दिल्ली हाईकोर्ट ने कोरोना महामारी के कारण इस साल के कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (CLAT 2020) को घर बैठे ऑनलाइन परीक्षा के जरिए आयोजित कराने की मांग करने वाली याचिका को खारिज कर दिया है. कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा है कि वह इस को सुनवाई के योग्य नहीं मानते हैं.
याचिकाकर्ता खुद एक कानून स्नातक है और एलएलएम करना चाहता है. कोर्ट में दाखिल की याचिका में उसने चिंता जताई थी कि वह अस्थमा से पीड़ित है और इस तरह के व्यक्तियों के लिए कोविड-19 के वक्त में बाहर जाकर परीक्षा देना अपने जीवन को संकट में डालने जैसा है.
इसके अलावा आज के वक्त में फिजिकल परीक्षाएं कराना भारत के संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत उसके 'राइट टू लाइफ' और 'राइट टू हेल्थ' की गारंटी का भी उल्लंघन है. लेकिन कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता ने एलएलबी की पढ़ाई 2016 में ही पूरी कर ली थी. लेकिन 4 साल के अंतराल के बाद एलएलएम करना चाहता है.
याचिकाकर्ता ने कोर्ट से मांग की थी कि वो CLAT-2020 परीक्षा की अधिसूचना को रद्द करने के लिए सरकार को उचित दिशा निर्देश जारी करे. लेकिन इस याचिका के जवाब में, नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज के संघ ने कोर्ट को बताया कि लगभग 78,000 छात्रों के लिए घर-आधारित ऑनलाइन परीक्षा संभव नहीं है. क्योंकि इस परीक्षा को देने के लिए दूरदराज से छात्र आते हैं जिनके पास लैपटॉप या डेस्कटॉप जैसी तकनीकी सुविधा घर पर उपलब्ध नहीं है. ऐसी स्थिति में घर से होने वाली ऑनलाइन परीक्षाओं के लिए बहुत सारे छात्र मानसिक रूप से तैयार नहीं होंगे और हम भी इतनी बड़ी मात्रा में कंप्यूटर और लैपटॉप छात्रों को उपलब्ध कराने में सक्षम नहीं है. ऐसे में इन परीक्षाओं को कराने के लिए परीक्षा केंद्र ही उपयुक्त स्थान हैं.
हालांकि संघ ने कोर्ट को पूरी तरह से आश्वस्त किया कि कोरोना को देखते हुए परीक्षाएं पूरी सावधानी और सुरक्षा के साथ कराई जाएंगी. इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट पहले ही केंद्र सरकार के अधीन कई परीक्षाओं को परीक्षा केंद्रों पर कराने की अनुमति दे चुका है लिहाजा यह नियम इस परीक्षा पर भी लागू होना चाहिए. CLAT-2020 परीक्षा का आयोजन 28 सितंबर को होना है.
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