सीनियर राजनेता और पूर्व मंत्री डी बी चंद्रे गौड़ा का निधन हो गया है. 87 साल के चंद्रे गौड़ा बढ़ती उम्र के चलते कई बीमारियों से पीड़ित थे. चंद्रे गौड़ा से जुड़ी 1978 की घटना बहुत चर्चित है. उन्होंने इंदिरा गांधी के 'कमबैक' के लिए अपनी लोकसभा सीट छोड़ दी थी.
फिलहाल चंद्रे गौड़ा के पार्थिव शरीर को कर्नाटक में स्थित मुदिगेरे में उनके आवास पर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया है. बुधवार को उनका अंतिम संस्कार हो सकता है.
चंद्रे गौड़ा अलग-अलग वक्त पर विधानसभा, विधान परिषद के साथ-साथ लोकसभा और राज्यसभा के भी सदस्य रहे. अपने राजनीतिक करियर में उन्होंने प्रजा सोशलिस्ट पार्टी, कर्नाटक क्रांति रंगा, जनता पार्टी, जनता दल, कांग्रेस और भाजपा के लिए काम किया.
आपातकाल के बाद 1978 का लोकसभा उपचुनाव
चंद्रे गौड़ा के राजनीतिक जीवन का यह बड़ा फैसला था. साल 1977 में लोकसभा चुनाव हुए. इसमें इंदिरा गांधी हार गईं. फिर 1978 में चंद्रे गौड़ा ने लोकसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया. चंद्रे गौड़ा चिक्कामगलुरु से सांसद थे. फिर इस सीट से इंदिरा गांधी को चुनाव लड़वाया गया और उन्होंने बंपर जीत दर्ज की. इसे इंदिरा और कांग्रेस पार्टी दोनों के लिए 'टर्निंग प्वाइंट' माना जाता है. क्योंकि उस वक्त दोनों ही देश में आपातकाल लगाने की वजह से जनता के निशाने पर थे.
इंदिरा को यहां से चुनाव जितवाने के लिए चंद्रे गौड़ा ने जी-तोड़ मेहनत की थी. बाद में चंद्रे गौड़ा विधानपरिषद के सदस्य बन गए थे. वह अलग-अलग सरकारों में मंत्री और 1983-1985 के बीच विधानसभा स्पीकर भी रहे.
चंद्रे गौड़ा ने वकालत की पढ़ाई की थी. 1971 में कांग्रेस के साथ उन्होंने अपनी राजनीतिक पारी का आगाज किया था. वह तीन बार लोकसभा और एक बार राज्यसभा के सदस्य बने. 1971 और 1977 दोनों बार वह कांग्रेस की टिकट पर ही चिक्कामगलुरु से लोकसभा चुनाव जीते थे. फिर 1978 में इंदिरा के लिए सीट छोड़ने के बाद वह विधानपरिषद के सदस्य बने. बाद में उन्होंने कांग्रेस पार्टी छोड़कर कर्नाटक क्रांति रंगा पार्टी ज्वाइन की थी.
चिक्कामगलुरु के पूर्व सांसद के निधन पर पीएम मोदी, सीएम सिद्धारमैया और पूर्व पीएम देवे गौड़ा ने शोक जताया.