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कृषि बिल पर पलटवार, अमरिंदर का पूरे पंजाब को मंडी घोषित करने पर विचार

किसान बिल को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों में आरपार की लड़ाई जारी है. किसान, राजनीतिक दल समेत कई संगठन सड़कों पर हैं. इस बीच पंजाब की अमरिंदर सरकार राज्य को मंडी यार्ड घोषित करने पर विचार कर रही है.

पंजाब में किसान कर रहे हैं बिल का विरोध (PTI) पंजाब में किसान कर रहे हैं बिल का विरोध (PTI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • कृषि बिल के खिलाफ सड़कों पर किसान
  • पंजाब-हरियाणा में हो रहा है मुखर विरोध
  • पंजाब सरकार ला सकती है नया कानून

केंद्र सरकार द्वारा लाए गए कृषि विधेयकों के खिलाफ हल्ला बोल जारी है. आज दर्जनों किसान संगठनों और राजनीतिक दलों ने इस बिल के खिलाफ भारत बंद बुलाया है. हरियाणा और पंजाब के इलाकों में किसानों की ओर से आक्रामक प्रदर्शन किया जा रहा है. इस बीच केंद्र सरकार के द्वारा लाए गए इस बिल की काट निकालने के लिए पंजाब की अमरिंदर सरकार एक नया कानून ला सकती है. ताकि किसान मंडियों को लेकर जो बदलाव किए गए हैं, वो राज्य में लागू ना हो सकें.

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब सरकार राज्य में APMC एक्ट में बदलाव कर पूरे राज्य को प्रिंसिपल मंडी यार्ड घोषित कर सकती है. राज्य सरकार पर किसानों और मंडियों का भारी दबाव है, ऐसे में राज्य स्तर पर कानून में बदलाव करके केंद्र के कानून को पूरी तरह से लागू करने से रोका जा सकता है. 

अगर राज्य सरकार के द्वारा ये बदलाव किया जाता है, तो कोई राज्य से बाहर अपनी फसल नहीं बेच पाएगा. साथ ही किसानों के MSP से कम फसल का दाम नहीं मिलेगा और राज्य सरकार को मंडी फीस के रूप में राजस्व मिलता रहेगा. हालांकि, इस पर अभी अमरिंदर सरकार ने कोई आधिकारिक फैसला नहीं लिया है और अभी कानूनी सलाह ली जा रही है.

जबकि केंद्र द्वारा लाए गए बिल में ये प्रावधान है कि कोई भी किसान पूरे देश में कहीं पर भी अपनी फसल बेच सकता है. उसे मंडी में फसल बेचना ही जरूरी नहीं है, बल्कि वो सीधे किसी भी कंपनी या अन्य ग्राहक से समझौता कर सकता है. इसके तहत उसे कोई मंडी शुल्क भी नहीं देना होगा. हालांकि, केंद्र का एक्ट इस बात की गारंटी नहीं देता है कि किसान को MSP से ऊपर ही दाम मिलेगा. 

राज्य सरकार में मंत्री मनप्रीत सिंह बादल के अनुसार, सरकार इसपर विचार कर सकती है लेकिन पहले सुप्रीम कोर्ट का रुख किया जाएगा. पंजाब से पहले राजस्थान की कांग्रेस सरकार ने भी कुछ ऐसा ही फैसला लिया था, जिसके तहत राजस्थान में मौजूद फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, सेंट्रल वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन और राजस्थान स्टेट वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन को राज्य के APMC एक्ट के तहत लाया गया था. 

पंजाब की कांग्रेस सरकार ने इस बिल का विरोध किया है और पंजाब में अकाली दल-कांग्रेस के बीच दंगल भी जारी है. कांग्रेस की चुनौती के बाद अकाली दल ने केंद्र सरकार से मंत्री पद छोड़ दिया और एनडीए से बाहर निकलने की कगार पर है. अकाली दल नेता सुखबीर बादल ने भी अमरिंदर सरकार से अपील की है कि वो राज्य को प्रिंसिपल मंडी यार्ड घोषित कर दें.

पंजाब में राज्य सरकार के पंजाब मंडी बोर्ड एक्ट, 1961 के तहत पूरे राज्य को मंडी यार्ड घोषित किया जा सकता है. अभी पंजाब में करीब दो हजार मंडियों में ये एक्ट लागू किया गया है. धान खरीद के वक्त सरकार की ओर से ऐसा फैसला लिया जाता है, साथ ही कोरोना संकट को देखते हुए भी राज्य सरकार ने कुछ जगह ये एक्ट लागू किया था. ताकि किसानों की फसल उसी क्षेत्र और मंडी के आसपास रहे जहां पर वो हैं.


 

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