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भारतीय सेना ने चीनी सैनिक लौटा दिखाई थी दरियादिली, क्या लद्दाख में पिघलेगी 'बर्फ'?

भारत और चीन की सेनाओं के बीच पूर्वी लद्दाख में बीते आठ महीनों से जारी गतिरोध खत्म नहीं हुआ है. लेकिन भारतीय सेना के हाल के पेशेवर रुख और दरियादिली के चलते दोनों पक्षों में कम से कम संवाद और हॉटलाइन वार्ता में एक नरमी देखने को जरूर मिली है.

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भारत-चीन में गतिरोध जारी (फाइल फोटो-AFP)
भारत-चीन में गतिरोध जारी (फाइल फोटो-AFP)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • सेना ने सौंप दिए थे चीनी सैनिक
  • भारत की तरफ आ गया था चीनी जवान
  • भारतीय सेना के रुख का चीन ने की सराहना

भारत और चीन की सेनाओं के बीच पूर्वी लद्दाख में बीते आठ महीनों से जारी गतिरोध खत्म नहीं हुआ है. लेकिन भारतीय सेना के हाल के पेशेवर रुख और दरियादिली के चलते दोनों पक्षों में कम से कम संवाद और हॉटलाइन वार्ता में एक नरमी देखने को जरूर मिली है. 

इंडिया टुडे ने 9 जनवरी को सबसे पहले लद्दाख के चुशुल सेक्टर में गुरूंग हिल के पास से एक चीनी सैनिक के भारतीय सैनिकों द्वारा पकड़े जाने की घटना को सबसे पहले रिपोर्ट की थी. लद्दाख में जहां से चीनी जवान को पकड़ा गया था वो इलाका सबसे तनाव वाला माना जाता है. 

पकड़े गए चीनी सैनिक की पहचान 56 आर्मी फाइटिंग सपोर्ट बटालियन के लांस कॉर्पोरल झोंग यू जी के रूप में की गई. चीनी सेना का यह जवान कन्युनिकेशन लाइन्स की मरम्मत करने के दौरान अंधेरे में गलती से भारत की तरफ चला आया था, और भारतीय सेना के गश्ती दल ने उसे पकड़ लिया था. चीनी जवान को वहां से पकड़ा गया था जहां सीमा पर दोनों पक्षों की सेना महज कुछ मीटर की दूरी पर आमने-सामने तैनात थीं. इससे दोनों पक्षों में तनाव बढ़ सकता था.

लेकिन इन तमाम आशंकाओं के उलट चीनी सैनिक को पकड़ने की घटना को तनाव कम करने वाले कदम के रूप में इस्तेमाल किया गया, और भारतीय सेना लद्दाख में तैनात पीएलए पोस्ट से संवाद जारी रखा. औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद पीएलए सैनिक को 11 जनवरी को चीन को सौंप दिया गया. यह वही स्थान था, जहां कुछ महीने पहले फायरिंग की घटना हुई थी. चीनी सेना को सौंपे जाने की घटना हैरान करने वाली थी. उन्हें (चीन) इसे लंबा खींचने की उम्मीद थी.  

इंडिया टुडे को पता चला है कि 11 जनवरी के बाद से चीन के साथ सभी स्तरों पर हुए करीब सभी संवादों के दौरान सबसे तनाव वाले क्षेत्र में भारतीय सेना के पेशेवर रुख दिखाने की सराहना की गई. एक सूत्र ने बताया, 'हम ग्राउंड पर निश्चित रूप से ऐसी चीजों को काउंट नहीं करते हैं. लेकिन चीनियों ने इसे वास्तव में माना, जो उनके हावभाव में दिखा. कठिन परिस्थितियों में भारतीय सेना के इस कदम, नैतिक मूल्यों से वो आश्चर्यचकित हैं. उन्होंने इसके लिए आभार जताया है.'  

पीएलए सैनिक को चीन को तुरंत सौंपे जाने के कदम को विशेष रूप से सकारात्मक नजर से देखा जा रहा है. भारतीय सेना के नेतृत्व ने चीनी सैनिक के सौंपे जाने पर जोर दिया था. कम से कम एक इंटेलिजेंस एजेंसी हालात को सामान्य बनाने के लिए भारतीय सेना के इस कदम के बाद से वेट एंड वॉच के तौर पर स्थिति का आकलन करना चाहती थी. 

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असल में, इस मसले पर दिल्ली में 14 कोर कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल पीजीके मेनन और दिल्ली में सैन्य नेतृत्व के बीच मीटिंग हुई थी जिसमें चीनी सैनिक को जल्दी से जल्दी सौंपे जाने का फैसला लिया गया था. चीनी जवान को 11 जनवरी को मोल्डो क्रॉसिंग पॉइंट पर सौंप दिया गया था. सेना ने इस मौके को नहीं गंवाया और सेना के इस पेशेवर रुख को सद्भावना के तौर पर देखा, बताया गया. 

आपको याद होगा कि पिछले साल अक्टूबर में इसी तरह की सद्भावना का प्रदर्शन किया गया था, जब पीएलए का एक सैनिक डेमचौक सेक्टर में गलती से भटक गया था. और डेमचौक मामले में भी चीनी सैनिक को फौरन सौंप दिया गया था, हालांकि वो घटना उतनी चर्चित नहीं रही थी क्योंकि इस इलाके में इस तरह का तनाव नहीं है.

लेकिन जनवरी की घटना हर लिहाज से अलग थी, यह देखते हुए कि दक्षिण पैगोंग सेक्टर में सेना की संख्या बढ़ाने के लिए कितना जल्दी वातावरण तैयार हो जाता है. यह भी फैक्ट है कि इस विशेष क्षेत्र में चीन पहले से ही रक्षात्मक मुद्रा में है.
 
भारतीय विश्लेषक चीनी सोशल मीडिया पर लगातार नजर रख रहे हैं और सैनिक को सौंपे जाने की वहां भी सराहना की गई. बहरहाल, खराब मौसम और बर्फबारी के चलते कोर कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल मेनन के नेतृत्व में रविवार 24 जनवरी की वार्ता देर से शुरू हूई. इंडिया टुडे इस बात की पुष्टि कर सकता है कि चीनी पक्ष ने रविवार की वार्ता में एक बार फिर से भारतीय सेना के पेशेवर रुख की सराहना की है.

इंडिया टुडे ने पहले रिपोर्ट की थी कि बातचीत में नरमी से हालांकि ग्राउंड पर तुरंत हालात नहीं बदले हैं. वास्तव में, चीनी सेना ने सितंबर से स्पष्ट रूप से सहमत नहीं होने के बावजूद अपनी स्थिति और सेना की संख्या को कंसोलिडेट किया है. गतिरोध में माइंडगेम और कभी नरम तो कभी गरम की पुरानी रणनीति काम करती है. ग्राउंड पर भारतीय सेना किसी चीज को सरल नजरिये से नहीं देख रही है. वह सतर्क है. लेकिन यह सच है कि पिछले चार महीनों में भारतीय सेना के रुख से चीनी सेना दो बार हैरान रही है. पहला, सितंबर में जब भारतीय सेना पैंगोंग सेक्टर्स में त्वरित एक्शन लिया था, दूसरा इस महीने की शुरुआत में, नैतिकता के लिजाह से यह चीनी सेना के लिए अप्रत्याशित था.
 
भारतीय सेना के पेशेवर रुख के चलते दोनों पक्षों में आई नरमी जमीन पर कितना औचित्यपूर्ण साबित होगी, इसका अभी कोई अंदाजा नहीं लगा सकता है. लेकिन एक गतिरोध जो पिछले कई महीनों से बातचीत के बावजूद जारी है, उसमें इस तरह की घटना जरूर एक उम्मीद पैदा करती है.


 

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