प्राइवेट और सरकारी अस्पतालों में इलाज के बाद मिलने वाले लंबे-चौड़े और उलझे हुए बिलों से अब मरीजों को निजात मिलने वाली है. केंद्र सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र में पारदर्शिता लाने और मरीजों के अधिकारों को मजबूत करने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है. उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रल्हाद जोशी ने राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस के अवसर पर अस्पताल बिलों के लिए एक नया भारतीय मानक 'IS 19493: 2025' जारी किया है.
क्या है नया नियम?
नए नियमों के तहत सभी अस्पतालों, नर्सिंग होम, डायग्नोस्टिक सेंटर और क्लिनिक को मरीजों को डिजिटल और फिजिकल दोनों रूप में बिल देना होगा. बिल में अस्पताल का पूरा विवरण, मरीज की पहचान, इलाज का सार, कुल खर्च और हर मद का अलग-अलग ब्योरा देना अनिवार्य किया गया है. इसमें कमरे का किराया, डॉक्टर की फीस, सर्जरी या अन्य प्रक्रियाएं, जांच, दवाइयां, कंज़्यूमेबल्स और पैकेज शुल्क शामिल होंगे.
मानक के अनुसार, बिल पढ़ने योग्य फॉन्ट में तैयार किया जाएगा ताकि मरीज आसानी से समझ सकें कि किस सेवा के लिए कितना शुल्क लिया गया है. साथ ही टैक्स, बीमा कवरेज, भुगतान का तरीका और अधिकृत हस्ताक्षर जैसी जानकारियां भी बिल में दर्ज करनी होंगी. अस्पतालों की सुविधा के लिए समरी बिल और विस्तृत आइटमाइज्ड बिल के नमूना फॉर्मेट भी तय किए गए हैं.
विवादों और ठगी पर लगेगी लगाम
अधिकारियों का कहना है कि अब तक अलग-अलग अस्पतालों में अलग-अलग ढंग से बिल बनाए जाने के कारण मरीजों को भ्रम और विवाद का सामना करना पड़ता था. कई मामलों में अस्पष्ट बिलिंग मरीजों और अस्पताल प्रबंधन के बीच टकराव की वजह बनती थी. इस स्थिति को सुधारने के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने यह उपभोक्ता-हितैषी ढांचा तैयार किया है.
एक्सपर्ट्स की देखरेख में तैयार हुआ ड्राफ्ट
IS 19493: 2025 का निर्माण BIS की हेल्थ, फिटनेस एंड स्पोर्ट्स सर्विसेज सेक्शनल कमेटी ने किया है. इसमें AIIMS, DGHS, NABH और CII जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों से विचार-विमर्श किया गया. सरकार को उम्मीद है कि इस मानक के लागू होने से अस्पताल बिलिंग से जुड़े विवाद घटेंगे, मरीजों का भरोसा बढ़ेगा और देश की स्वास्थ्य व्यवस्था अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनेगी.