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'आग कैसे बुझाएं, बाल्टी कैसे उठाएं... सब हम बताएं?' प्रदूषण पर केंद्र-राज्य सरकारों को SC की फटकार

पलूशन (Delhi Pollution) पर केंद्र और राज्य सरकारों को सुप्रीम कोर्ट की फटकार लगी है. इसमें नौकरशाहों को भी घेरा गया. पराली और पटाखों पर भी कोर्ट ने बात की.

दिल्ली-एनसीआर के पलूशन पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई थी दिल्ली-एनसीआर के पलूशन पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई थी
स्टोरी हाइलाइट्स
  • दिल्ली-एनसीआर के पलूशन पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई थी
  • सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और संबंधित राज्य सरकारों को फटकारा है

सुप्रीम कोर्ट में आज बुधवार को दिल्ली के प्रदूषण (Delhi Pollution) के मसले पर सुनवाई हुई. यहां सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और संबंधित राज्य सरकारों के रुख पर नाराजगी जताई. कोर्ट ने कहा कि सिर्फ बैठकों पर बैठकें हो रही हैं. कोर्ट ने यहां तक कह दिया कि नौकरशाह फैसला लेने से बच रहे हैं. वो सिर्फ कोर्ट के आदेश का इंतजार करते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नौकरशाह चाहते हैं कि कोर्ट उन्हें बताए कि आग कैसे बुझाएं. कैसे बाल्टी उठाएं. बता दें कि इस मामले पर अब अगली सुनवाई 24 नवंबर को होगी.

प्रदूषण रोकने के लिए उठाए गए तमाम सरकारों के हलफनामे पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई तो कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को तालमेल की कमी को लेकर कड़ी फटकार लगाई. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आपात संकट को सुलझाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच तालमेल की कमी नजर आ रही है. सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा कि नौकरशाही सुस्त है और सिर्फ हमारे फैसले पर दस्तखत करने का इंतजार कर रही है.

सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा है कि हम मौसम के सुधरने और धुएं के छंटने का इंतजार नहीं कर सकते.

पिछले तीस सालों से एक जज के रूप में मैंने देखा है कि नौकरशाही ने आलस घर गया है. वो कोई फैसला नहीं लेना चाहती. वो सिर्फ ये चाहती है कि हर फैसला और सुझाव कोर्ट से आए. वो चाहते हैं कि हम उन्हें बताएं कि आग कैसे बुझाएं. कैसे बाल्टी उठाएं.

सख्त लहजे में बोले मुख्य न्यायाधीश एन वी रमना

बता दें कि मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कमीशन फॉर एयर क्वालिटी की बैठक हुई थी. कोर्ट ने पूछा कि इस बैठक में कोई ठोस फैसला क्यों नहीं लिया जा सका. क्यों दो घंटे बर्बाद किए गए?

मुख्य न्यायाधीश ने मोबाइल निकालकर पढ़ी एक रिपोर्ट

सुनवाई सबसे ज्यादा बहस पराली को लेकर हुई. दिल्ली सरकार लगाकार पराली को प्रदूषण की अहम वजह बता रही है लेकिन सुनवाई के मुख्य न्यायाधीश ने मोबाइल निकालकर एक रिपोर्ट पढ़ी. उन्होंने कहा IIT द्वारा एक शोध पत्र कहता है कि केवल कुछ प्रतिशत ही पराली जलाना प्रदूषण में योगदान देता है.

कोर्ट ने कहा कि सरकार अगर पराली जलाने को लेकर किसानों से बात करना चाहती है तो बेशक करे, लेकिन किसानों को दंडित ना करे. पांच सितारा होटलों में बैठकर किसानों पर टिप्पणी करना बहुत आसान है. लेकिन कोई यह नहीं समझना चाहता कि किसानों को पराली क्यों जलानी पड़ती है.

कोर्ट में आया हाई-फाई कारों का जिक्र

सुनवाई के दौरान दिवाली पर आतिशबाजी का मुद्दा भी उठा. सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया कि पिछले दस दिनों से पटाखे क्यों जलाए जा रहे हैं? एक याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि शादियों का सीजन शुरू हो गया है दिल्ली में पटाखे पर पूर्ण बैन लगाने की जरूरत है, नहीं तो दिल्ली का दम घुट जाएगा. मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि कुछ जरूरी कदम उठाने पड़ेंगे.

सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने प्रदूषण में वाहनों के योगदान पर सवाल किया. जस्टिस सूर्यकांत ने कहा आप सभी कह रहे हैं कि परिवहन मुख्य कारण है. हम दिल्ली की सड़कों पर चलने वाली सभी हाई-फाई कारों के बारे में जानते हैं. इसे रोकने के लिए उन्हें कौन प्रोत्साहित करेगा?

(आजतक ब्यूरो)

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