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किसान आंदोलन: पूरे होंगे 'दिल्ली चलो' के एक साल, बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन की तैयारी

संयुक्त किसान मोर्चा यानी एसकेएम ने कहा है कि बीते साल 26-27 नवंबर को दिल्ली चलो के आह्वान से शुरू हुआ था. ऐसे में किसान आंदोलन कल अपने ऐतिहासिक संघर्ष के एक वर्ष पूरा करेगा. हमें इतना लंबा संघर्ष छेड़ना पड़ा, ये सरकार की अपने मेहनतकश नागरिकों के प्रति असंवेदनशीलता और अहंकार एक स्पष्ट प्रतिबिंब है. 

SKM (symbolic image) SKM (symbolic image)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 26-27 नवंबर को 'दिल्ली चलो' के एक साल
  • बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन की तैयारी

हाल ही में केंद्र सरकार ने तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा कर दी है. हालांकि किसान अभी भी सभी मांगों को लेकर सुनिश्चित हो लेने तक आंदोलन को रोकना नहीं चाहते. किसान सरकार के साथ एमएसपी पर चर्चा चाहते हैं. इस बीच संयुक्त किसान मोर्चा यानी एसकेएम ने कहा है कि बीते साल 26-27 नवंबर को दिल्ली चलो के आह्वान से शुरू हुआ था. ऐसे में किसान आंदोलन कल अपने ऐतिहासिक संघर्ष के एक वर्ष पूरा करेगा. हमें  इतना लंबा संघर्ष छेड़ना पड़ा, ये भारत सरकार की अपने मेहनतकश नागरिकों के प्रति असंवेदनशीलता और अहंकार एक स्पष्ट प्रतिबिंब है. 

28 नवंबर को किसान-मजदूर महापंचायत

संगठन ने बताया कि अभूतपूर्व किसान आंदोलन के एक वर्ष को चिह्नित करने के लिए दिल्ली के मोर्चों और राज्यों की राजधानियों और जिला मुख्यालयों पर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन की तैयारी चल रही है.  दिल्ली में विभिन्न मोर्चों पर हजारों किसान पहुंच रहे हैं. उन्होंने बताया कि आज हैदराबाद में महाधरना का आयोजन हुआ और 28 नवंबर को मुंबई के आजाद मैदान में विशाल किसान-मजदूर महापंचायत होगी. महापंचायत का आयोजन संयुक्त शेतकारी कामगार मोर्चा (एसएसकेएम) के संयुक्त बैनर तले 100 से अधिक संगठनों द्वारा किया जाएगा, और इसमें पूरे महाराष्ट्र के किसानों, श्रमिकों और आम नागरिकों की भागीदारी देखी जाएगी. 

जान गंवा चुके 683 किसानों के परिवारों को मिले मुआवजा

एसकेएम ने शहीदों के परिवारों के लिए मुआवजे और पुनर्वास की अपनी मांग दोहराते हुए कहा कि अब तक साल भर के किसान आंदोलन में 683 किसानों ने अपने प्राणों की आहुति दी है, उन्हें मुआवजा मिलना चाहिए. उन्होंने बताया कि दुनिया के स्तर पर इतिहास में सबसे बड़े और लम्बे विरोध आंदोलनों में से एक, इस किसान आंदोलन में बारह महीनों के दौरान, करोड़ों लोगों ने भाग लिया, जो भारत के हर राज्य, हर जिले और हर गांव तक पहुंचा.

उन्होंने कहा कि तीन किसान-विरोधी कानूनों को निरस्त करने के सरकार के निर्णय और कैबिनेट की मंजूरी के अलावा, किसान आंदोलन ने किसानों, आम नागरिकों और देश के लिए कई तरह की जीत हासिल की. आंदोलन ने क्षेत्रीय, धार्मिक या जातिगत विभाजनों को खत्म करते हुए किसानों के लिए एकीकृत पहचान की भावना भी पैदा की. 

'किसान-विरोधी कानूनों का निरस्त होना पहली जीत'

संगठन ने कहा कि एसकेएम इस आंदोलन के सभी प्रतिभागियों और समर्थकों के प्रति अपनी गहरा आभार व्यक्त करता है, और एक बार फिर दोहराता है कि तीन किसान-विरोधी कानूनों को निरस्त करनाआंदोलन की सिर्फ पहली बड़ी जीत है. एसकेएम प्रदर्शनकारी किसानों की बाकी जायज मांगों को पूरा किए जाने का इंतजार कर रहा है.

किसानों के पक्ष में आए कई राजनीतिक संगठन 

उन्होंने कहा कि आज हैदराबाद में एक महाधरना आयोजित किया गया, जिसमें तेलंगाना के किसानों ने बड़े पैमाने पर भाग लिया. उपस्थित लोगों ने सभी कृषि उत्पादों पर एमएसपी के कानूनी अधिकार, बिजली संशोधन विधेयक को वापस लेने, किसानों को दिल्ली की वायु गुणवत्ता से संबंधित कानूनी विनियमन के दंडात्मक प्रावधानों से बाहर रखने, विरोध करने वाले हजारों किसानों के खिलाफ मामलों को वापस लेने और अजय मिश्रा टेनी की बरखास्तगी और गिरफ्तारी सहित किसान आंदोलन की अभी भी लंबित मांगों को उठाया. कार्यक्रम में किसान आंदोलन के शहीदों की सूची प्रदर्शित की गई और उन्हें श्रद्धांजलि दी गई.

एसकेएम ने कहा कि हमारे 26 नवंबर को विरोध के आह्वान का ट्रेड यूनियनों, नागरिक संगठनों और कई अन्य यूनियनों और संगठनों ने समर्थन किया है. साल भर के संघर्ष में कई राजनीतिक संगठन भी किसानों के पक्ष में खड़े हुए हैं. हम उनके समर्थन के प्रति आभार व्यक्त करता है.

 

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