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पहले कोरोना फिर ब्लैक और व्हाइट फंगस का शिकार, मरीज के फेफड़ों पर पड़ा असर

अब इसी कड़ी में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है जहां पर एक ही मरीज में ब्लैक और व्हाइट फंगस के लक्षण दिखाई पड़े हैं. इस वजह से उनके फेफड़े भी प्रभावित हुए हैं.

एक ही मरीज में ब्लैक-व्हाइट फंगस ( सांकेतिक फोटो) एक ही मरीज में ब्लैक-व्हाइट फंगस ( सांकेतिक फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • एक ही मरीज में ब्लैक-व्हाइट फंगस
  • डॉक्टरों ने किया सफल इलाज

कोरोना के बाद ब्लैक और व्हाइट फंगस से निपटना भी भारत के लिए बड़ी चुनौती है. बड़ी तादात में मरीज संक्रमित भी हो रहे हैं और उन्हें तरह-तरह की दिक्कतों का भी सामना करना पड़ रहा है. अब इसी कड़ी में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है जहां पर एक ही मरीज में ब्लैक और व्हाइट फंगस के लक्षण दिखाई पड़े हैं. इस वजह से उनके फेफड़े भी प्रभावित हुए हैं.

एक ही मरीज में ब्लैक-व्हाइट फंगस

इसे Aspergilloma नाम की बीमारी बताया गया है जो उन लोगों में देखने को मिलती है जिनका इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है. वैसे तो ये बीमारी उन लोगों में देखने को मिलती है जो ट्यूबरक्लोसिस का शिकार हो जाते हैं, लेकिन आजकल पोस्ट कोविड भी लोगों में ये बीमारी देखने को मिल रही है. इस बीमारी की वजह से लोगों के फेफड़ों पर असर पड़ता है और अगर सही समय पर इलाज ना मिले तो, जान भी जा सकती है.

डॉक्टरों ने किया सफल इलाज

इस केस की बात करें तो यहां पर रामा नागेश्वर राव को 10 जुलाई को अस्पताल में भर्ती करवाया गया था. उनके लेफ्ट लंग में डैमिज पाया गया था. ऐसे में डॉक्टरों ने lobectomy सर्जरी को अंजाम दिया और सफलतापूर्वक वायरस बॉल को बाहर निकाल दिया. अभी के लिए मरीज की स्थिति में सुधार है. बताया गया है कि नागेश्वर को मई में कोरोना भी हो गया था. उसके बाद ही उन्हें उनके फेफड़ों में दिक्कत महसूस होनी शुरू हुई थी. जब स्थिति ज्यादा बिगड़ी, तब उन्हें अस्पताल में एडमिट करवाया गया.

डॉक्टरों ने क्या कहा?

इस बारे में SLG अस्पताल के डॉक्टर विकेक बाबू बताते हैं कि ये बीमारी कोरोना के लॉन्ग टर्म साइड इफेक्ट के रूप में देखी जा सकती है. उनके मुताबिक इसका समय रहते इलाज जरूरी है क्योंकि ऐसा ना होने पर सिर्फ सर्जरी का ऑपशन बच जाता है.

जानकारी के लिए बता दें कि ब्लैक फंगस को पहले ही कई राज्यों द्वारा महामारी घोषित किया जा चुका है. कोरोना की तरह इससे निपटने के लिए भी केंद्र के स्तर पर रणनीति बनाई गई है और तय प्रोटोकॉल के तहत मरीजों का इलाज किया जा रहा है.


 

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