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मॉनसून सत्र में संसद तक कृषि कानूनों के खिलाफ पैदल मार्च निकालने की तैयारी में किसान!

केंद्र सरकार की ओर से लाए गए तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ मॉनसून सत्र के दौरान किसान दिल्ली कूच करेंगे. संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में शुक्रवार को इस पर फैसला लिया जा सकता है. संसद तक पैदल मार्च किसान कर सकते हैं.

तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ जारी है किसानों का विरोध प्रदर्शन (फाइल फोटो-PTI) तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ जारी है किसानों का विरोध प्रदर्शन (फाइल फोटो-PTI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • कृषि कानूनों के खिलाफ जारी है विरोध प्रदर्शन
  • केंद्र सरकार कानून वापस लेने को नहीं तैयार
  • संसद तक पैदल मार्च करने की तैयारी में किसान

केंद्र सरकार के तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शन थमता नजर नहीं आ रहा है. कोरोना की दूसरी लहर में भी प्रदर्शनस्थलों पर टिके किसान अब मॉनसून सत्र के दौरान दिल्ली कूच की तैयारी में हैं. संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में आज यानी शुक्रवार को किसान दिल्लू कूच पर फैसला ले सकते हैं.

किसान दिल्ली और संसद तक पैदल मार्च का ऐलान कर सकते हैं. भारतीय किसान यूनियन एकता (डकोंद) के प्रधान बूटा सिंह ने यह इशारा किया है. वहीं 6 जुलाई को पंजाब में मोती महल का घेराव किसान जत्थे निकालकर करेंगे. पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के आवास का नाम मोती महल है.

दरअसल किसान पंजाब में धान उगाने वाले किसानों की बिजली सप्लाई कम कर दी गई है, जिसकी वजह से किसान नाराज चल रहे हैं. पहले किसानों को 8 घंटे तक बिजली दी जाती है, वहीं अब महज 4 घंटे किसानों को बिजली दी जा रही है, जिसकी वजह से किसानों में आक्रोश देखने को मिल रहा है.

कृषि कानूनों को पूरी तरह खारिज करने के पक्ष में नहीं शरद पवार, बोले-विवादित भाग में हो संशोधन

मॉनसून सत्र के दौरान पार्टियों पर किसानों की नजर!

बूटा सिंह ने कहा है कि मॉनसून सत्र में विपक्षी दलों पर किसान निगाह रखेंगे. मॉनसून सत्र में जो पार्टी किसानों का समर्थन नहीं करेगी, उसी का विरोध किसान शुरू करेंगे. बूटा सिंह ने एनसीपी प्रमुख शरद पवार के कृषि कानूनों के मसर्थन वाले बयान पर भी बोला. दरअसल शरद पवार ने कहा था कि विवादस्पद कृषि कानूनों को पूरी तरह से खारिज कर देने के बजाय उसके उस भाग में संशोधन किया जाना चाहिए, जिससे किसानों को दिक्कत है.

बिना कानून वापसी के नहीं हटेंगे किसान

कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के बयान पर बूटा सिंह ने कहा है कि कानून रद्द होने से कम कुछ भी किसानों को मंजूर नहीं है. तीनों कानून अगर रद्द नहीं किए जाते हैं तो बीजेपी का सफाया हो सकता है. कोई दूसरी सरकार भी आ जाए, फिर भी अगर कृषि कानून रद्द नहीं होंगे तो किसान नहीं हटेंगे.

किसान आंदोलन के चलते बहादुरगढ़ और सोनीपत के उद्योगों को हो रहे नुकसान पर बूटा सिंह ने कहा कि किसानों को भी करोड़ों का नुकसान हो रहा है. सबसे सहयोग की उम्मीद किसान कर रहे हैं.

संसद भवन के पास प्रदर्शन कर रहे किसान हिरासत में

दिल्ली में संसद भवन के पास पहुंचकर प्रोटेस्ट कर रहे किसानों को दिल्ली पुलिस ने गुरुवार को हिरासत में लिया था. प्रोटेस्ट कर रहे किसानों को दिल्ली पुलिस पार्लियामेंट थाने ले गई है. गुरुवार सुबह करीब साढ़े 8 बजे 5 किसान हाथों में झंडे लेकर पार्लियामेंट गेट पहुंचकर नारेबाजी करने लगे. कई घंटों की पूछताछ के बाद पुलिस ने किसानों पर 65 डीपी एक्ट के तहत कार्रवाई की, फिर छोड़ दिया. घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा ने बढ़ा दी है.
 

 

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