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किसान आंदोलन: भारत आने की फिराक में हैं कई खालिस्तानी समर्थक, वीजा मिलने का इंतजार!

सूत्रों के मुताबिक, तीन प्रमुख खालिस्तान समर्थक संगठन 'दिल्ली चलो' मुहिम के नाम पर पंजाबी मूल के अप्रवासी भारतीयों से आर्थिक मदद एकत्र कर रहे हैं. प्रवर्तन निदेशालय और आयकर विभाग कुछ कथित विदेशी स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा भारत भेजी गई आर्थिक मदद को लेकर जांच में जुटा है.

सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर हैं ऐसे संगठन (फाइल फोटो) सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर हैं ऐसे संगठन (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • किसान आंदोलन में घुसपैठ की फिराक
  • 3 खालिस्तानी संस्थाएं राडार पर
  • सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में भी है मामला

भारत विरोधी ताकतें दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन की आड़ में अपने खतरनाक मंसूबों को अंजाम देने की फिराक में हैं. इन ताकतों में तीन प्रमुख खालिस्तानी संगठनों के नाम सामने आए हैं. इनमें वर्ल्ड सिख ऑर्गेनाइजेशन ऑफ कनाडा, सिख्स फॉर जस्टिस और खालसा एंड इंटरनेशनल जैसी संस्थाओं के नाम शामिल हैं, जिनकी संदिग्ध गतिविधियां भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर हैं. 

एक तरफ जहां किसान संगठन पिछले डेढ़ महीने से भी ज्यादा समय से दिल्ली की सीमा पर डेरा डाले हुए हैं, वही विदेशों (खासकर कनाडा) से काम कर रहे खालिस्तानी संगठन आंदोलन की आड़ में कानून व्यवस्था भंग करने की फिराक में हैं.

सूत्रों के मुताबिक, तीन प्रमुख खालिस्तान समर्थक संगठन 'दिल्ली चलो' मुहिम के नाम पर पंजाबी मूल के अप्रवासी भारतीयों से आर्थिक मदद एकत्र कर रहे हैं. प्रवर्तन निदेशालय और आयकर विभाग कुछ कथित विदेशी स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा भारत भेजी गई आर्थिक मदद को लेकर जांच में जुटे हैं.

आयकर विभाग पंजाब के एक मशहूर गायक द्वारा किसान आंदोलन में की गई मदद और उसके स्रोत की जांच भी कर रहा है. उधर, विदेशों में बसे कई खालिस्तानी समर्थक भारत आने के लिए ताबड़तोड़ वीजा अप्लाई कर रहे हैं, जिसकी भनक भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को है. 

सूत्रों के मुताबिक, किसान आंदोलन के दौरान कनाडा में कुछ संदिग्ध लोगों ने भारत आने के लिए वीजा अप्लाई किया है. उनका मकसद सिर्फ आंदोलन के नाम पर शांति भंग करना है. खालिस्तानी समर्थकों के दबाव में आकर ही कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने पिछले महीने किसान आंदोलन को लेकर भारत विरोधी टिप्पणी की थी.

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सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में लाया गया मामला 

किसान आंदोलन की आड़ में शांति भंग करने की कोशिशों का मामला सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में भी लाया गया है. कृषि कानूनों से संबंधित याचिकाओं की सुनवाई करते हुए वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने सिख फॉर जस्टिस का हवाला देते हुए कोर्ट को बताया है कि यह संगठन कट्टरवादी लोगों को प्रदर्शन में शामिल होने के लिए ₹10,000 प्रति व्यक्ति प्रलोभन दे रहा है.

एक अन्य वकील पीएस नरसिम्हा और अटॉर्नी जनरल ऑफ इंडिया केके वेणुगोपाल ने भी कोर्ट को किसान आंदोलन में विघटनकारी ताकतों की उपस्थिति की जानकारी दी है. वहीं, जांच में सामने आया है कि खालिस्तानी संगठनों की कारगुजारी सिर्फ पंजाब तक ही सीमित नहीं है. प्रतिबंधित सिख संगठन सिख्स फॉर जस्टिस पंजाब के अलावा हरियाणा और पंजाब से सटे जम्मू-कश्मीर के कई शहरों में अपनी पकड़ बनाने की कोशिश कर रहा है.

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