केंद्र सरकार ने जनगणना 2027 को लेकर पहला औपचारिक कदम उठा लिया है. सरकार ने जनगणना के पहले चरण का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है, जिसके साथ ही देश में जनगणना की प्रक्रिया की तैयारियां शुरू हो गई हैं.
जनगणना का पहला चरण इसी साल शुरू होना है. एक अप्रैल से लेकर 30 सितंबर तक यह चरण चलेगा. देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एक्सरसाइज को किया जाएगा.
सरकार ने पहले ही साफ कर दिया था कि साल 2027 की जनगणना में जाति संबंधी आंकड़ों को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से एकत्रित किया जाएगा. यह कदम पहली बार है जब स्वतंत्र भारत में जातिगत डेटा को आधिकारिक जनगणना में शामिल किया जाएगा.
क्या हैं वो 33 सवाल जो पूछे जाएंगे?
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2021 में क्यों नहीं हो पाई जनगणना?
भारत में 2021 की जनगणना कोविड-19 महामारी के कारण रुक गई थी. यह स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार हुआ जब समय पर जनगणना नहीं हो सकी. इससे पहले, चाहे दूसरे विश्व युद्ध का समय हो या चीन-पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध, भारत में जनगणना कभी रुकी नहीं थी. भारत की जनगणना एक जरूरी प्रक्रिया है जो देश के जनसांख्यिकीय, सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए आधार प्रदान करती है.
भारत की पिछली जनगणना, 2011 की जनगणना, देश की 15वीं और स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद सातवीं जनगणना थी. यह 9 फरवरी से 28 फरवरी 2011 तक सम्पन्न हुई थी. उस जनगणना का प्रोन्नत नारा था "हमारी जनगणना, हमारा भविष्य," जो इस प्रक्रिया की महत्वपूर्णता को दर्शाता है. नई जनगणना भारत के विकास की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाती है. इसलिए, जनगणना के स्थगन से देश के कई क्षेत्रीय और राष्ट्रीय योजनाओं पर प्रभाव पड़ सकता है.