ऑनलाइन पैथोलॉजिकल लैब को नियमित करने के दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश का पालन नहीं होने पर दिल्ली के चीफ सेक्रेटरी के खिलाफ दायर की गई अवमानना याचिका हाई कोर्ट कल गुरुवार को सुनवाई करेगा.
दिल्ली हाई कोर्ट में लगाई गई अवमानना याचिका में दिल्ली के मुख्य सचिव, सचिव, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, स्वास्थ्य सेवा के महानिदेशक और ICMR के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने की मांग की गई है. याचिका में कहा गया है कि अवैध रूप से ऑनलाइन चल रही पैथोलॉजिकल लैब्स को लेकर अगस्त में किए गए दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश का पालन अभी भी सरकार और एजेंसियों की तरफ से नहीं किया गया है.
याचिका में यह भी कहा गया है कि कई अवैध ऑनलाइन एग्रीगेटर एसएमएस या विभिन्न ऑनलाइन मोड के माध्यम से COVID-19 के टेस्ट के साथ बॉडी चेकअप के लिए आकर्षक पैकेज की पेशकश स्वतंत्र रूप से विज्ञापन देकर कर रहे हैं. याचिकाकर्ता ने इस अवमानना याचिका में खासतौर से इस बात का उल्लेख किया है कि इस तरह की ऑनलाइन एग्रीगेटर ई-मेल ऑनलाइन माध्यम के जरिए ही इस तरह के विज्ञापन दे रहे हैं जो याचिकाकर्ता को भी प्राप्त हुए.
याचिकाकर्ता रोहित जैन ने अपने वकील शशांक देव सुधि के माध्यम से इस पूरे मामले में कोर्ट को दखल देने के लिए कहा है. याचिकाकर्ता का कहना है कि यह एक बेहद गंभीर मुद्दा है कि बिना किसी मान्यता के ऐसे ऑनलाइन एग्रीगेटर जिनके एजेंसी को, जिन्हें मान्यता प्राप्त नहीं है कोविड के परीक्षण के लिए या बाकी के और टेस्ट कैसे कर सकते हैं? ये आम लोगों की जान को जोखिम में डालने वाला प्रयास है जिस पर तुरंत लगाम लगाई जाने की जरूरत है क्योंकि इन ऑनलाइन एग्रीगेटर्स की तरफ से आम लोगों को टेस्ट कराने के लिए बेहद आकर्षक ऑफर दिए जाते हैं, इसलिए ज्यादातर आम लोग इस चीज पर ध्यान ही नहीं दे पाते कि यह पैथोलॉजिकल लैब्स मान्यता प्राप्त है भी या नहीं.
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याचिका में कहा गया है कि एक तरफ ऑनलाइन चल रहे पैथोलॉजिकल लैब्स आम लोगों की जान के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ मान्यता प्राप्त पैथोलॉजिकल लैब्स को इससे से व्यवसायिक नुकसान भी हो रहा है. गैर मान्यता प्राप्त पैथोलॉजिकल लैब्स के पास कोई प्रशिक्षित स्टाफ नहीं होता जबकि मान्यता प्राप्त पैथोलॉजिकल लैब्स सभी सरकारी नियमों और गाइडलाइंस का पालन करते हुए आम लोगों के टेस्ट करते हैं.
दिल्ली हाई कोर्ट की तरफ से 6 अगस्त को सरकार और एजेंसियों को ऑनलाइन चल रही पैथोलॉजिकल लैब्स पर क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट 2010 के मुताबिक नियमों का पालन न करने और अवैध रूप से चल रही लैब्स पर कारवाई करने के आदेश दिए थे, लेकिन याचिकाकर्ता का दावा है कि अगस्त में दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा किए गए आदेश का आज तक पालन नहीं किया गया.