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कृषि राज्य मंत्री पर बरसा किसान मोर्चा, कहा- आंदोलन के बारे में अपडेट होने की जरुरत

किसान मोर्चा ने कहा कि नई कृषि और किसान कल्याण राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने किसानों के विरोध और 3 केंद्रीय कृषि कानूनों को निरस्त करने की उनकी मांग के बारे में वही धुन गाना शुरू कर दिया है जो उनके पहले के अन्य लोगों ने गाया है.

कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसान (पीटीआई) कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसान (पीटीआई)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 'राज्य मंत्री को किसानों और उनके हितों की कोई चिंता नहीं'
  • क्रूर और असंवेदनशील शब्दों की किसान मोर्चा द्वारा निंदा
  • हरियाणा को झूठे केस वापसी का 24 जुलाई तक अल्टीमेटम

केंद्र के 3 कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले 7 महीने से आंदोलन कर रहे किसानों के संगठन संयुक्त किसान मोर्चा ने केंद्र की नई कृषि और किसान कल्याण राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे से कहा है कि पुरानी धुन गाने से पूर्व खुद पहले किसानों के आंदोलन के बारे में अपडेट करने की जरुरत है.

किसान मोर्चा ने जारी बयान में शनिवार को कहा कि केंद्र सरकार में आई नई कृषि और किसान कल्याण राज्य मंत्री किसानों के विरोध, प्रदर्शन करने वाले किसानों तथा 3 काले कानूनों के बारे में एक ही पुराना धुन गा रही हैं. इस आंदोलन के बारे में खुद को अपडेट करने की जरूरत है. किसान मोर्चा में शामिल बलबीर सिंह राजेवाल, डॉक्टर दर्शन पाल, गुरनाम सिंह चारुनी, हन्नान मुल्ला, जगजीत सिंह दल्लेवाल, जोगिंदर सिंह उगराहन, शिवकुमार शर्मा 'कक्काजी', युद्धवीर सिंह और योगेंद्र यादव की ओर से यह बयान जारी किया गया.

किसान मोर्चा ने कहा कि नई कृषि और किसान कल्याण राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने किसानों के विरोध और 3 केंद्रीय कृषि कानूनों को निरस्त करने की उनकी मांग के बारे में वही धुन गाना शुरू कर दिया है जो उनके पहले के अन्य लोगों ने गाया है. उन्होंने कहा है कि प्रदर्शनकारी किसान नहीं हैं, और यह भी कि किसानों को बेहतर तरीके से कानून के बारे में समझाकर विरोध को खत्म कराया जा सकता है.

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'मंत्री को किसानों के हितों की चिंता नहीं'

मोर्चा ने कहा कि कि यह साफ है कि इससे पहले कि वह कुछ और बयान दें, उन्हें इस आंदोलन को लेकर खुद को अपडेट करने की जरूरत है. वहीं यह भी साफ है कि नरेंद्र मोदी सरकार अपने ईगो गेम में है उसमें सभी मंत्री एक ही धुन गाने को मजबूर होंगे.

ऐसा लगता है कि मंत्री को किसानों और उनके हितों की कोई चिंता नहीं है. 3 काले कानूनों से किसानों को जिस गहरे संकट में डाला गया है, उसे समझने के बजाय, वह अपनी पार्टी की सरकार के कॉर्पोरेट आकाओं की सेवा कर रही हैं. यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कृषि राज्य मंत्री किसानों को राजनीतिक एजेंट और किसानों के लंबे संघर्ष को "राजनीति से प्रेरित" के रूप में देखती हैं. यद्यपि वह एक किसान परिवार से होने का दावा करती है, ऐसा लगता है कि वह भूल गई हैं कि किसान देश के अन्नदाता हैं तथा उनके क्रूर और असंवेदनशील शब्दों व मानसिकता की किसान मोर्चा द्वारा निंदा की जाती है.

'हरियाणा में बीजेपी नेताओं का विरोध'

मोर्चा की ओर से कहा गया कि पूरे हरियाणा में बीजेपी के मंत्रियों और अन्य नेताओं के खिलाफ जमकर विरोध हो रहा है और इन नेताओं को जगह-जगह काले झंडे दिखाकर विरोध किया जा रहा है. कल कुरुक्षेत्र में मंत्री कमलेश ढांडा का काले झंडों से स्वागत किया गया. मंत्री के सभास्थल को स्थानांतरित किए जाने के बाद भी प्रदर्शनकारी किसान वहां पहुंचे और उन्हें काले झंडे दिखाए. कुछ किसानों को हिरासत में लिया गया और बाद में छोड़ दिया गया.

जबकि जींद में आज भाजपा की बैठक का विरोध किया गया. आज हिसार में भी भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ओम प्रकाश धनखड़ को पार्टी की एक बैठक में शामिल होने के लिए काले झंडे के विरोध का सामना करना पड़ा. यमुनानगर में भी आज स्थानीय किसानों द्वारा वहां भाजपा की एक बैठक का जमकर विरोध किया गया, जहां उन्होंने मंत्री मूलचंद शर्मा के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया.

हरियाणा में भाजपा के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है. कुरुक्षेत्र, यमुनानगर, जींद, हिसार आदि कई जगहों पर किसानों ने विरोध प्रदर्शन किया. राज्य पुलिस द्वारा झूठे मुकदमे वापस लेने पर किसानों ने 24 जुलाई का अल्टीमेटम दिया है. 

 

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