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हाथरस कांडः पीड़िता की मां बोली- दलित की बेटी है तो ऐसे मामला दबाएंगे डीएम-एसपी?

उत्तर प्रदेश के हाथरस में दरिंदगी का शिकार हुई निर्भया के लिए पूरे देश में आवाज उठ रही है. यूपी सरकार ने इस केस की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया है.

हाथरस घटना को लेकर देश में है गुस्सा हाथरस घटना को लेकर देश में है गुस्सा
स्टोरी हाइलाइट्स
  • हाथरस रेप कांड को लेकर देश में गुस्सा
  • परिवार ने अधिकारियों पर लगाया मामला दबाने का आरोप

उत्तर प्रदेश के हाथरस में गैंगरेप की घटना के बाद आक्रोश है. बीती रात पुलिस ने जबरन पीड़िता का अंतिम संस्कार कर दिया, जिसपर परिवारवालों और गांववालों ने गुस्सा जताया है. अब बुधवार को स्थानीय सांसद राजवीर सिंह दिलेर परिवार को सांत्वना देने पहुंचे. लेकिन यहां पीड़िता की मां का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने डीएम-एसपी पर आरोप लगाए.

बुधवार को पीड़िता की मां ने कहा कि हमें हमारी बच्ची का चेहरा नहीं दिखाया गया. उन्होंने कहा कि डीएम और एसपी साहब आए थे, वो कह रहे हैं कि बेटी की हड्डी नहीं टूटी और उसे चोट नहीं लगी है. ये झूठ बोल रहे हैं और हर मसले पर गलत बयान दे रहे हैं.

पीड़िता की मां ने कहा कि क्या अगर उनकी बेटी के साथ ऐसा होगा तो वो बर्दाश्त करेंगे, अब दलित की बेटी है तो फिर इस तरह मामले को दबा रहे हैं. 

यहां पहुंचे स्थानीय सांसद ने कहा कि हम परिवार के साथ हैं. हमें भी यहां पर आने नहीं दिया जा रहा था, क्योंकि मामला गंभीर है. हम परिवार के साथ हैं और दोषियों पर कार्रवाई होगी. 

हाथरस में लगातार पनप रहा है रोष

बुधवार को हाथरस के कुछ इलाकों में इस पूरी घटना को लेकर तनाव भी हुआ. कई ग्रामीणों और राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं ने प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया, दुकानों को जबरन बंद करवाया गया. पुलिस ने बाद में भीड़ पर काबू पाया. देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी हाथरस की निर्भया के लिए कैंपेन चलाया जा रहा है. 

यूपी सरकार ने किया एसआईटी का गठन 
गौरतलब है कि 19 साल की दलित युवती के साथ 14 सितंबर को गैंगरेप हुआ था. लेकिन बीते दिन दिल्ली में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. इसी के बाद हाथरस पुलिस ने देर रात को आनन-फानन में युवती का अंतिम संस्कार कर दिया. परिवार का आरोप है कि उन्हें बेटी का चेहरा देखने नहीं दिया गया और उनकी गैरमौजूदगी में जबरदस्ती ही अंतिम संस्कार कर दिया गया.

इस मामले को लेकर देशभर में गुस्सा है, लगातार हो रही आलोचना के बीच यूपी सरकार ने अब एक एसआईटी का गठन किया है. एसआईटी को सात दिन में पूरे केस की रिपोर्ट देनी होगी. खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मसले पर राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बात की है.


 

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