है. हमारे पास ये क्षमता है कि कोई भी हमारी एक इंच जमीन की तरफ आंख उठाकर भी नहीं देख सकता.

'1962 के बाद सबसे गंभीर स्थिति'

वहीं विदेश मंत्री एस. जयशंकर चीन विवाद के बीच लद्दाख की स्थिति को 1962 के बाद से सबसे गंभीर करार दे चुके हैं. जयशंकर ने एक इंटरव्यू में कहा था कि निश्चित रूप से ये 1962 के बाद की सबसे गंभीर स्थिति है. पिछले 45 सालों में सीमा पर पहली बार हमारे सैनिकों की मौत हुई है. एलएसी पर दोनों पक्षों की तरफ से बड़ी संख्या में सैनिकों की तैनाती है जोकि अप्रत्याशित है. लद्दाख में भारत के रुख को साफ करते हुए विदेश मंत्री ने कहा था कि चीन के साथ सीमा विवाद के समाधान में यथास्थिति में एकतरफा बदलाव नहीं होना चाहिए. समाधान में हर समझौते का सम्मान होना चाहिए.

'भारत के पास सैन्य विकल्प मौजूद'

इसके अलावा चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत ने चीन विवाद को लेकर कहा था कि भारत के पास सैन्य विकल्प मौजूद है. उन्होंने कहा था कि चीन के साथ अगर बातचीत फेल हुई तो भारत के पास सैन्य विकल्प मौजूद है. पूर्वी लद्दाख में चीनी पीपल्स लिबरेशन आर्मी के जरिए किए गए अतिक्रमण से निपटने के लिए भारत के पास सैन्य विकल्प मौजूद है, लेकिन इसका इस्तेमाल तभी किया जाएगा, जब दोनों देशों की सेनाओं के बीच बातचीत और राजनयिक विकल्प निष्फल साबित हो जाएंगे.

बिपिन रावत ने कहा था, 'वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर अतिक्रमण या सीमा-उल्लंघन उस क्षेत्र की अलग-अलग समझ होने पर होता है. डिफेंस को जिम्मेदारी दी जाती है कि वो एलएसी की निगरानी करे और घुसपैठ को रोकने के लिए अभियान चलाए. किसी भी ऐसी गतिविधि को शांतिपूर्वक हल करने और घुसपैठ को रोकने के लिए सरकार के संपूर्ण दृष्टिकोण को अपनाया जाता है. लेकिन सीमा पर यथास्थिति बहाल करने में सफलता नहीं मिलती तो फौज सैन्य कार्यवाही के लिए हमेशा तैयार रहती है.'

'चीन का दावा गलत'

इसके अलावा विदेश मंत्रालय कह चुका है कि गलवान घाटी पर स्थिति ऐतिहासिक रूप से स्पष्ट है. चीन मई 2020 से ही भारत की पेट्रोलिंग में रोड़ा अटकाने की कोशिश कर रहा है. एलएसी पर चीन का दावा स्वीकार नहीं है. विदेश मंत्रालय ने कहा था कि भारत-चीन सीमा पर गलवान घाटी समेत सभी इलाकों की लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल से भारतीय सेना परिचित है. भारतीय सेना हर जगह एलएसी का पूरा पालन करती है. भारत ने एलएसी के पार कभी एक्शन नहीं लिया है और गलवान घाटी को लेकर चीन का दावा सरासर गलत है. भारत ने अपनी सीमा के भीतर ही सभी निर्माण कार्य किया है.

रक्षा मंत्रालय ने हटाई थी रिपोर्ट

वहीं भारतीय रक्षा मंत्रालय ने पहली बार चीनी घुसपैठ को अतिक्रमण (transgression) के रूप में स्वीकारते हुए आधिकारिक रूप से जानकारी अपनी वेबसाइट पर डाली थी. हालांकि राजनीतिक स्तर पर विवाद बढ़ने के बाद वेबसाइट से इस रिपोर्ट को हटा लिया गया था. रक्षा मंत्रालय की वेबसाइट पर अपलोड किए गए दस्तावेज में लिखा गया था कि चीनी पक्ष ने 17-18 मई को कुंगरांग नाला (पेट्रोलिंग प्वाइंट (पीपी) 15 के पास, हॉट स्प्रिंग्स के उत्तर में), गोगरा (पीपी -17 ए) और पैंगोंग त्सो के उत्तरी किनारे के क्षेत्रों में अतिक्रमण किया. 5 मई के बाद से ही गलवान घाटी में तनाव बढ़ा हुआ है.

 

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