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कोरोना: कोविशील्ड के डोज में गैप बढ़ाने के पीछे क्या वजह, डॉक्टर वीके पॉल ने बताया कारण

वीके पॉल ने कहा कि कोविशील्ड वैक्सीन के डोज के बीच का अंतराल बढ़ाने के पीछे इसके और ज्यादा प्रभावी होने के अलावा कोई कारण नहीं है. ब्रिटेन में ऐसा करने से बेहतर प्रभावी परिणाम सामने आए हैं.

डॉ. वीके पॉल ने कोविशील्ड वैक्सीन के गैप को लेकर सफाई दी (फाइल) डॉ. वीके पॉल ने कोविशील्ड वैक्सीन के गैप को लेकर सफाई दी (फाइल)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 'वैक्सीन वायरस के संक्रमण को रोकने में मददगार'
  • गैप बढ़ाने से वैक्सीन और ज्यादा प्रभावी: डॉ. पॉल

कोरोना संकट के बीच वैक्सीन अहम हथियार के तौर पर साबित हो रही है. देश में वैक्सीनेशन अभियान भी तेज कर दिया गया है. हालांकि वैक्सीन के पहले और दूसरे डोज के बीच के गैप को बढ़ाए जाने को लेकर लोगों के मन में कई सवाल उठ रहे हैं. कोविशील्ड वैक्सीन की डोज के बीच गैप को लेकर डॉ. वीके पॉल ने वजह स्पष्ट की है.

उन्होंने कहा कि इस वैक्सीन के डोज के बीच का अंतराल बढ़ाने के पीछे इसके और ज्यादा प्रभावी होने के अलावा कोई कारण नहीं है. ब्रिटेन में ऐसा करने से बेहतर प्रभावी परिणाम सामने आए हैं. डॉक्टर पॉल ने बताया कि ब्रिटेन ने वैक्सीन की डोज में गैप बढ़ाने का फैसला लिया था. हम इस फैसले का सम्मान करते हैं. लेकिन हमें अपने वैज्ञानिकों और संस्थाओं का भी सम्मान करना है. यूके में वैक्सीन की डोज तीन महीने बाद लेने का प्रोटोकॉल है.

उन्होंने कहा कि अगर हम प्रोटेक्शन लेवल की बात करें तो यह 60 से 85 प्रतिशत हल्के रोग और गंभीर इंफेक्शन वालों पर प्रभावी है. यह बीमारी के प्रति बचाव में प्रभावी है. इससे हमें आत्मविश्वास मिला है. अगर आंकड़ों की बात करें तो यह भी सामने आया है कि यह वायरस के संक्रमण को भी रोकने में  मदद करता है. उन्होंने लोगों से अपील की कि लोग कोविशील्ड के डोज में गैप बढ़ाने के पीछे की वजह को किसी अन्य नजरिए से ना देखें.

दिल्ली में लोग वैक्सीनेशन के लिए आएंः डॉ. पॉल

म्यूकोमरकोसिस-ब्लैक फंग्स को लेकर डॉक्टर वीके पॉल ने कहा कि यह चेहरे, दिमाग, आंख और नाक पर असर करता है. मधुमेह (शुगर) के मरीजों के लिए यह ज्यादा खतरनाक है. लोग अपना शुगर लेवल नियंत्रण में रखें क्योंकि ऐसे लोगों को जान का खतरा ज्यादा है. उन्होंने कहा कि ऐसा ज्यादातर तब होता है जब कोरोना मरीजों को स्टेरॉयड दिया जाए. कुछ गंभीर मरीजों को स्टेरॉयड की जरूरत होती है लेकिन यह सावधानी के साथ दिया जाना चाहिए.

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दिल्ली में और वैक्सीन देने की मांग को लेकर उन्होंने कहा कि दिल्ली में स्वास्थ्यकर्मियों और फ्रंटलाइन वर्कर्स का कवरेज नेशनल एवरेज से कम है. हम वैक्सीन बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं. बनाई गई नीति के तहत हम वैक्सीन बना रहे हैं और राज्यों को सप्लाई कर रहे हैं. हालांकि वैक्सीन का सदुपयोग भी होना चाहिए.

उन्होंने कहा कि भारत में हेल्थकेयर वर्कर्स के लिए सिंगल डोज कवरेज 90 प्रतिशत से अधिक है जबकि कुछ राज्यों में यह 89 प्रतिशत है. वहीं दिल्ली में यह 78 प्रतिशत है. दिल्ली के लोगों को भी वैक्सीनेशन के लिए जाना चाहिए जिससे की यह संख्या बढ़ सके.

 

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